पाठ-3

साना साना हाथ जोडि़…

प्रश्न 1.: झिलमिलाते सितारों की रोनी में नहाया गंतोक लेखिका को किस तरह सम्मोहित कर रहा था?

उत्तर: रात्री के समय जब सर्वत्र (सब जगह) अंधेरा छाया होता है तब पहाड़ी क्षेत्र के भव्य सौंदर्य का लेखिका ने मार्मिक चित्रण किया है। ऐसा लगता है जैसे सितारें अपसराओं की तरह अपनी चमक फैला रहे है और अपने प्रका से इस कदर जादू फैला रहे है जो कि और सब को अर्थहीन बना देता है। लेखिका को वह दृष्य इन्द्रियों से परे डूबी रोनी जादुई झालर के समान प्रतीत हो रही थी और यह दृष्य वह अपने भीतर(अंदर) समेट लेना चाहती थी। वह दृष्य दिव्य, सुन्दर और आलोक (ज्योत) जैसा प्रतीत हो रहा था और सबसे अलग ही था (दिल को खुशी देन वाला)।

प्रश्न 2.: गंतोक को ‘मेहनतक बादशाहों का हर क्यों कहा गया?

उत्तर: गंतोक को ‘मेहनतक बादशाहों का हर इसलिए कहा गया है क्योंकि वहाँ लोग मेहनतकष्ट जिंदगी बिताते है। वहाँ के सैलानियों की जिंदगी आसान नहीं है। वे लोग अपनी जान पर खेलकर सड़क बनाने जैसा खतरनाक कार्य करते है। पहाड़ो को तोड़कर सड़क बनाना बहुत ही कठीन कार्य है। कुछ लोग यह काम कर अपनी जिंदगी गंवा चुके हैं। औरतें अपने परिवार और अपने बच्चो के पालन-पोण ध्यान के साथ-साथ यह काम भी करती है। बच्चे भी 3-4 कि० मी० का रास्ता चलकर स्कूल पहुँचते है और घर आकर लकडि़या लाधते है(ढ़ोते है)। अपनी माँओं के साथ मवेशियों को चराते है। वहाँ के लोग वर्बील (बढ़े हुए पेट वाले) कोई व्यक्ति नहीं मिलता क्योंकि वहाँ सभी की जिंदगी बहुत कठोर है। औरतें भी सड़क बनाने जैसा खतरनाक कार्य करती है और कितना कम लेकर ये समाज को कितना अधिक वापिस लौटा देती है। गंतोक जैसे पहाड़ी क्षेत्र की दुनिया बहुत ही कठोर है। इससे पता चलता है कि वहाँ केवल मेहनती लोगों का बसेरा है। इसलिए गंतोक ‘मेहनतक बादशाहों का हर कहा जाता है।

प्रश्न 3.: कभी श्वेत तो कभी रंगीन पताकाओं का फहराना किन अलग-अलग अवसरों की ओर संकेत करता है?

उत्तर: पताकाएँ शांति और अहिंसा का प्रतीक है, जिनपर मंत्र लिखे होते है और यह बौद्ध धर्म की मान्यता है। जब भी किसी बुद्धिष्ठ की मृत्यु होती है, उसकी आत्मा की शांति के लिए हर से दूर किसी भी पवित्र स्थान पर एक सौ आठ श्वेत पताकाएँ फहरा दी जाती हैं। किसी व्यक्ति की मृत्योपरांत आत्मा की शांति योग्य श्वेत पताकाँए फहराई जाती है जो कि उतारी नही जाती और समय के साथ नष्ट हो जाती है। किसी कार्य की शुरूआत करने के लिए रंगीन पताकाएँ लगाई जाती है। बौद्ध धर्म के अनुसार पताकाओ पर लिखे मंत्र वातावरण को शुद्ध करते है।

प्रश्न 4.: जितेन नार्गे ने लेखिका को सिक्किम की प्रकृति, वहाँ की भौगोलिक स्थिति एवं जनजीवन के बारे में क्या महत्वपूर्ण जानकारियाँ दी, लिखिए।

उत्तर: जितेन नार्गे ने लेखिका को सिक्किम की प्रकृति के बारे में बहुत सी जानकारियाँ दी। उनमें से निम्न हैः-

