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Class 10 Lesson 2

Class 10 Lesson 2

पाठ-2

जार्ज पंचम की नाक

प्रश्न 1.: सरकारी तंत्र में जार्ज पंचम की नाक लगाने को लेकर जो चिंता या बदहवासी दिखाई देती है वह उनकी किस मानसिकता को दर्शाती है।

उत्तर: सरकारी तंत्र में जार्ज पंचम की नाक लगाने को लेकर जो चिंता या बदहवासी दिखाई देती है वह उनकी निम्न रूपो को दर्शाती है-

1. लापरवाही – सरकार द्वारा तैनात किए गए हथियार बंद पहरेदारों द्वारा लापरवाही बरते जारे के कारण वह नाक काट दी गई। इस लापरवाही की चिंता उनके दिमाग में थी जोकि उन्हें बहुत परेशान कर रही थी।

2. जल्दबाजी – जार्ज पंचम की मूर्ति पर जल्दी से जल्दी नाक लगाने के प्रयत्न शुरू कर दिए गए ताकि मेहमानों के आने से पहले यह नाक लगा दी जाए अन्यथा उनकी इज्जत कही की नही रहती।

3. चापलूसी – वह चापलूसी के सहारे सारे कार्य पूरे करते थे। मुख्य कार्य को छोड़ कर सिर्फ चापलूसी करते थे।

4. दिखावटीपन – जार्ज पंचम की मूर्ति लगाए जाना कही उनकी दिखावे पन की ओर इंकित करती है ताकि वह इस तरह अपने अतिथि को प्रसन्न कर सकें।

5. स्वार्थ की प्रवृत्रि – वे अपनी इज़्जत बचाने के लिए कुछ भी करने के लिए तैयार थे। वे स्वार्थ में इस तरह लिपटे थे कि वह अपने देश के नेताओ की इज़्जत के बारे में भी नहीं सोच रहे थे। इससे उनकी छोटी सोच और स्वार्थ की पहचान होती है।

6. फिजूलखर्च – लाट पर नाक लगाने के लिए वे कितना भी पैसा लगाने के लिए तैयार थे ताकि वे अपनी इज़्जत बचा सके। इससे यह पता चलता है कि वे पैसे का सदुपयोग करना नहीं जानते और फिजूलखर्च करते है। पैसे को किसी अच्छे कार्य के लिए नही लगाते।

प्रश्न 2.: रानी एलिजाबेथ के दरजी की परेशानी का क्या कारण था? उसकी परेशानी को आप किस तरह तर्क संगत ठहराएंगे?

उत्तर: रानी ऐलिजाबेथ के दरजी को ऐसी ड्रेस(परिधान) तैयार करनी थी जो भारतीय संस्कृति से मिलती हो क्योंकि वह अलग-अलग देशों में जाकर उनकी वेश-भूषा को अपनाना चाहती थी। यह दिखावे को दर्शाता है वह भी दिखावेपन की प्रथा को उनकी वेश-भूषा को पहनकर दर्शाती है। जनरूचि भी इस पर होती है इसलिए वे भी दिखावा करने में पीछे नहीं हटते। उनकी परेशानी में दिखावा झलकता है।

प्रश्न 3.: ‘और देखते ही देखते नयी दिल्ली का काया पलट होने लगा’ – नयी दिल्ली के काया पलट के लिए क्या-क्या प्रयत्न किए गए होगें?

उत्तर: रानी के अच्छे स्वागत के लिए जोरो शोरों से तैयारियाँ शुरू होने लगी थी। सड़कों को साफ करवाया गया, उसकी धूल को साफ़ करवाया गया। इमारतो का नाजनीनों की तरह श्रंगार (खूबसूरत) किया गया। कई सारे कार्य(प्रयत्न) करवाए गए ताकि अतिथि का स्वागत अच्छी तरह से किया जा सके। इस तरह दिल्ली को साफ और खूबसूरत बना उसकी कायापलट कर दिया गया।

प्रश्न 4.: आज की पत्रकारिता में चर्चित हस्तियों के पहनावे और खान-पान संबंधी आदतों आदि के वर्णन का दौर चल पड़ा है।

(क) इस प्रकार की पत्रकारिता के बारे में आपके क्या विचार है?

