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Class 10 – क्षितिज : पाठ-6 : स्त्री-शिक्षा के विराधी कुतर्कों का खंडन

///Class 10 – क्षितिज : पाठ-6 : स्त्री-शिक्षा के विराधी कुतर्कों का खंडन

Class 10 – क्षितिज : पाठ-6 : स्त्री-शिक्षा के विराधी कुतर्कों का खंडन

पाठ-6

स्त्री-शिक्षा के विराधी कुतर्कों का खंडन

प्रश्न 1: कुछ पुरातन पंथी लोग स्त्रियों की शिक्षा के विरोधी थे। द्विवेदी जी ने क्या-क्या तर्क देकर स्त्री-शिक्षा का समर्थन किया?

उत्तर: स्त्री शिक्षा के विरोधियों ने निम्न तर्क दिए –

1. इतिहास में स्त्री-शिक्षा की चाल नहीं थी – उनका कहना था कि इस देश में स्त्रियों को पढ़ाने की चाल न थी। और यदि होती तो इतिहास – पुराणादि में उनको पढ़ाने की नियमबद्ध प्रणाली जरूर लिखी मिलती।

2. स्त्री-शिक्षा से घर में क्लेश बढ़ता है – उनका कहना था कि स्त्री-शिक्षा से अनर्थ होते है। घर में स्त्रियाँ समय नहीं देती और उनके उल्टे जवाब देने से घर में क्लेश बढ़ता है। उनके अनुकूल शकुंतला ने जो कटु वाक्य दुश्यंत को कहे, वह इस पढ़ाई का ही दुष्परिणाम था।

3. अनपढ़ भाषा का प्रयोग किया जाता था – जिस भाषा में शकुंतला ने श्लोक रचा था वह अनपढ़ो की भाषा थी। इससे प्रमाणित होता है कि नागारिकों की भाषा तो दूर, अनपढ़ गँवारों की भी भाषा पढ़ाना स्त्रियों को बरबाद करना है।

द्विवेदी जी ने इन कुतर्को का इस प्रकार खंडन किया –

1. उनका कहना है कि हमारे ग्रथों में हर बात स्पष्ट नहीं की गई और इसलिए स्त्री-शिक्षा का भी कुछ खास उल्लेख नहीं किया गया। इसका मतलब यह नहीं कि स्त्री शिक्षा उस (उसका प्रचलन) सामय नहीं थी। उसमे विमानों की भी बात की गई है, उससे यात्रा की बात की गई है पर उसमें उसके बनाए जाने पर कुछ बात नहीं की। इससे यह नही कहा जाना चाहिए कि स्त्री-शिक्षा का चलन उस समय नहीं था।

2. यदि पढ़ाई से औरते बिगड़ती है, सबको उल्टा जवाब देना सिखती है तो मर्द भी शिक्षा से बिगड़ने चाहिए। पढ़ाई से कोई बिगड़ता नहीं बल्कि बहुत कुछ सिखता है। कई बार पढ़ लिखे पुरूष भी बिगडे होते है।

3. उस समय श्लोक प्राकृत भाषा में लिखा गया था। वो समृद्ध भाषाओं का उचित प्रयोग करते थे क्योंकि इन भाषाओं में बहुत बड़े-बड़े ग्रंथ लिखे गए है। इससे यह प्रमाणित नहीं होता कि वह अनपढ़ भाषा थी। पृथ्वीराजसासौ प्राकृतमें लिखा गया है।

इस तरह द्विवेदी जी ने स्त्री शिक्षा के विरोधियों के कुतर्को का उचित रूप से खंडन किया है।

प्रश्न 2: ‘स्त्रियों का पढ़ाने से अनर्थ होते हैं’ – कुतर्कवादियों की इस दलील का खंडन द्विवेदी जी ने कैसे किया है, अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तर: स्त्री-शिक्षा के विराधियों का मानना है कि स्त्री शिक्षा से परिवार नष्ट होते है और औरतें सबको जवाब देना सीख जाती है। इस पर द्विवेदी जी ने कहा कि स्त्री-शिक्षा स्त्रियों का अधिकार है। यदि स्त्री-शिक्षा स्त्रियों का अधिकार है। यदि स्त्री-शिक्षा से अनर्थ होते तो पुरूषों को पढ़ाती भी कहीं से उचित नहीं है। यह कह देना कि शिक्षा से औरतें अपनी मर्यादाओं को भूला देती है, उचित नहीं है। उनके तर्क सटीक, यथार्थ और बुद्धिमात्रा पर आधारित है।

प्रश्न 3: द्विवेदी जी ने स्त्री-शिक्षा विरोधी कुतर्कों का खंडन करने के लिए व्यंग्य का सहारा लिया है – जैसे ‘यह सब पापी पढ़ने का अपराध है। न वे पढ़ती, न वे पूजनीय पुरूषों का मुकाबला करती।’ इस तरह की व्यंग्यात्मक भाषा का प्रयोग क्यों किया है?

