[ultimatemember form_id=12643]

Class 10 Lesson 1

Class 10 Lesson 1

पाठ-1

माता का आँचल

प्रश्न 1.: प्रस्तुत पाठ के आधार पर यह कहा जा सकता है कि बच्चे का अपने पिता से अधिक जुड़ाव था, फिर भी विपदा के समय वह पिता के पास न जाकर माँ की शरण लेता है। आपकी समझ से इसकी क्या वजह हो सकती है?

उत्तर: बच्चे का अपने पिता से अधिक जुड़ाव था फिर भी विपदा के समय वह पिता के पास न जाकर माँ की शरण लेता है। वह ऐसा इसलिए करता है क्योंकि बच्चे को माँ की शरण में शांति, प्यार, सुकून, सुरक्षा और ममता का आभास होता है। बच्चे का विपदा में माँ के पास जाना एक प्रकृतिक प्रेम है। कोई भी बच्चा चोट या विपदा में माँ की शरण को ग्रहण करने में ही वह सुकून और शांति पाता है जो कि वह कहीं ओर नहीं पा सकता इसलिए लेखक भी अपनी चोट और दर्द में माँ की शरण में आता है।

प्रश्न 2.: आपके विचार से भोलानाथ अपने साथियों को देखकर सिसकना क्यों भूल जाता है?

उत्तर: बच्चों को खेल बहुत अच्छे लगते हैं, वे खेल में ज्यादा खुश रहते है और खेल से उनका इतना लगाव होता है कि अपने दोस्तो के साथ वे अपने दुख-दर्द भी भूल जाते है और खुश हो जाते हैं। इस लिए लेखक भी अपने साथियों की टोली को देखकर सिसकना भूल जाता है। अपनी ही उम्र के बच्चों के साथा खेलकर बच्चों को बहुत खुशी मिलती है और लेखक भी अपने दोस्तों को देखकर अपने पिता को छोड़कर अनेक खेल खेलने लगता है।

प्रश्न 3.: आपने देखा होगा कि भोलानाथ और उसके साथी जब – तब खेलते-खाते समय किसी न किसी प्रकार की तुकबंदी करते हैं। आपको यदि अपने खेलों आदि से जुड़ी तुकबंदी याद हो तो लिखिए।

उत्तर:

लल्ला लल्ला लोरी, दूध की कटोरी,

दूध में बताशा, मुन्ना करे तमाशा।

चँदा मामा दूर के, पुये पकाए बूर के,

आप खाए थाली में, मुन्ने को दे प्याली में,

प्याली गई टूट, मुन्ना गया रूठ,

नई प्याली लाएगें, मुन्ने को मनाएगें।

प्रश्न 4.: भोलानाथ और उसके साथियों के खेल और खेलने की सामग्री आपके खेल और खेलने की सामग्री से किस प्रकार भिन्न है?

उत्तर: भोलानाथ और उसके साथियों के खेल और खेलने की सामग्री हमारे खेल और खेलने की सामग्री से काफी भिन्न हैं। समाज में काफी परिवर्तन आ गया है। अब बच्चे पहले जैसे खेल नहीं खेलते क्योंकि कई नए प्रकार के खेल बच्चों को भाते हैं। अब बच्चे मिट्टी या पत्तों से नहीं खलते क्योंकि आज के बच्चों में नए प्रकार के खेल जैसे शतरंज, कंप्यूटर, लूडों, क्रिकेट, फुटबाल, आदि खेल अच्छे लगते है। पहले हमारा देष कृशि प्रधान देश था और तब के खेल और अब खेल में काफी अंतर आ गया क्योंकि समय के साथ हर चीज या कार्य में परिवर्तन आता है। इस प्रकार भोलानाथ और उसके साथियों के खेलने की सामग्री हमारे खेल की सामग्री से भिन्न है।

प्रश्न 5.: पाठ में आए ऐसे प्रसंगों का वर्णन कीजिए जो आपके दिल को छू गए हों?

