कवित्त

-देव

डार द्रुम पलना …………………………………………………..चटकारी दै।।

भाव-इस कविता में कवि ‘देव’ ने वसंत ऋतु का परम्पराओं से हटकर चित्रण किया है। वसंत को राजा कामदेव के पुत्र के रूप में चित्रित किया गया है। कवि ने शिशु बसंत का बहुत ही मार्मिक और यथार्थ मानवीय करण करते हुए चित्रण किया है। शिशु बसंत छायादार वृक्षों की डाली पर झुला डालकर नई-नई कोमल गुलाबी पत्तियों का बिझोना बनाकर सुंदर खूबसूरत झबला बनाकर पवन उसे झुला रही है। मोर और तोते उससे बाते कर रहे है। कोयल ताली बजा-बजा कर उसे झुला रही है। कमल की कली रूपी नायका उस पर लता रूपी वस्त्र से छाया करके, पराग रूपी राई नोन से उसकी नजर उतार रही है।

ऐसे सुंदर सुकोमल शिशु को गुलाब चटक कर जाता है। यहाँ नए-नए विशेष उपमान है जैसे- पराग-राई नोन। यहाँ मानवीयकरण और अनुप्रास अलंकार की आवृत्ति की गई है और ‘केकी कीर’ समासिक पद है।

फटिक सिलानि सौ ……………………………………………….सो लगत चंद।।

भाव – चाँदनी रात में सारा संसार दुधिया दिखाई दे रहा है। ऐसा लग रहा है मानो यह संसार पारदर्शक पथरों से बना सुंदर मंदिर हो और समुद्र की तरंगें यूँ प्रतीत हो रही है मानो समुद्र खारे पानी से नही बल्कि दही से भरा हो। जल और थल में कही भी अपार दर्शिता नहीं है। समस्त थल दूधया फैन से भरा हुआ दिखाई दे रहा है। वह ऐसा लग रहा है जैसे मल्लिका के मरकंद (फूलों) में मोतियों की ज्योति मिला दी हो। सुंदर, स्पष्ट आईने(दर्पण) जैसे आकाश में चमकता हुआ चाँद, राधिका के मुख जैसा प्रतीत हो रहा है।

कवि ने इस कवित्त में चाँदनी रात का मार्मिक और मनोहारी (मन को हरने वाला) चित्रण किया है।

प्रश्न 1.: पठित कविताओं के आधार पर कवि देव की काव्यगत विशेषताएँ बताइए।

उत्तर:

1. कवि ने प्रकृति का सुंदर मानवीयकरण किया है।

2. एक की विशेषता एक का उपमान दूसरे का उपमेय बन जाता है। अर्थात कवि ने एक ही वस्त्र विभिन्न उपमानों से सराहा है।

3. क्वि ने परम्परागत उपमानो से हट कर नए उपमानों का प्रयोग किया है।

4. ब्रज भाषा का मोहक और लयात्मक प्रयोग है।

प्रश्न 2.: दूसरे कवित्त के आधार पर स्पष्ट करें की ऋतुराज वसंत के बाल रूप का वर्णन परंपरागत वसंत वर्णन से किस प्रकार भिन्न है?

उत्तर: परंपरागत वसंत और वस्तुओं में जान डालकर उन्हें मनमोहक बनाता है जबकि बाल वसंत का ख्याल और वस्तुएँ रखती है जैसे-हवा का वसंत को झूला झुलाना और कोयल का ताली बजाकर और गुनगुनाकर बाल वसंत को सुलाना।

प्रश्न 3.: ‘प्रातहि जगावत गुलाबी चटकरी दै। इस पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: कवि – देव

कविता – सवैया और कवित्त

भाव – इन पंक्तियों में देव यह कहना चाहते है कि उस सुंदर, सुकोमल शिशु रूपी वसंत को गलाब चटक कर जगाया जाता है ताकि वह मुलायम गुलाब की पंखुडियों के स्पर्श से निंदा का त्याग कर उठ जाए।

प्रश्न 4.: चाँदनी रात की सुंदरता को कवि ने किन-किन रूपों में देखा है?

उत्तर: चाँदनी रात की सुंदरता को कवि ने दुधिया थल, दही से बना समुद्र, दुधिया फैन से बना थल, मल्लिका के रस मे मोती और आरसी आदि और रूपों में देखा है। कवि ने चाँदनी रात के लिए बहुत ही रूपको का प्रयोग किया है।

प्रश्न 5.: ‘प्यारी राधिका सो लगत् चंद’ – इन पंक्ति का भाव स्पष्ट करते हुए बताए कि इसमें कौन सा अलंकार है?

उत्तर: कवि – देव

कविता – सवैया और कवित्त

भाव – कवि ने इस पंक्ति ने चाँदनी रात का मार्मिक और मनोहरी चित्रण किया है। वह कहना चाहते है कि सुंदर, स्पष्ट दर्पण जैसे आकाश में चमकता हुआ चाँद राधिका के मुख जैसा प्रतीत होता है। इन पंक्तियों में उत्प्रेक्षा अलंकार है।

प्रश्न 6.: तीसरे कवित्त के आधार पर बताइए कि कवि ने चाँदनी रात की उज्जवलता का वर्णन करने के लिए किन-किन उपमानों का प्रयोग किया है?

उत्तर: कवि ने चाँदनी रात की उज्जवलता का वर्णन करने के लिए दूध, दही, दूध के फैन, मोती की ज्योति, मल्लिका फूल का रस, आरसी (दर्पण), राधा आदि उपमानों का प्रयोग काव्य-सौंदर्य की उत्पत्ति के लिए किया है।

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