उत्तर: पाठ में द्विवेदी जी ने व्यंग्यात्मक भाषा का उचित प्रयोग किया है। उन्होंने व्यंग्य इसलिए किया क्योंकि लोगों को सीधी बात समझ नहीं आती और न ही वे उन्हें समझना चाहती है। इसलिए द्विवेदी जी ने स्त्री शिक्षा विरोधी कुतर्को का खंडन करने के लिए व्यंग्य का सहारा लिया है। कई बार व्यंग्य के सहारे बात को स्पष्ट किया जा सकता है और लोगों को स्पष्ट रूप से बात बताई जा सकती है।

प्रश्न 4: पुराने समय में स्त्रियों द्वारा प्राकृत भाषा में बोलना क्या उनके अनपढ़ होने का सबूत है। पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: स्त्री-शिक्षा के विरोधियों का कहना है कि स्त्रियाँ पुराने समय में प्राकृत भाषा का प्रयोग करती थी जो कि उनके अनपढ़ होने का प्रमाण है।

परंतु द्विवेदी जी ने इस कतर्क का खंडन यह कहकर किया कि बड़े-बड़े पुराण उस समय प्राकृत भाषा में लिखे गए थे क्योंकि यह भाषा उस समय प्रचलित थी। इससे तो यह स्पष्ट होता है कि स्त्रियाँ उस समय पढी-लिखीं थी न कि अनपढ़ थी। प्राकृत भाषा को अनपढ़ भाषा कहना उचित नहीं है। इसलिए पुराने समय में स्त्रियों द्वारा प्राकृत भाषा में बोलना उनके अनपढ़ होने का प्रमाण नहीं है, बल्कि पढ़े-लिखे होने का है।

प्रश्न 5: परंपरा के उन्हीं पक्षों को स्वीकार किया जाना चाहिए जो स्त्री-पुरूष समानता को बढ़ाते हों – तर्क सहित उत्तर दीजिए।

उत्तर: जिस तरह गाड़ी पहिओं के सहारे चलती है, उसी प्रकार यह संसार पुरूष और स्त्रियों के योगदान के सहारे चल रहा है। इसलिए दोनों को समान रूप से अधिकार मिलने चाहिए। यदि पुरूषों को पढ़ाया जाता है, तो स्त्रियों को भी पढ़ाना चाहिए। आज समाज में स्त्री पुरूष को समानता दी जाने लगी है तो पढ़ने के विषय में स्त्रीयों को असमान नहीं मानना चाहिए। स्त्रियों को भी वे सब अधिकार मिलने चाहिए जो पुरूषों को दिए जाते है। और परम्परा के डनहीं पक्षों को स्वीकार करना चाहिए जो उनकी समानता को बढ़ाते है।

प्रश्न 6: निम्नलिखित अनेकार्थी शब्दों को ऐसे वाक्यों में प्रयुक्त कीजिए जिनमें उनके एकाधिक अर्थ स्पष्ट हों –

उत्तर:

1. चाल – आज के फैशन की चाल ने बच्चों की चाल बदल दी है।

2. दल – विद्यार्थी दल ने वृक्ष दल को इकट्ठा कर के सफाई करी।

3. पर – मैनें पक्षियों के परों पर बहुत अच्छी कला को प्रदर्शित किया।

4. कुल – उस कुल के कुल बाहरा लोग मौजूद थे।

5. पत्र – पहले पत्र, पत्रों पर लिखे जाते थे।

प्रश्न 7: महावीर प्रसाद द्विवेदी ने स्त्री शिक्षा का समर्थन क्यों किया?

उत्तर: द्विवेदी जी ने स्त्री शिक्षा का समर्थन इसलिए किया क्योंकि –

1. स्त्री शिक्षा देश की प्रगति में अहम भूमिका निभाती है। जहाँ लोग पढ़े लिखे होंगें, उस क्षेत्र का विकास जल्दे हो सकेगा।

2. स्त्री शिक्षा आधुनिक समय की बहुत बड़ी जरूरत बन गया है।

3. यदि स्त्रियाँ पढ़ी-लिखी होंगी तो समाजिक रूडि़यों को मिटाना सरल बन जाएगा। लेखक विकास चाहता है। इसलिए स्त्री शिक्षा का समर्थन करते हैं।[/fusion_builder_column][/fusion_builder_row][/fusion_builder_container]

By | 2016-11-21T04:37:57+00:00 July 12th, 2012|Question and Answer|1 Comment

About the Author:

Kalpana Dubey is a Passionate teacher of Hindi Literature for the last 20 years. She is dedicated to sharing the richness of hindi language and Indian culture to ignite young minds with potent knowledge and perspectives. She has written 3 books on Hindi Grammar used in the CBSE curriculum, and published 2 collections of short stories Kushboo; and Jarokha. Those who know her would agree that, to listen to her, is to experience a spell.

One Comment

  1. Sonali Swarnkar March 9, 2017 at 8:11 pm - Reply

    nice

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