उत्तर: पाठ में कई प्रसंग दिल को छूने वाले थे। उनमें से कुछ थे – जैसे लेखक का विपदा और दर्द में अपने माँ की शरण ग्रहण करना जिससे उसको अपनी माँ के लिए और माँ का अपने बेटे के लिए प्रेम अभिव्यक्त हुआ। लेखक का छोटे होते में डोली में जा रही दुलहन को अपनी दुलहन बोलना और उसपर उसकी मार पड़ने वाला प्रसंग काफी छूने वाला था। लेखक का मास्टर जी से पकड़े जाने पर खूब ड़ांट पड़ना और फिर उनके पिता का उन्हें दुलारना-काफी अच्छे रूप में चित्रित किया गया है जो कि दिल को छूने वाले हैं।

प्रश्न 6.: इस उपन्यास अंश में तीस के दशक की ग्राम्य संस्कृति का चित्रण है। आज की ग्रामीण संस्कृति में आपको किस तरह के परिवर्तन दिखाई देते हैं?

उत्तर: आज ग्रामीण समाज काफी परिवर्तित हो गया है और उसमें काफी बदलाव आ गया है। वहां के लोग कर्मठ नहीं रहे क्योंकि सब अपनी जिन्दगियों में इतने व्यस्त रहते है कि किसी और के बारे में सोचते भी नहीं है। बायो गैस से चूल्हे अधिक संख्या में लोगो के घर में पाए जाते है। गाँव में बिजली की सुविधा के सहारे हर घर में बिजली की पहले जैसी तंगी नहीं रही। खेतो में नए प्रकार के औजारो और मशीनों का प्रयोग किया जाने लगा है जिससे गाँव में गाय देखने भी नहीं मिलती है क्योंकि उनकी जगह नए मशीनों ने ले ली है। इस प्रकार ग्रामीण समाज में काफी परिवर्तन आ गया है और अब पहले जैसी ग्रामीण संस्कृति नहीं रही। गाँव में बच्चों की पढ़ाई पर भी काफी जोर डाला जाने लगा है जिससे की वहाँ के लोग पढ़े-लिखे भी है। इस प्रकार हम कह सकते है कि ग्रामीण समाज में काफि परिवर्तन आ गया है।

प्रश्न 7.: यहाँ माता-पिता का बच्चे के प्रति जो वात्सल्य व्यक्त हुआ है उसे अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तर: यहाँ माता-पिता का अपने बच्चे (लेखक) के प्रति प्रेम व्यक्त हुआ है जो कि दिल को छूने वाला है। लेखक के पिता उनके इर्द-गिर्द घूमते है और खेल में भी उनके साथ-साथ बच्चा बनकर उनको (लेखक) लाड़ करते है। माता-पिता अपने बच्चे को खान-पान का अत्यंत ध्यान रखते है। पिता भी बच्चे के साथ बहुत समय बिताते तथा बच्चे का भी पिता से काफी जुड़ाव था। अंत में लेखक का चोट लगने में माँ के पास आने पर माँ का चिंतित होना, रोकर मरहम लगाना और अपने आँचल में ढ़क लेना यही दर्शाता है कि माँ-पिता को अपने बच्चे से अत्यंत प्रेम है।

परंतु आज परिस्तिथियाँ बदल गई हैं और समाजिक स्तिथि पहले जैसी नहीं रही और आज माता-पिता अपने बच्चों पर ज्यादा ध्यान नहीं देते। वे अत्यधिक व्यस्त रहते है। बच्चे को समय नही दे पाते।

प्रश्न 8.: माता का आँचल शीर्षक की उपयुक्तता बताते हुए कोई अन्य शीर्षक सुझाइए।

उत्तर: 1. संक्षिप्तता – किसी भी शीर्षक का संक्षिप्त होना उसकी विशेषता होती है। ‘माता का आँचल तीन शब्दों का शीर्षक है इसलिए यह संक्षिप्त है।

2. विषय वस्तु से संबंधित – किसी भी शीर्षक का विशेष वस्तु से सम्बंधित होना उसकी विशेषता होती है। यहाँ माता-पिता का लेखक के प्रति अटूट प्यार और लाड़ व्यक्त किया है और यह बताया है कि बच्चा विपदा में अपनी माता का आँचल ही ग्रहण करता है।