1. वहाँ विभिन्न प्रकार के मौसम जो कि बहुत सुंदर और सम्मोहन करने वाले है।

2. वह पहाड़ी क्षेत्र अत्यंत सौंदर्यपूर्ण है। देखने में बहुत सुंदर है क्योंकि लोगो की मान्यता है वहाँ भगवान का बसेरा हो वही और यदि वह जगह गंदी की गई तो उस व्यक्ति की मृत्यु निश्चित रूप से हो जाएगी। वहाँ के लोग पहाड़ो, झरनो, नदियो को पूजते है और गंदा करने की सोच भी नही सकते।

3. वहाँ लोगों की जिंदगी बहुत कठोर है। वह खतरनाक कार्य करते है जैसे की पहाड़ तोडकर सड़क बनाना। औरते अपने परिवार और बच्चो के पालन-पोष्ण के साथ-साथ कार्य भी करती है। बच्चे भी खूब चलकर विद्यालय पहुँचते है और अपनी माँओं के साथ मवेशियों को चराते है, अपनी पीठ पर लकडि़याँ ढ़ोते है। इससे पता चलता है कि वहाँ लोगो की जिंदगी आसान नहीं है और वह महनतकष्ट लोगों का हर है। और वास्तव में उनकी जिंदगी बहुत मुश्किल है।

4. फौजी बाॅर्डर एरिया पर तैनात रहते हैं जिसके थोडी दूर चीन की सीमा थी। अपनी जान पर खेल कर इतनी काड़कडाती ठंड में वे लोग हमारी रक्षा के लिए तैनात रहते हैं ताकि हम लोग चैन की नींद सो सके।

5. वहाँ बढ़ते प्रदूष्ण के कारण स्नोफाॅल लगातार कम होती जा रही है।

6. वहाँ के लोग कई प्रकार की मान्यताओ का मानते है जैसे कि वे नदी के जल को हाथ में लेकर संकल्प करते है। घूमते चक्र-सारे पाप धो देता है।

वहाँ के पल-पल के बदलते सौंदर्य का लेखिका ने लुत्फ उठाया और वहाँ की मार्मिक सुंदरता को वह अपनी भीतर समेट लेना चाहती थी। वहाँ घूमकर कोई भी व्यक्ति अपनी बुराईयों का नष्टकर सकता है।

प्रश्न 5.: लोग स्टाॅक में घूमते हुए चक्र को देखकर लेखिका को पूरे भारत की आत्मा एक-सी क्यों दिखाई दी?

उत्तर: लोग स्टाॅक में घूमते हुए चक्र के साथ एक अंधविश्वास जुड़ा हुआ थ। माना जाता था कि इसके घूमने से व्यक्ति के सारे पाप धुल जाते है। इसलिए लेखिका ने कहा कि इतनी वैज्ञानिक प्रगतियाँ होने के उपरांत भी लोग भिन्न प्रकार की मान्यताओं में विश्वास रखते हैं और हम आस्तिक भारतवर्ष में कही भी जाए, सबकी आस्थाएँ मान्यताएँ, सोच, विश्वास, अंधविश्वास, पाप-पुण्य की अवधारणाएँ और कल्पनाएँ एक जैसी है। इसलिए लेखिका का घूमता चक्र देख पूरे भारत की आत्मा एक सी दिखाई दी। हम आस्तिक है-सभी ईश्वर में विश्वास रखते हैं और ईश्वर को मानने के तरीके भिन्न है लेकिन भारतीयों का ईश्वर में अटूट विश्वास है। यही भारत की आत्मा है।

प्रश्न 6.: जितेन नार्गे की गाइड की भूमिका के बारे में विचार करते हुए लिखिए कि एक कुल गाइड में क्या गुण होते है?