उत्तर: इस प्रकार की पत्रकारिता से यह पता चलता है कि वे(पत्रकार) भी वह खबरें छापते है जिसमें जनरूचि हो क्योंकि लोग अ धिक संख्या में पढ़े-लिखे नहीं है, इस कारण वह हो रही घटनाओं से बेखबर रहते हैं। पत्रकार बातें छुपाते है और फिजूल खबरो से लोगों को फँसाते है ताकि असली बातों की खबर इन्हें होने न पाए और वे सच्चाई से वंचित रहे। पहले की तरह अब खबरे नहीं छपती है। जिन खबरों से (घटनाओं) से जनता सचेत हो पाऐ, वे खबरे बहुत ही कम छपती है और फालतू बातों पर ज्यादा महत्व दिया जाता है।

(ख) इस तरह की पत्रकारिता आम जनता विषेशकर युवा पीढ़ी का क्या प्रभाव डालती है??

उत्तर: इस प्रकार की पत्रकारिता आम जनता को व्यर्थ की बातों में डालकर उन्हे सच्चाई से वंचित रखती है। युवा पीढ़ी की रूचि इन खबरों में रहती है। परंतु पत्रकार ‘फैशन’ और ‘सिलैब्रिटिज़’ से जुड़ी बेकार की बातों से उनका समय बरबाद (खराब) करती है। इस तरह उनपर बुरा सूचनाओं से बुरा प्रभाव पड़ता है। वह हो रही घटनाओं से वंचित रहती है।

पत्रकारों का कार्य होता है ईमानदारी से सच्ची खबरों को छापना और हो रही घटनाओं से लागों को सचेत करना चाहिए न कि बेकार बातों में उनको फँसना।

प्रश्न 5.: जार्ज पंचम की लाट की नाक को पुनः लगाने के लिए मूर्तिकार ने क्या-क्या यत्न किए।

उत्तर: जार्ज पंचम की लाट की नाक को पुनः लगाने के लिए मूर्तिकार ने कई प्रयत्न किए। उसने विभिन्न जगहों पर जाकर नेताओं की मूर्तियों की नाक को नापा। वह बंबई गया, गुजरात गया फिर बंगाल और फिर बिहार की ओर गया परंतु वहाँ के नेताओं की मूर्तियों की नाकें जार्ज पंचम की नाक से बड़ी निकली। खोजने पर किसी प्रकार का पत्थर न मिलने पर वह बच्चों की नाको को नापने लगा। इसके पश्चात कोई हल न निकलने पर मूर्तिकार ने बच्चों की नाके नापी, यह सोचकर की शायद उनकी नाक उन से मिल जाए, परंतु बच्चों की नाकें भी बड़ी निकली। इस तरह मूर्तिकार ने कई प्रयत्न किए ताकि वह जार्ज पंचम की जितनी नाक ढूंढे परंतु उसे वैसे नाक नहीं मिल पाई।

प्रश्न 6.: प्रस्तुत कहानी में जगह-जगह कुछ ऐसे कथन आए है जो मौजूदा व्यवस्था पर करारी चोट करते है। उदाहरण के लिए ‘फाइलें सब कुछ हज़म कर चुकी हैं।’ ‘सब हुक्कामों ने एक दूसरे की तरफ ताका।’ पाठ में आए ऐसे अन्य कथन छाँटकर लिखिए।

उत्तर: ‘कुछ मिनटो की खामोशी के बाद सभापति ने सबकी तरफ देखा।’

‘सबकी आँखों में एक क्षण की बदहवासी के बाद खुशी तैरने लगी।

इस प्रकार के कथन का प्रयोग के द्वारा लेखक ने शासन की व्यवस्था की अकर्मण्यता (निष्क्रियता) पर व्यंगय किया है (ओर दर्शाता है) इससे यहा पता चलता है कि हमारे देश में कोई काम शुद्ध व्यवस्था से नहीं किया जाता, घृणित रूप से कार्य सम्पन्न किया जाता है। जहाँ नाक न मिलने पर अपने ही नेताओं की (इज़्जत) नाक कटवाने के लएि हुक्कमें त।यार थे। वहीं वहाँ मूर्तिकार तो जिंदा नाक काटकर लगानें तक के लिए तैयार था। फाइलों के पेज़ गुम जाते है, घप्ले किए जाते हैं और अच्छे देशभक्तों की इज़्जत नहीं की जाती। इससे यह स्पष्ट होता है कि कोई भी कार्य पूरी ईमानदारी और सच्चाई स्वच्छ रूप् के साथ नहीं किया जा रहा है।

प्रश्न 7.: नाक मान – सम्मान व प्रतिष्ठा का द्योतक है। यह बात पूरी व्यंग्य रचना में किस तरह उभरकर आई है?

