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Great Indian Writers

By |2015-05-01T07:20:26+00:00March 25th, 2011|Recent News|

Want to know more about the great writers of Hindi literature and their work in a fast and easy way. Let us know if you would like to see video tutorial on that by leaving a comment.  

लोक लाहु परलोक निबाहू

By |2017-09-25T12:37:40+00:00March 10th, 2011|Hindi Blog & Stories|

महान कवि ,भक्त ,समाज सुधारक गोस्वामी तुलसीदास की रचना "राम चरित मानस "के पढ़ने और सुनने से ही व्यक्ति उन भावनाओं के सागर में बहने लगता है जहाँ हर रस ,हर भावः ,हर संवेदना अपने उत्कृष्ट रूप में नजर आती है |कहीं वात्सल्य का उमड़ता सागर है तो कहीं श्रृंगार की मादकता ,कहीं त्याग और [...]

मिलही न जगत सहोदर भ्राता

By |2017-09-25T12:37:50+00:00March 10th, 2011|Hindi Blog & Stories|

जीवन में स्मृतियों का जितना महत्व होता है उतना ही बचपन में घटित घटनाओं का ,जो हमें याद तो नही होती लेकिन माता -पिता और पारिवारिक जनों से इतनी सूनी होती हैं की वे अनुभूतियाँ बन जाती हैं इसी ही एक घटना मुझे बार -बार गुदगुदाती है और प्रेम से सराबोर कर जाती है मां [...]

जब तुम थीं ……

By |2017-09-25T12:37:58+00:00March 10th, 2011|Hindi Blog & Stories|

जब तुम थीं तब लगता था सारा संसार खुशियों ,उमंगों से भरा था कहीं कोई कमी न थी हर तरफ प्यार ही प्यार ,सब हमारे थे कोई पराया न था लगता था सब जाने -पहचाने हैं ,अपने आप को बडा होशियार ,समझदार समझते थे लेकिन आपके जाने के बाद जाना कि हम कितने गलत थे [...]

चापलूसी करो -आगे बढो- विपक्ष

By |2017-09-25T12:52:52+00:00March 10th, 2011|HIndi Debates|

विपक्ष 'उद्यमेन ही सिद्ध्यन्ते कार्याणि न मनोर्थे, नहि प्रविशन्ति सुप्तस्य सिंह स्य मुखे मृगा ' जिस प्रकार बलशाली शेर के मुख में जानवर स्वयम नही घुसते ,उसे इसके लिए स्वयम प्रयत्न करना पड़ता है हम मनुष्य होकर स्वयं अपने बल पर कार्य न करके यदि चापलूसी का सहारा लेते हैं ,यह निश्चय ही शर्मनाक है [...]

चापलूसी करो आगे बढो- पक्ष

By |2017-09-25T12:53:06+00:00March 10th, 2011|HIndi Debates|

पक्ष २१वी सदी में हर कोई एक दूसरे से आगे बढ़ने की होड़ में लगा रहता है हर कोई किसी भी तरह आगे बढ़ना चाहता है चाहे पैर पकड़ने पडें या ग ला | ऊँचाई या वाहवाही किसे पसंद नही ,इसके लिए थोड़ी सी चापलूसी करने में हर्ज ही क्या है ? आज -कल मुंह [...]

युवा -अवस्था -विपक्ष

By |2017-09-25T12:53:13+00:00March 10th, 2011|HIndi Debates|

कौन कहता है की युवावस्था भू लो भरी है ? यह तो कुछ कुंठित लोगो की शरारत जान पड़ती है। आज के युवा वर्ग का जीवनभूलो से भरा नही है वह तो प्रयोगों से भरा है । उत्साह , उमंग और आशाओ से भरी जिंदगी में वह सब कुछ भोग लेना चाहता हैं। जीवन को [...]

युवा-अवस्था फूलो भरी हैं तो प्रोड-अवस्था जीवन संघर्ष-रत और वृदावस्था पश्चाताप से परिपूर्ण-पक्ष

By |2017-09-25T12:53:22+00:00March 10th, 2011|HIndi Debates|

युवा-अवस्था फूलो से भरी हैं तो प्रोदावस्था जीवन संघर्षरत और वृदावस्था पस्चावस्था से परिपूर्ण । यह एक वाक्य आज के समाज को सम्पूर्ण झांकी को प्रस्तुत कर देता हैं। आधुनिक समय में समाज में व्याप्त कुंठा , ग्लानी , दुःख , अवसाद सब कुछ झलक पड़ता है। आज का युवा वर्ग द्विग-भ्रमित है इसलिए गलतियों [...]

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