उत्तर: गाइड की केवल यही भूमिका नहीं होती की वह प्रसिद्ध जगाएँ दिखाए। उसका यह फर्ज बनता ही कि वह यात्रा करते समय उस जगह की सामाजिक, राजनैतिक, भौगोलिक एवं वहाँ के जनजीवन के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियाँ और ज्ञान हो। उसके अंदर सेवाभाव और सहायता का जजबा होना चाहिए। वहाँ की परम्पराओं, संस्कृति का उल्लेख रोचक तरीके से मदुभा का प्रयोग करे, हंसमुख, धैर्यवान और मिलनसार स्वभाव का होना चाहिए और तरह-तरह की परिस्तिथियों का सामना (जुझना) करने की भावना भी होनी चाहिए। एक कुल गाइड संवेदनशील होना चाहिए और ये सभी गुण भली-भाँति देखे जाते है।

प्रश्न 7.: इस यात्रा-वृतांत में लेखिका ने हिमालय के जिन-जिन रूपों का चित्र खींचा है, उन्हें अपने ब्दों में लिखिए।

उत्तर: इस यात्रा-वृतांत में लेखिका ने हिमालय के भिन्न रूपो का लुत्फ उठाया है और उसकी सुंदरता का मार्मिक चित्रण किया है। हिमालय के पर्वतों के बीच और घाटियों के ऊपर बने संकरे कच्चे-पक्के रास्तों से गुजरते यूँ लग रहा था जैसे किसी हरियाली गुफा से गुजर रहे हैं। वहाँ से बह रही जल धारा का आनंद उठाकर लेखिका को बहुत आनन्द मिला और उन्हे ऐसा प्रतीत हुआ मानो उनके सारे पाप नष्ट हो गए हो और भीतर के सारे तमोगुण(बुरे गुण) से मुक्त हो गए हो। ऊपर की चढ़ाई लेते हुए वहाँ पर बर्फ को भी लेखिका ने देखा परंतु उसमें आनन्द नही उठा पाई क्योंकि उनके पास बर्फ में जाने के जिए बूट नहीं थे। वहाँ पर उन्होंने सुंदर रूडोडेड्रो के फूल भी देखे। वहाँ के प्रत्येक मौसम का लुत्फ उठाया। उन्हें ऐसा लगा जैसे यह यात्रा कर उन्होने स्वर्गीय सौंदर्य, देख लिया हो। वहाँ के वादियो, झरनो, नदी, फूलों और शांत वातावरण उन्हे सम्मोहित कर देता था। वह वहाँ का सौंदर्य देखकर मंत्रमुग्ध हो जाती है।

प्रश्न 8.: प्रकृति के उस अनंत और विराट स्वरूप् को देखकर लेखिका को कैसी अनुभूति होती है?

उत्तर: प्रकृति के उस अनंत और विराट स्वरूप् को देखकर लेखिका को यह एहसास होता था जैसे उन्होने ईश्वर के साक्षात दर्शन पा लिए हो। वह इस पहाड़ी क्षेत्र के सौंदर्य को देखकर मंत्रमुग्ध हो जाती। वहाँ के पहाड़ी, नदी, फूलों, झरनों, शांत वातावरण का लुत्फ उठा कर उन्हे मन की शांति प्राप्त हुई और लगा जैसे उनके सारे पाप धुल गए हो और देवदर्शन पा लिए हो।

प्रश्न 9.: प्राकृतिक सौंदर्य के अलौकिक आनंद में डूबी लेखिका को कौन-कौन से दृष्य झकझोर गए?

उत्तर: प्राकृतिक सौंदर्य के अलौकिक आनंद में डूबी लेखिका ने ऐसे कई दृष्य देखे जो उन्हे झकझोर गए। पर्वतीय लोगों की जिंदगी बहुत कठिनाईयों से भरी होती है। जब उन्होंने लोगों को पहाड़ो को तोडते हुए देखा ताकि वे सड़क बना सके तब उन्हें यह खतरनाक कार्य देख बहुत दुख हुआ। कई लोग इस काम के कारण अपनी जान गवा चुके थे। औरतें जो न केवल अपने परिवार और बच्चों के पालन-पोण देखती थी, वे भी इस कार्य को खुशी-खुशी करती थी। बच्चों को विद्यालय से लौटते देख उन्हे बहुत दुख हुआ क्योंकि वे बच्चे 3-4 कि० मी० चलकर पढ़ने जाते थे और लौटकर अपनी माँओं के साथ लकडि़याँ ढ़ोते थे। वहाँ का जनजीवन देखकर लेखिका को बहुत दुख हुआ क्योंकि सभी मेहनतकष्ट जिंदगी जी रहे थे, उनका जीवन वास्तव में कठिन है।

