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Class 10 – काव्य : फसल -नागार्जन

///Class 10 – काव्य : फसल -नागार्जन

Class 10 – काव्य : फसल -नागार्जन

फसल

-नागार्जन

इस कविता में कवि नागार्जुन फसल के बारे में बताया है, उसे पैदा करने कि लिए जो तत्व योगदान देते है। कवि कहते है कि एक नहीं बल्कि बहुत सी नदियों का पानी चाहिए एक फसल में। पानी के सहारे फसल उगती है और यदि पानी न लगे तो फसल होने सम्भव नहीं है। फसल के लिए लाखों लोगों के परिश्रम की आवश्यकता होती है। हर प्रकार के फसल के लिए उसी प्रकार की मिट्टी चाहिए होती है। फसल के लिए उपयुक्त विभिन्न प्रकार की मिट्टियों की आवश्यकता होती है। जिस प्रकार की मिट्टी होगी, उसी प्रकार की फसल होगी। कुछ खास नहीं पर बहुत कुछ चाहिए एक फसल के लिए। फसल के लिए पानी चाहिए होता है जिससे बीज उगते हैं; मिट्टी चाहिए होती है जिसके बिना फसल होना असंभव होता है और धूप (सूर्य की किरणे) जिससे बीज अपना भोजन तैयार करते है। हवा के सहारे(माध्यम) से फसल के दाने सिकुड़ और सिमट जाते है। इनका भोजन सूर्य की किरणों के माध्यम से बनता है। हवा से बीज फसल बनकर तैयार हो जाती है। जब इन चीजों का मिश्रण होता है, तब फसल तैयार होती है।

इन सबके अलावा मनुष्य के परिश्रम का फसल में भी बहुत महत्व होता है। (धूप, पानी, मिट्टी) इन प्राकृतिक उपादानों के साथ-साथ मनुष्य का परिश्रम भी बहुत आवश्यक है। इसके बिना कुछ भी सम्भव नहीं होगा इसलिए यह अत्याधिक जरूरी है। परिश्रम ही फसल की गरिमा होती है। इसके बिना फसल प्राप्त करना संभव नही होता। पेड़-पौधों से हमें फल-फूल प्राप्त होते है परंतु फसल से हमें अन्न की प्राप्ती होती है। और परिश्रम से प्राप्त किया अन्न ही फसल कहलाता है।

फसल कविता के माध्यम से कवि ने मनुष्य के परिश्रम को बहुत महत्व दिया है और यह दर्शाया है कि प्रत्येक फसल किसान की महत्व को दर्शाती है।

प्रश्न 1.: कवि के अनुसार फसल क्या है?

उत्तर: कवि के अनुसार फसल पानी, वायु, मिट्टी, सुरज की किरणों एवं मनुष्य की महनत द्वारा प्राप्त किया गया अन्न है। यह बहुत सी नदियों के पानी, बहुत से लोगों के परिश्रम, सूर्य की किरणों द्वारा प्राप्त की जाती है।

प्रश्न 2.: कविता में फसल उपजाने के लिए आवश्यक तत्वों की बात कही गई है। वे आवश्यक तत्व कौन-कौन से है?

उत्तर: कविता फसल में फसल उपजाने के लिए आवश्यक तत्वों की बात की गई है जैसे कि – पानी, मिट्टी, हवा, सूर्य की किरणे। हवा के सहारे बीज सकुड़ जाते है, प्रत्येक मिट्टी में उसी प्रकार की फसल उगाई जाती है, पानी के और सूरज की किरणों के सहारे फसल को भोजन प्राप्त होता है। इन प्राकृतिक उपादानों के साथ-साथ मनुष्य के परिश्रम की भी फसल में अहम् भूमिका होती है। इसका फसल में अत्याध्किा महत्व है और इसके बिना अच्छी फसल होना संभव नहीं है। प्रकृति और मनुष्य के सहयोग से ही सृजन संभव है। इसके मिश्रण से ही फसल तैयार की जाती है। चार चीजें हमें प्रकृति से मिलती है और एक हमाने हाथ हमें जो कि परिश्रम है जो की फसल के लिए बहुत आवश्यक है।

प्रश्न 3.: फसल को ‘हाथों के स्पर्श की गरिमा’ और ‘गरिमा’ कहकर कवि क्या व्यक्त करना चाहता है?

उत्तर: फसल को ‘हाथों के स्पर्श की गरिाम’ और ‘गरिमा’ कहकर कवि मनुष्य की महनत की आवश्यकता और महत्व को दर्शाना चाहता है। मनुष्य की महनत के द्वारा ही हमें फसल प्राप्त होती है। अन्न केवल मनुष्य के परिश्रम द्वारा प्राप्त हो सकता है। इसलिए मनुष्य के परिश्रम की फसल में अहम भूमिका होती है और यह अत्याध्कि जरूरी होती है। केवल मनुष्य ही अपनी महनत से खाद मिट्टी सही रूप् से और फसल के योग्य बनाता है। सही समय पर उसको पानी देता और महनत से उसे उगाता है। महनत ही फसल की गरिमा है।

प्रश्न 4.: भाव स्पष्ट कीजिए –

रूपांतर है सूरज की किरणों का सिमटा हुआ संकोच है हवा की थिरकन का!

उत्तर: कविता – फसल

कवि – नागार्जुन

भाव – इन पंक्तियों में कवि ने फसल के बारे में बताया है कि हवा लगने पर (माध्यम से फसल के दाने) बीज सिकुड़ जाते है और धूप से सूख जाते है। इसलिए कवि ने इसे रूपांतर कहा है क्योंकि फसल का बदला रूप दिखाई देता है इस प्रकार।

काव्य सौंदर्य – कवि ने इन पंक्तियों मे लयात्मक शैली और प्रतीकात्मक चित्रण किया है जो कि काव्य में सौंदर्य प्रकट करता है।

प्रश्न 5.: कवि ने फसल को हजार-हजार खेतों की मिट्टी का गुण-धर्म कहा है-

(क) मिट्टी के गुण-धर्म को आप किस तरह परिभाषित करेंगे?

उत्तर: प्रत्येक प्रकार की मिट्टी विशिष्ट होती है। उसका अपना गुण और महत्व होता है। हर फसल हर मिट्टी में नहीं उगाई जा सकती। उन्हें विशिष्ट प्रकार की मिट्टी की आवश्यकता होती है। यही उसका गुण-धर्म है।

(ख) वर्तमान जीवन शैली मिट्टी के गुण-धर्म को किस-किस तरह प्रभावित करती है?

उत्तर: आधुनिक समय में विज्ञान के आविष्कारों से यह प्रमाणित हो चुका है कि अलग-अलग फसल के लिए अलग-अलग प्रकार की मिट्टी होनी चाहिए। वर्तमान समय में किसान मिट्टी के अनुरूप ही फसल पैदा करता है जिससे उसे अधिक से अधिक अन्न मिल सके।

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By | 2016-11-21T04:38:03+00:00 July 11th, 2012|Question and Answer|0 Comments

About the Author:

Kalpana Dubey is a Passionate teacher of Hindi Literature for the last 20 years. She is dedicated to sharing the richness of hindi language and Indian culture to ignite young minds with potent knowledge and perspectives. She has written 3 books on Hindi Grammar used in the CBSE curriculum, and published 2 collections of short stories Kushboo; and Jarokha. Those who know her would agree that, to listen to her, is to experience a spell.

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