वैंकू को चित्तौड़ की भूमि हमेशा आकर्षित करती थी …. कभी राणा प्रताप के शौर्य और वीरत के किस्से तो कभी रानी पद्मावती का सौंदर्य जो जौहर व्रत तक पहुँच गया तो कभी रानी से कृष्ण की दासी बनी मीरा की कहानियाँ … उसे ये भूमि अद्भुत लगती …. हल्दी घाटी के युद्ध के जीवंत किस्से उसे बार – बार वहाँ आने के आमंत्रण करते से लगते । इस बार की दशहरे की छुट्टियों में उसने उदयपुर और चित्तौड़ गढ़ घूमने का कार्य क्रम बना लिया । उसके घनिष्ठ मित्र – तनुष ,रुहीन और आशीष भी उसके साथ जा रहे थे । इन मित्रों के बिना उसका कोई कार्य क्रम बनता ही नहीं इसलिए सभी मित्र बहुत प्रसन्न थे ।

जब सभी मित्र उदयपुर शहर में पहुंचे तो उनकी खुशी का ठिकाना न रहा । झीलों और तालाबों के सौंदर्य से युक्त यह शहर अपनी विशेषताओं और खूबसूरती के लिए प्रसिद्ध है । चित्तौड़ गढ़ के विशाल प्रांगढ़ में आज घूमने का कार्यक्रम बनाया । उन्हों ने वहाँ वह इमारत भी देखी जिससे रानी पद्मावती को अलाउद्दीन खिलजी को दर्पण में प्रतिबिंब दिखाया गया था, जिससे युद्ध को ताला जा सके। उसके रूप सौन्दर्य को देख कर अलाउद्दीन पगला गया था और उसने रावल रतनसेन से युद्ध करने की ठानी । रानी पद्मावती ने इससे जौहर व्रत धारण किया । उनके साथ चित्तौड़ की लगभग चार सौ महिलाओं ने आत्म दाह किया । युद्ध में विनाश हर तरफ का होता है चाहे वह विजयी पक्ष ही क्यों न हो । रानी के अद्वितीय सौंदर्य और शौर्य के किस्से आज भी वहाँ की जनता के बीच सुने जा सकते हैं । अलाउद्दीन महल में पहुंचा तो उसे भारतीय नारियों की गरिमा और अस्मिता का महत्व पता चला । वह हाथ झाडे खड़ा रह गया …..वह अपनी शक्ति (सेना की )से कुछ भी प्राप्त न कर सका । इतिहास उसे एक क्रूर शासक के रूप में ही याद करता है ।

जहां ये भूमि वीरता और शौर्य की कहानियों का जीता –जागता प्रमाण है , वहीं मीरा जैसी भक्तिन और कवयित्री भी इस भूमि की दैन हैं । जिन्होंने “ अंसुअन जल सींचि – सींचि प्रेम बेलि बोई”…..बड़े कष्ट और अपमान सहन किया । सब कुछ त्यागा – राज परिवार , सुख , सम्मान क्षण भर में छोड़ दिया । यही नहीं …..राणा के द्वारा दिया गया विष भी परिवार की मर्यादा के लिए पी लिया और अपने कृष्ण के प्रति प्रेम को अमर कर दिया । चित्तौढ़ गढ़ में बना वह छोटा सा मंदिर आज भी इस बात की गवाही देता है । कहते हैं मीरा जहर पीकर इस मंदिर में चली गई थी और दरवाजा बंद कर लिया था । जब इस मंदिर के पट तोड़े गए तो मीरा वहाँ न थीं …..उनकी लाल चुनरी कृष्ण की मूर्ति पर लिपटी हुई थी । मीरा सशरीर संसार से विदा हो गई ।