बाॅडर पर तैनात फौजियों को देख उन्हे आष्चर्य हुआ क्योंकि वे इतनी कड़कडाती ठंड में अपने परिवारों से दूर हमारी रक्षा के लिए तैनात थे ताकि हम चैन की नींद पा सके। उनकी कठीन जिंदगी को देखकर लेखिका को महसूस हुआ कि ये सब महनत कष्ट जिंदगी बसर कर रहे हैं। सरकार को इन सब के लिए सुविधाएँ प्रदान करनी चाहिए। ज्यादा संख्या में विद्यालय बनवाने चाहिए और वे अच्छी और आनन्ददायक जिंदगी बसर कर सके इस योग्य उनकी मदद करनी चाहिए।

प्रश्न 10.: सैलानियों को प्रकृति की आलौकिक छटा का अनुभव करवाने में किन-किन लोगों का योगदान होता है, उल्लेख करें।

उत्तर: सैलानियों को प्रकृति की अलौकिक छटा का अनुभव करवाने में गाइड की अहम् भूमिका होती है। यदि गाइड किसी भी दृष्य को किसी कहानी से जोड़े तो वह रोचक बना सकता है। गाइड का ज्ञान, उसकी भाषा शैली, उसका रोचक, सही रूप् से बताना सैलानियों को आकर्षित करता है। स्थानीय लोगो का व्यवहार और संगी-साथी।

प्रश्न 11.: ‘कितना कम लेकर ये समाज को कितना अधिक वापस लौटा देती हैं। इस कथन के आधार पर स्पष्ट करें की आम जनता की दे की आर्थिक प्रगति में क्या भूमिका है?

उत्तर: इस कथन से यह पता चलता है कि पर्वतीय लोग कितनी मेहनत करते है। अपनी जान पर खेल कर वह सड़क बनाने जैसा खतरनाक कार्य करते है और कईं लोग इस कारण अपनी जान गंवा चुके है। इससे पता चलता है कि वह दे की प्रगति के लिए कितनी मेहनत कर रहे, जबकि वे जिंदगी सुख चैन से नहीं गुजारते परंतु इसके उपरांत भी खु रहते है। मेहनतक जिंदगी गुजार के वे हमें कितना ज्यादा दे रहे हैं (सुखदायक जीवन प्रदान कर रहे है)। सरकार का भी यह कर्तव्य बनता है कि उनके कल्याण के लिए कुछ सुविधाँए प्रदान करें।

प्रश्न 12.: आज की पीढ़ी द्वारा प्रकृति के साथ किस तरह का खिलवाड़ किया जा रहा है। इसे रोकने में आपकी क्या भूमिका होनी चाहिए।

उत्तर: आज लोग प्रकृति पर ध्यान नहीं दे रहे। आज की पीढ़ी प्रकृति को बहुत नुकसान पहुँचा रही है। बढती जनसंख्या के कारण माँगें भी बढ़ती हैं परंतु अपने लालच को पूरा करने के लिए इस प्रकृति को नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। लोग पेड़ो को काट कर अपने लिए ही खाई तैयार कर रहे हैं। जहाँ देखो कुड़ा फैंक दिया जाता है और सफाई पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता। रोहन कर रहे है। हमारा यह फर्ज बनता है कि जो प्रकृति हमें इतना कुछ प्रदान कर रही है उसके लिए भी हम कुछ करे ताकि बाद में हम चैन से रह सकें। हमारा यह कर्तव्य जो कि हमे निभाना चाहिए। हमें ज्यादा संख्या में पेड़ लगाने चाहिए ताकि इस प्रकृति को बचा सके।

प्रश्न 13.: प्रदूण के कारण स्नोफाॅल में कमी का जिक्र किया गया है? प्रदूण के और कौन-कौन से दुपरिणाम सामने आए हैं, लिखें।

उत्तर: प्रदूशण के कारण प्रकृति को बहुत नुकसान का सामना करना पडता है। इस कारण बारि कम होने लगी है, सर्दी भी कम होने लगी है, गर्मी बढती जा रही है। इस तरह प्रदूण के कारण ऋतु परिवर्तन हो रहा है। यह हमारे द्वारा बढती लापरवाही एवं लालच का अंजाम है जो पहाड़ो का आकर्षक सौंदर्य कम होता जा रहा है और बहुत सारी समस्याओं का भी सामना करना पड़ रहा है। लोगों की सेहत पर भी इसका बुरा असर होता है और प्रकृति को भी इसका दु

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