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Class 10 – काव्य : यह दंतुरित मुस्कान -नागार्जन

///Class 10 – काव्य : यह दंतुरित मुस्कान -नागार्जन

Class 10 – काव्य : यह दंतुरित मुस्कान -नागार्जन

यह दंतुरित मुस्कान

-नागार्जन

इस कविता में कवि नागार्जुन ने बच्चे की मुस्कान के सौंदर्य के बारे में बताया है। दुंतुरित (दांत वाली मुस्कान)। तुम्हारी यह प्यारी मुस्कराहट इतनी प्यारी है कि मृतक में भी जान डाल दे। तुम्हारा यह धूल से भरा शरीर (खेलने के उपरांत बच्चे की दशा) ऐसी प्रतीत होता है कि इसमे मेरी झोपड़ी में फूल खिल गए हो। तुम्हारी मुस्कान के स्पर्श को पाकर पाषण (पत्थर) भी पिघल जाए। तुम्हारी यह सुंदर मुस्कान देखकर ऐसा प्रतीत होता है पत्थर भी पिघल गया हो। कवि अपने बच्चे की मुस्कान देखकर अभिभूत हो गया है। तुम्हारी इतनी प्यारी और मधुर मुस्कान की तरह सुंदर खुशबू वाले फूल भिखरने लगते है। अर्थात कितना ही कठोर हृदय व्यक्ति क्यों न हो, वह तुम्हारी मुस्कराहट से निश्चय ही कोमल और मृदुल स्वभाव का हो जाएगा। प्रतीकात्मक शैली का प्रयोग किया है। कवि अपने बच्चे से कहते है कि तुमने मुझे नहीं पहचाना, इसलिए तुम मुझे देखते ही जा रहे हो, पर क्या तुम देखते ही रहोगे मुझे? क्या थक गए हो? क्या अब मैं तुमसे आँखें फेर लूँ? अभी तो तुम्हारी माँ हमारा परिचय करवा देगी। यदि माँ हमारे बीच का माध्यम न होती तो, तुम मुझे पहचान नहीं पाते और न ही मैं तुम्हारी दतुरित मुस्कान देख पाता। तुम्हारी माँ ने मुझे तुम्हारे दर्शन करवा दिए और मुझे तुम्हारा वात्सल्य से पूर्ण रूप देखने को मिला (दंतुरित मुस्कान)। अब मैं तुम्हें पहचान गया हूँ। मैं घर पर अधिक नहीं रह पाता (काम के कारण)। मैं प्रवासी हूँ और ज्यादातर घर पर नहीं होता इसलिए तुम शायद मुझे पितास्वरूप नहीं पहचान पा रहे और मैं तुम्हारे लिए किसी अन्य व्यक्ति के रूप में हूँ। (अतिथि, प्रवासी, अन्य, इतर) इन शब्दों से कवि अपना परिचय देते हैं। इस कारण मेरा और तुम्हारा सम्पर्क नहीं रह पाता क्योंकि मै थोड़े समय के लिए आता हूँ। परंतु तुम्हारी माँ तुम्हारे स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखती है और तुम्हारे स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए उचित भोजन तैयार करती है (शहद में मिलाकर बनाया गया भोजन जो कि बच्चे के स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है)। तुम्हारी माँ तुम्हारे स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखती है।

जब तुम सौंदर्य से परिपूर्ण मुस्कान मुझे देख कर देते हो तो मैं अभिभूत हो जाता हूँ। वह वात्सल्य पर इनता मोहित हो जाते है। वह उसकी छवीमान मुस्कान को देखकर कवि मोहित हो उठते है।

कवि ने बच्चे की सुंदर मुस्कान के बारे में बताया है। उसकी दंतुरित मुस्कान सबको खुशी देती है। कवि ने प्रश्नात्मक शैली का प्रयोग किया है जो कि काव्य में सौंदर्य पैदा करता है।

प्रश्न 1.: बच्चे की दंतुरित मुस्कान का कवि के मन पर क्या प्रभाव पड़ता है?

उत्तर: कवि को अपने बच्चे की दंतुरित (भोल-भाली) मुस्कान बहुत ही मोहक और सुंदर लगती है और वह उसे देखकर अभिभूत हो उठते है। कवि के अनुकूल उसकी मुस्कान से मृतक व्यक्ति भी प्राण प्राप्त कर सकता है।

प्रश्न 2.: बच्चो की मुस्कान और एक बड़े व्यक्ति की मुस्कान में क्या अंतर है?