वैंकू और उसके सभी दोस्त अभी इतिहास के पन्ने ही पलट रहे थे कि रेडियो पर उदयपुर की एक दस मंज़िला इमारत में आग लगने की बात आग की तरह फैल गई । शाम ढल रही थी ….चारों ओर हड़कंप मचा था ….सभी अपने अपनों को परेशान हो रहे थे । वैंकू ,रुहिन,तनुष और आशीष अपने गैस्ट हाउस की ओर तेजी से बढ़ चले …. उन्हों ने बचाव का सामान और अग्निशमन के कपड़े लिए ….. जल्दी – जल्दी सबने अपने जूते पहने और सबने जरूरी सामान लिया । वैंकू को हमेशा से ही फायर मैन की ड्रेस बहुत प्रिय थी । वह अक्सर उसे अपने साथ ही रखता था …बचपन में वह फायर और रेस्कू के खेल खेला करता था आज सचमुच उसकी आश्यकता पड़ गई …..उसने अपनी ड्रेस पहनी ….रुहिन ने लंबी रस्सी संभाली …तनुष ने अन्य जरूरी सामान लिया …..और वे उस इमारत की ओर उड़ चले …..यह इमारत गणेश चौक से लगभग दो किलोमीटर की दूरी पर थी, आशीष दो भीगे कंबल भी साथ ले आया था । सभी बच्चों ने स्कूल में इस बात की ट्रेनिंग की थी ।

पहले तो यहाँ ऊंची – ऊंची इमारतें न थीं लेकिन अब तो हर जगह गगन चुम्बी इमारतें दिखाई देती हैं । कुछ तो आवास की कमी और कुछ बढ़ते हुए बिल्ड़र्स ,जो कुछ ही दिनों में लखपति से करोड़पति बन जाते हैं । इमारत के अलावा वे अन्य सुविधाएं देने का वादा तो कराते हैं लेकिन करते कुछ नहीं …इस पर राज्य सरकारें उचित कदम नहीं उठाती ,इससे ऐसी घटनाएँ आए दिन बढ़ती जा रही हैं । सड़कें या तो आवश्यकतानुसार चौड़ी नहीं होती या टूटी – फूटी होती हैं। इससे सुरक्षा के लिए किए जा रहे कार्यों में रुकावट आती है ।

सभी मित्र जल्दी ही उस स्थान पर पहुँच गए जहां आग लगी थी । उन्हों ने जाते ही काम शुरू कर दिया।  वैकू ने अपना वाकी –टौकी निकाला और मित्रों से संपर्क साधा ….. लोगो को धैर्य रखने और न घबराने की बात कही,तनुष ने ग्यारहवीं मंजिल का शीशा तोड़ा और इससे रस्सी बाहर लटकाई …..वहाँ धुआँ बहुत फैला था जिससे लोग परेशान थे । वैंकू और आशीष मास्क लगा कर अंदर घुस गए ….वे वहाँ से लोगों को बाहर निकाल रहे थे …..एंबुलेंस पहले ही आ गई थी …जल्दी से जल्दी उन्हे चिकित्सा सुविधा देने का प्रबंध किया जा रहा था । रुहिन रस्सी और सीढ़ी की सहायता से लोगों को निकाल रही थी । गीले कंबल और कपड़ों की सहायता से लोगों को निकालने में सुविधा मिल रही थी …. रुहिन को मास्क लगने के बाद भी बार – बार खांसी आ रही थी । कुछ लोग धुएँ और घबराहट के कारण बेहोश हो गए ……फायर ब्रिगेड के लोग भी आ गए थे ….बेहोश लोगो को अस्पताल पहुंचाया जा रहा था । वैंकू इतनी शीघ्रता से कार्य कर रहा था कि फायर ब्रिगेड वाले भी आश्चर्य चकित थे । तीसरी मंजिल से बारहवीं मंजिल तक सब आग की चपेट में आ गए थे । आग ,हवा के कारण तेजी से फैल रही थी । आग लगने के कारणों का अभी पता नहीं चला था । वैंकू अपनी कुल्हाड़ी से दरवाजे ,खिड़कियाँ काट कर जगह बनाता और लोगों को मौत के मुंह से खींच कर ले आता ।