3. जिज्ञासा – किसी भी शीर्षक में जिज्ञासा होन उसकी विषेशता होती है। यह शीर्षक जिज्ञासापूर्ण है क्योंकि इसे पढ़ते ही बच्चे जानने के लिए उत्सुक होते है कि माता का आँचल से हमारा अत्यंत प्रेम होता है और बचपन के दिनों की मस्ती उसे पढ़ने में रोचक बनाती है।

अतः यही शीर्षक सटीक, उचित, यथार्थ, सुंदर, प्रतीकात्मक, जिज्ञासापूर्ण और रोचक है।

माता का आँचल के अलावा कइ अन्य शीर्षक हो सकते है जैसे कि – बचपन के दिन, बचपन की यादें, आदि।

प्रश्न 9.: बच्चे माता-पिता के प्रति अपने प्रेम को कैसे अभिव्यक्त करते हैं?

उत्तर: बच्चे माता-पिता के प्रति अपने प्रेम को अभिव्यक्त करने के लिए उनका कहा मानते है, उनके आदर्श और संस्कृति का पालन करते है, उनकी सेवा करते है, उनकी इज्जत करते है और उनके द्वारा सिखाए कार्य करते है।

प्रश्न 10.: इस पाठ में बच्चों की जो दुनिया रची गई है वह आपके बचपन की दुनिया से किस तरह भिन्न है?

उत्तर: पाठ में रची गई दुनिया और हमारे बचपन की दुनिया काफ़ी भिन्न है। पहले बच्चों को खेल-कूद करने दिया जाता था और पढ़ाई पर दबाव नहीं दिया जाता था। पर अब बच्चों पर पढ़ने का काफी दबाव दिया जाता है क्योंकि हर माता-पिता चाहते है कि उनका बच्चा अपनी पहचान स्वयं बनाए। पहले की तरह खेल अब नहीं खेले जाते क्योंकि कई रोचक खेल बच्चो को बाते है जैसे शतरंज, क्रिकेट, फुटबाल, आदि। इस प्रकार आज बचपन की दुनिया में काफी परिवर्तन आ गया है।

प्रश्न 11.: लेखक का वास्तविक नाम क्या था? उन्हे पिता क्या बुलाते थे?

उत्तर: लेखक का वास्तविक नाम ‘तारकेश्वरवरनाथ था। उनके पिता उन्हें भोलानाथ बुलाते थे।

प्रश्न 12.: बचपन में माँ उन्हें भोला और कन्हैया कैसे बना देती थी?

उत्तर: बचपन में माँ उन्हे भोला और कन्हैया बनाने के लिऐ उनके मस्तिष्क पर त्रिपुड लगा देती थी।

प्रश्न 13.: लेखक के बचपन में और आज के बच्चों के बचपन में आप क्या अंतर पाते है? और कैसे!

उत्तर: लेखक के बचपन के समय बच्चों पर किसी भी प्रकार का दबाव नहीं होता था। वे घर-परिवार में बडो के साथ और हमजोलियों के साथ मिलकर विभिन्न प्रकार के खेल खेलते थे जिससे उनका मनोरंजन तो होता ही था साथ ही मानसिक और शाररिक विकास भी अच्छी तरह से होता था। बच्चे सात-आठ वर्ष की उम्र तक न विद्यालय जाते थे न घर पर पढ़ते थे।

आज का बच्चा, ढाई-तीन वर्ष की उम्र से ही विद्यालय जाने लगता है। उस पर पढ़ाई का दबाव इतना पड़ता है, कि बचपन ही भूल जाता है।

[/fusion_builder_column][/fusion_builder_row][/fusion_builder_container]
By | 2016-11-21T04:38:04+00:00 June 13th, 2012|Question and Answer|0 Comments

About the Author:

Kalpana Dubey is a Passionate teacher of Hindi Literature for the last 20 years. She is dedicated to sharing the richness of hindi language and Indian culture to ignite young minds with potent knowledge and perspectives. She has written 3 books on Hindi Grammar used in the CBSE curriculum, and published 2 collections of short stories Kushboo; and Jarokha. Those who know her would agree that, to listen to her, is to experience a spell.

Leave A Comment

Pin It on Pinterest

Share This

Share This

Share this post with your friends!