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Hindi Debates

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1406, 2012

शिक्षा में आरक्षण की नीति —विपक्ष

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शिक्षा का लक्ष्य है व्यक्ति का बौद्धिक ,सामाजिक आर्थिक एवम आध्यात्मिक विकास ,अर्थात व्यक्ति का सर्वांगीण विकास |किसी भी देश का भविष्य उसके विद्यार्थियों के ज्ञान स्तर पर निर्भर करता है |राष्ट्र के उत्थान के [...]

406, 2012

फास्ट-फ़ूड -विपक्ष

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विपक्ष   " बदले-बदले से आसार नज़र आते है , अब तो जगह-जगह मुझे फास्ट-फ़ूड खाते बीमार नज़र आते है। " ये फास्ट फ़ूड । इन्होने तो हमारी जीवन शैली को ही बदल डाला है [...]

406, 2012

फास्ट फ़ूड ने जीवन शैली को आसान बना दिया है- पक्ष

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पक्षकम फास्ट -----------------गो फास्ट ------------------दो फास्ट --- आज की जीवन शैली ही यही है –सब कुछ फास्ट । इस भागम-भाग की जिंदगी को यदिकिसी ने आसान किया है तो वह है फास्ट –फ़ूड अर्थात जल्दी [...]

406, 2012

मानव जाती -विपक्ष

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विपक्षतीव्र गति से की गई उन्नति प्रगति का सूचक है । धीरे-धीरे की गई उन्नति , उन्नति नही परिवर्तन कहलाती है । जो समय की गति के साथ होना निश्चित है । मानव जाती ने [...]

406, 2012

मानव जाती की तीव्र गति से उन्नति ही उसके विनाश का कारन है.

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पक्ष‘कह रहा यह सांध्य रवि ढलता हुआ,यो सदा चढ़ कर उतरना है अटल ,फुल चढ़ तरु के शिखर पर हंस दिया ,अंत में तो धुल का आँचल मृदुल.’सम्पूर्ण जगत इस बात से परिचित है की [...]

406, 2012

पुरस्कारों की -विपक्ष

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पुरस्कार किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व को , कार्यो को , रचनाओ को , शैली को निखारने का कार्य करता है . दुसरे शब्दों में कहू तो में कह सकती हु की पुरस्कार किसी व्यक्ति को [...]

406, 2012

पुरस्कारों की होड़ ने भरष्टाचार को बढावा दिया हैं -पक्ष

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पक्षउथली होती जा रही है,आदमी की आत्मा,यही हैं वेह समस्या जो,सबसे अधिक कचोद्ती है.भर्ष्टाचार पुरस्कारों की देन बन गया क्योकि आज उसकी नियति में फर्क आ गया है.हर वह चीज़ वेह प्राप्त कर लेना चाहता [...]

406, 2012

निरंतर होता सरलीकरण शिक्षा का स्तर गिरा रहा है -विपक्ष

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"अभी तो सहर है ,जरा सुबह तो होने दो , अभी तो आगाज है ,अंजाम क्यों सोचने लगे " दिन ब दिन शिक्षा का बदलता स्वरूप अपने साथ कईकई विवाद लेकर आता है आरक्षण का [...]

406, 2012

विद्यार्थी जीवन में राजनीति, छात्रों को पथ भ्रस्त कर देती है-विपक्ष

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विपक्ष भला -बुरा न जग में कोई कहलाता है भीतर का ही दोष ,बाहर नजर आता है , किसी को कीचड़ में कमल दिखाई देता है , किसी को चाँद में भी दाग नजर आता [...]

406, 2012

विद्यार्थी जीवन में राजनीति छात्रों को पथ भ्रष्ट कर देती है-पक्ष

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पक्ष   'हम लाए हैं तूफान से किश्ती के , इस देश को रखना मेरे बच्चो संभाल के '   ये पंक्तियाँ उनअमर शहीदोंकी ओर कही से गयी हैं जिन्होंने अपना सर्वस्व बलिदान करके भारत [...]