लोगों के पालतू जानवर भी इस आग की चपेट में आ गए थे । वैंकू और उसके दोस्तों की टीम पूरी कोशिश में थी कि उन्हें भी किसी तरह बचा लिया जाए …. बच्चे बिना रुके और बिना थके इस कार्य में लगे हुए थे, जब कि आज वे घूम –घूम कर थक भी गए थे । जादुई जूतों ने अपनी उड़ान से बहुत लोगों को बचाने में मदद की थी । कभी वे दूसरों को निकालने में मदद करते कभी स्वयं ही लोगों को छोड़ने नीचे तक आ जाते ….. दो दो बच्चे दोनों तरफ से लोगों को  पकड़ कर निकालने का प्रयास कर रहे थे । सभी की मदद से इस भीषण अग्नि कांड पर काबू पाया जा सका ।

कुछ लोग गंभीर रूप से जल गए थे ….कुछ को मामूली चोटें आई , । सभी को शहर के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया । नुकसान भी बहुत हुआ ….सभी जानते हैं अग्नि में सब कुछ जल जाता है …..इसलिए आग के प्रति लापरवाही नहीं करनी चाहिए । बिजली के उपकरणों का सावधानी से प्रयोग करना चाहिए । प्रयोग करने के बाद स्विच से ऑफ करना चाहिए ….. बिजली की फिटिंग कराते समय अच्छे कंपनी के तार लगाने चाहिए …… एल पी जी का प्रयोग भी सावधानी से करें …जो चीज जितनी सुविधा प्रदान करती है उससे परेशानियाँ भी ज्यादा होती हैं । समय –समय पर इसकी देख भाल अवश्य कर लेनी चाहिए । लापरवाही का नतीजा खतरनाक हो सकता है । घर में कभी खुला पेट्रोल नाही रखना चाहिए ….ज्वलनशील पदार्थ बच्चों की पहुँच से दूर रखने चाहिए।

प्रत्येक स्कूल में आपदाओं से बचने के उपाय सिखाए जाने चाहिए । सभी बच्चों को समाज के प्रति अपने उत्तरदायित्व को समझना चाहिए …. और मदद करने के लिए तैयार रहना चाहिए ।

फायर ब्रिगेड की सहायता से छ्ह –सात घंटे में आग पर काबू पा लिया गया ……..लेकिन किसी –किसी घर के तो सब लोग अस्पताल में थे । सभी बच्चों ने उनका हौसला बढ़ाया ….और उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की । फायर ब्रिगेड के मुख्य अधिकारी ने बच्चों के धैर्य और साहस की भूरि – भूरि प्रशंसा की।

जब उनको यह पता चला कि ये बाहर से आए हैं तो वह और भी खुश हुआ कि ये जजवा सब में होना चाहिए । उसने कहा –“ ये हमारा सौभाग्य है कि आप लोग उदयपुर घूमने आए …..और यहाँ के लोगों की सुरक्षा की । आपके यश का प्रकाश भी राणा प्रताप की तरह सम्पूर्ण भारत में फैलेगा ।

सूर्य के प्रकाश के साथ – साथ वैंकू और उसके साथियों के कारनामों के यश का प्रकाश भी चारों ओर फैल रहा था । मोची अंकल खुश हो कर नाच रहे थे और सोच रहे थे ….किसी भी कार्य को अंजाम तक पहुँचने के लिए बहुत से हाथों और तरकीबों की जरूरत होती है तभी सफलता कामयाबी के परचम चूमती है । यदि मेरे बनाए जूतों को बच्चों का साथ न मिला होता तो वे व्यर्थ थे क्योंकि मैं स्वयं उनका प्रयोग कर नहीं सकता था और बच्चों की इनसे कार्य करने की क्षमता का विकास हुआ जिससे वे मन चाहे कार्य कर सके और सबका भला हो सका । इसलिए कहा गया है “ एक और एक दो नहीं ….ग्यारह होते हैं”। सभी एक दूसरे का साथ दें और सदा खुश रहें ।

शब्द – अर्थ

अग्नि शमन – जिस पर अग्नि का प्रभाव ज्यादा न पड़े

गगन चुम्बी – आकाश को छूने वाली

प्रति बिम्ब – सामान रूप ( छाया )