उत्तर: नाक मान-सम्मान व प्रतिष्ठा का प्रतीक है। लेखक ने यह स्पष्ट किया है कि लेाग अपनी नाक को बचाने के लिए किसी की नाक काटने के लिए तैयार रहते हैं। जैसे कि जार्ज पंचम की नाक लगाने के लिए बड़े हुक्कम इस हद तक गुजर गए कि वे हमारे नेताओं की प्रतिमाओं की नाकों को काटने के लिए तैयार रहते थे। अपनी इज़्जत बचाने के लिए वह किसी भी हद तक गुजर सकते थे। इस तरह उन्होने सरकार के गलत कार्यों पर व्यंग्य किया है।

प्रश्न 8.: जार्ज पंचम की लाट पर किसी भी भारतीय नेता, यहाँ तक कि भारतीय बच्चे की नाक फिट न होने की बात से लेखक किस ओर संकेत करना चाहता है।

उत्तर: जार्ज पंचम की लाट पर किसी भी भारतीय नेता यहाँ तक कि भारतीय बच्चे की नाक फिट न होना यह दर्शाता है कि अंग्रेजो जैसा निम्न स्तर का कोई भारतीय बच्चा भी नहीं और न ही कोई नेता है।

इससे यह पता चलता है कि भारतीय नेताओ एवं बच्चों का व्यक्तित्व महान है। इस तरह लेखक ने बताया है बच्चों तक की नाक भी जार्ज पंचम की नाक से बड़ी निकली अर्थात उनका व्यक्तित्व (इज़्जत) उनसे महान है।

प्रश्न 9.: अखबारो ने जिंदा नाक लगने की खबर को किस तरह से प्रस्तुत किया?

उत्तर: अखबारों में जिंदा नाक लगने की खबर बहुत ही कलात्मक रूप् से प्रस्तुत की गई। लोगो को इस बात से वंचित रखा गया कि वह नाक असली थी। यानी कि पत्रकारों ने यह बताया कि नाक जो लगी वह असली लगती है। अर्थात उसकी एक तरह से खूबसुरती को दर्शाया गया की वह नाक इतनी अच्छी लग रही है कि वह ऐसे है जैसी असली होती है। लोगों को बात स्पष्ट रूप् से प्रस्तुत नहीं की गई। उन्होने इस मामले को घुमा-फिरा दिया ताकि सत्य का पता लोगों को नहीं भी चले। लोगो को सच्चाई से वंचित रखा गया। इस तरह पत्रकारों ने अपना काम तो किया परंतु पूरी ईमानदारी से नहीं किया (खुल कर नही बताया)।

प्रश्न 10.: ‘नयी दिल्ली में सब था…………………..सिर्फ नाक नहीं थी।’ इस कथन के माध्यम से लेखक क्या कहना चाहता है?

उत्तर: लेखक ने इस वाक्य में भारत की दुर्दशा और पराधीनता को इंगित किया है। पराधीनता में सब कुछ होने के बाद भी कुछ नहीं होना दर्शाता है क्योंकि जो राष्ट्र स्वाधीन नहीं है, उसका विश्व में कोई अस्तित्व नहीं होता। इसलिए लेखक ने ऐसा कहा। नाक इज्जत का प्रतीक होती है और यदि नाक (इज़्जत) नहीं हो तो कुछ भी नहीं रहता। हमारी अफसरशाही पर लेखक ने यथार्थ व्यंग्य किया है। आज की शासन व्यवस्था अपने स्वार्थ में इस कदर मशगूल है कि वे किसी भी हद तक जा सकते है। उनके लिए जिन्दा व्यक्ति की नाक काटना कुछ महत्व नहीं रखता, यदि उनका स्वार्थ सिद्ध होता है।

प्रश्न 11.: जार्ज पंचम की नाक लगने वाली खबर के दिन अखबार चुप क्यों थे?

उत्तर: उस दिन समाचार पत्र में कोई खास मुख्य खबर नहीं थी क्योंकि पत्रकार भी सिर्फ सत्ता से संबंधित समाचारों को ही महत्व देते है, अन्य घटनाओ को नहीं।

सत्ता और पत्रकारिता एक-दूसरे के पर्याय बन गया है (एक-दूसरे के साथ) जिस कारण लोग सत्य से वंचित रहते है और बेकार की खबरों में फंस जाते है। यह उदासीनता और अनिश्क्रियता का प्रतीक है।