उत्तर: बच्चे की मुस्कान में भोलापन, अपनापन और निश्छलता होती है जबकि व्यक्ति की मुस्कान में शिश्टाचार या व्यंग्य, स्वार्थ और छल भी हो सकता है। बच्चा किसी स्वार्थ को नहीं जानता, बड़े स्वार्थ में लिप्त होने के कारण स्वार्थमय या व्यंग्यात्मक मुस्कराहट को प्रधानता देते है।

प्रश्न 3.: कवि ने बच्चे की मुस्कान के सौंदर्य को किन-किन बातों के माध्यम से व्यक्त किया है?

उत्तर:

1. कवि के अनुसार बच्चे की मुस्कान किसी मृतक व्यक्ति के शरण में भी प्राण डाल सकती है।

2. उनकी मुस्कान ऐसी प्रतीत होती है कि उनके झोपड़े में उससे कमल के फूल खिल गए हो।

3. उसकी मोहक मुस्कान से पाषण भी पिघलने लगता है।

4. उसकी प्यारी और मधुर मुस्कान को देखकर करीले, बाँस और बबूल भी शैफालिका की तरह सुंदर खुशबू वाले फूल भिखरने लगते है।

प्रश्न 4.: भाव स्पष्ट कीजिए-

(क) छोड़कर तालाब मेरी झोंपड़ी में खिल रहे जलजात।

उत्तर: कवि – नागार्जुन

कविता – यह दंतुरित मुस्कान

भाव – इस पंक्ति में कवि कहना चाहते है कि वह निर्धन है, महलों मे रहने वाले नहीं है परंतु वह अपने बच्चे की मुस्कान को देखकर ऐसा प्रतीत होता है जैसे उनके झोंपड़ी में कमल के फूल खिल गए हो। बच्चे की मुस्कान कमल के फूल जैसी लगती है जो कि उनके झोंपड़ी में खिला है।

काव्य सौंदर्य – इस पंक्ति में कवि ने बच्चे की मुस्कान का प्रतिकात्मक प्रयोग किया है और उसे कमल के फूल जैसा कोमल बताया है।

(ख) छू गया तुमसे कि झरने लग पड़े शैफालिका के फूल बाँस था कि बबूल?

उत्तर: कवि – नागार्जुन

कविता – यह दंतुरित मुस्कान

भाव – कवि इस पंक्ति द्वारा यह बताना चाहते है कि उनके बच्चे की प्यारी और मधुर मुस्कान को देखकर करीले, बाँस और बबूल भी शैफालिका की तरह सुंदर खुशबू वाले फूल भिखरने लगते है। करीले और बाँस बहुत नुकीले होते है और बबूल के भी काँटों से भरा होता है पर बच्चे की मोहक और मादक मुस्कान को देखकर शैफालिका जैसे कोमल फूल भिखरने लगते है। अर्थात कितना ही कठूर हृदय व्यक्ति क्यों न हो, वह बच्चे की मुस्कराहट से निश्चय ही कोमल और मृदुल स्वभाव का हो जाएगा।

काव्य सौंदर्य – कवि ने प्रश्नात्मक एवं प्रतीकात्मक शैली का सुंदर प्रयोग किया है।

प्रश्न 5.: बच्चे से कवि की मुलाकात को जो शब्द चित्र उपस्थित हुआ है उसे अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तर: कवि (पिता) काफी समय बाद अपने पुत्र से मिलता है। इस कारण बच्चा पिता को अपने पिता स्वरूप् नहीं पहचान पाता बल्कि किसी अन्य व्यक्ति के रूप् में पहचानत है। जब बच्चा उनको देखकर मुस्काता है तो कवि उसकी मधुर और मादक मुस्कान को देखकर अभिभूत हो जाता है। कवि ने स्वयं को अतिथि और अन्य व्यक्ति के रूप में परिचय दिया है।

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By | 2016-11-21T04:38:03+00:00 July 11th, 2012|Question and Answer|0 Comments

About the Author:

Kalpana Dubey is a Passionate teacher of Hindi Literature for the last 20 years. She is dedicated to sharing the richness of hindi language and Indian culture to ignite young minds with potent knowledge and perspectives. She has written 3 books on Hindi Grammar used in the CBSE curriculum, and published 2 collections of short stories Kushboo; and Jarokha. Those who know her would agree that, to listen to her, is to experience a spell.

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