406, 2012

बस्ते का बोझ बच्चों की उन्नति में बाधक

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बाधक   "बार -बार आती है मुझको मधुर यादयाद बचपन तेरी गया, ले गया ,तू जीवन की सबसे मस्त खुशी मेरी "   बचपन भी कितना ?सिर्फ़ तीन -चार साल .....बस इधर स्कूल का बस्ता [...]

406, 2012

बस्ते का बोझ बच्चों की उन्नति मैं साधक

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साधक   'आने वाले सुंदर कल की तस्वीर हैं बच्चे , उज्ज्वल उन्नत देश की तकदीर हैं बच्चे '   जी हाँ ,आज के बच्चे कल का भविष्य हैं आज का बच्चा कल का नागरिक [...]

106, 2012

महिलाओं का नौकरी करना परिवार के लिए उपयुक्त है–विपक्ष

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आंखों में जलन, सींने में तूफान सा क्यों है ? इस शहर में हर शख्स परेशान सा क्यों है ? आप सभी से में ये पूछना चाहती हु की वह बच्चा क्यों रो रहा है? [...]

1003, 2011

चापलूसी करो -आगे बढो- विपक्ष

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विपक्ष 'उद्यमेन ही सिद्ध्यन्ते कार्याणि न मनोर्थे, नहि प्रविशन्ति सुप्तस्य सिंह स्य मुखे मृगा ' जिस प्रकार बलशाली शेर के मुख में जानवर स्वयम नही घुसते ,उसे इसके लिए स्वयम प्रयत्न करना पड़ता है हम [...]

1003, 2011

चापलूसी करो आगे बढो- पक्ष

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पक्ष २१वी सदी में हर कोई एक दूसरे से आगे बढ़ने की होड़ में लगा रहता है हर कोई किसी भी तरह आगे बढ़ना चाहता है चाहे पैर पकड़ने पडें या ग ला | ऊँचाई [...]

1003, 2011

युवा -अवस्था -विपक्ष

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कौन कहता है की युवावस्था भू लो भरी है ? यह तो कुछ कुंठित लोगो की शरारत जान पड़ती है। आज के युवा वर्ग का जीवनभूलो से भरा नही है वह तो प्रयोगों से भरा [...]

1003, 2011

युवा-अवस्था फूलो भरी हैं तो प्रोड-अवस्था जीवन संघर्ष-रत और वृदावस्था पश्चाताप से परिपूर्ण-पक्ष

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युवा-अवस्था फूलो से भरी हैं तो प्रोदावस्था जीवन संघर्षरत और वृदावस्था पस्चावस्था से परिपूर्ण । यह एक वाक्य आज के समाज को सम्पूर्ण झांकी को प्रस्तुत कर देता हैं। आधुनिक समय में समाज में व्याप्त [...]

1003, 2011

विदेश में बसने -विपक्ष

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“जो भरा नही है भावो से, बहती जिसमे रस-धार नही, वह ह्रदय नही वह पत्थर है, जिसमे स्वदेश का प्यार नही’ हमारे नवयुवको में विदेश में जाने की इच्छा दिन-प्रतिदिन बलवती होती जा रही है. [...]

1003, 2011

विदेश में बसने की चाह हर भारतीय का ख्वाब -पक्ष

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मेरा जूता है जापानी ये पतलून एन्ग्लिश्स्तानी , सर पे लाल टोपी रुसी , फ़िर भी दिल है हिन्दुस्तानी’ मेरा मतलब है की विदेश में बसने से कोई भी व्यक्ति देश-द्रोही नही हो जाता . [...]

1003, 2011

भारतीय -संस्कृति-विपक्ष

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“उननो, मिस्रयो, रुमा, सब मिट गए जहाँ से , बाकी अभी तक है नामो-निशा हमारा.” बड़े ही सौभाग्य और गर्व की बात हैं की भारतीय संस्कृति प्राचीन काल से सम्पुरण विश्व में सर्वश्रेष्ट रही. विश्व [...]

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