प्रश्न 12.: लेकिन…………………………………………………..छपा था।

उत्तर: इस पंक्तियो में लेखक ने यह दर्शाया है कि सारी सरकार रानी के स्वागत में व्यस्त थी। राजनैतिक सूचनाओं को अधिक महत्व दिया जाता है जो कि उचित नहीं है। समाज में घटित सभी घटनाओं की सूचना देना पत्रकारो का काम है।

पत्रकारों को सरकार का पिट्ठू नहीं होना चाहिए। जनता को ईमानदारी से सच्चाई बताना उनका प्रथम कर्तव्य है।

प्रश्न 13.: और जैसा कि …………………………………………………..दोनों तरफ थी।

उत्तर: यहाँ पर लेखक ने राजनीति के उन लोगों पर व्यंग्य किया है जो खमोश रहकर सत्ता की शक्ति को देखते और परखते है और जहाँ स्वार्थ सिद्ध होता देखते है। उन्हे व्यक्तिगत पार्टी से कुछ लेना नहीं होता। इस पर लेखक ने व्यंग्य किया है। ऐसे लोग शक्ति का दुर्पयोग करते हैं।

उद्देष्य – जार्ज पंचम की नाक में लेखक कमलेश्वर ने भारतीय शासन व्यवस्था और अफसरशाही पर व्यंग्य किया है और यह दर्शाया है कि भारतवर्ष में आम जनता का कोई महत्व नहीं है। उसे कभी कोई भी सपने स्वार्थ के लिए प्रयोग कर सकता है। जिस देश की अपनी व्यवस्था न हो वह ‘नाक’ से वंचित ही रहता है।

लेखक ने पत्रकारों और अफसरों की मिली भगत पर भी मार्मिक व्यंग्य किया है।

प्रश्न 14. लेकिन उस दिन……………………………………………..बुत के लिए।

उस दिन सारे अखबार खाली क्यों थे?

उत्तर: समाचारों का यह फर्ज है कि यथार्थ और सच्चाई को जनता के सामने लाएँ। परतंत्रता के कारण सभी भारतीय अखबार अंग्रेजो के मोहताज थे। इसलिए वे अंग्रेजी सरकार के विरूध कुछ भी कहने से हिचकते थे। उन्हे इतनी स्वतंत्रता नहीं थी कि वे सत्य घटना को बता सके और सरकार विभाग सिर्फ उन्ही कामो को करते थे जो अंग्रेजी सरकार से संबंधित हो। इसलिए जार्ज पंचम के आने की सूचना की अतिरिक्त और किसी सूचना को महत्व नही दिया गया और कोई समाचार महत्वपूर्ण न थी।

प्रश्न 15.: हमारे शहीद बच्चो की नाक भी जार्ज पंचम की नाक से बढी थी?

उत्तर: हमारे देश के छोटे-छोटे शहीद बच्चे भी अपनी मातृभूमि पर कुरबान हो गए। उन्होने प्राणों का बलिदान देकर शहीदों की गरीमा को और भी श्रेष्ठ बना दिया। इन बच्चों के अस्तित्व, सम्मान के समने जार्ज पंचम की नाक छोटी ही हो गई क्योंकि परतंत्र हिंदुस्तान में भी इन बच्चों के बलिदान का जो महत्व था, वो जार्ज पंचम का न था।

लेखक ने इन पंक्तियों के माध्यम से शहीद बच्चों को नमन किया है।

प्रश्न 16.: ‘फाइले सब हजम कर चुकी थी।’ इस पंक्ति के व्यंग्य को स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: इस पंक्ति द्वारा लेखक ने सरकार की गैर जिम्मेदारी पर व्यंग्य किय है। सरकारी कामों में मुख्य फाइलों के मुख्य तत्व गायब हो जाते है। यह यही दर्शाता है कि सरकारी कामें में इतने घप्ले हो जाते है। हमारी सरकार अपनी जिम्मेदारी सही रूप् से नहीं निभाती, भ्रष्टाचार इस कदर बढ़ गया है कि स्थिति बहुत ही खराब हो गई है। यह पंक्ति हमारे देश के भ्रष्टाचार की ओर इंकित करती है।

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By | 2016-11-21T04:38:04+00:00 June 25th, 2012|Question and Answer|0 Comments

About the Author:

Kalpana Dubey is a Passionate teacher of Hindi Literature for the last 20 years. She is dedicated to sharing the richness of hindi language and Indian culture to ignite young minds with potent knowledge and perspectives. She has written 3 books on Hindi Grammar used in the CBSE curriculum, and published 2 collections of short stories Kushboo; and Jarokha. Those who know her would agree that, to listen to her, is to experience a spell.

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