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बस्ते का बोझ बच्चों की उन्नति में बाधक

By | 2017-09-25T12:52:20+00:00 June 4th, 2012|HIndi Debates|

बाधक   "बार -बार आती है मुझको मधुर यादयाद बचपन तेरी गया, ले गया ,तू जीवन की सबसे मस्त खुशी मेरी "   बचपन भी कितना ?सिर्फ़ तीन -चार साल .....बस इधर स्कूल का बस्ता पीठ पर चढा चड़ाऔर उधर बचपन खिसका .......क्यों हुआ मेरे साथ ऐसा .......?कभी सोचा है आपने .....माता -पिता ने .......अभिभावकों [...]

बस्ते का बोझ बच्चों की उन्नति मैं साधक

By | 2017-09-25T12:52:44+00:00 June 4th, 2012|HIndi Debates|

साधक   'आने वाले सुंदर कल की तस्वीर हैं बच्चे , उज्ज्वल उन्नत देश की तकदीर हैं बच्चे '   जी हाँ ,आज के बच्चे कल का भविष्य हैं आज का बच्चा कल का नागरिक बनता है बच्चों की परवरिश ,उनका रहन सहन -सहन उनकी शिक्षा का देश के भविष्य पर सीधा असर पड़ता है [...]

महिलाओं का नौकरी करना परिवार के लिए उपयुक्त है–विपक्ष

By | 2017-09-25T12:52:47+00:00 June 1st, 2012|HIndi Debates|

आंखों में जलन, सींने में तूफान सा क्यों है ? इस शहर में हर शख्स परेशान सा क्यों है ? आप सभी से में ये पूछना चाहती हु की वह बच्चा क्यों रो रहा है? वह बुदा व्यक्ति चुप क्यों है ? वह किशोर क्यों क्रोधित हो रहा है? वह व्यक्ति चिडा क्यों रहा है [...]

चापलूसी करो -आगे बढो- विपक्ष

By | 2017-09-25T12:52:52+00:00 March 10th, 2011|HIndi Debates|

विपक्ष 'उद्यमेन ही सिद्ध्यन्ते कार्याणि न मनोर्थे, नहि प्रविशन्ति सुप्तस्य सिंह स्य मुखे मृगा ' जिस प्रकार बलशाली शेर के मुख में जानवर स्वयम नही घुसते ,उसे इसके लिए स्वयम प्रयत्न करना पड़ता है हम मनुष्य होकर स्वयं अपने बल पर कार्य न करके यदि चापलूसी का सहारा लेते हैं ,यह निश्चय ही शर्मनाक है [...]

चापलूसी करो आगे बढो- पक्ष

By | 2017-09-25T12:53:06+00:00 March 10th, 2011|HIndi Debates|

पक्ष २१वी सदी में हर कोई एक दूसरे से आगे बढ़ने की होड़ में लगा रहता है हर कोई किसी भी तरह आगे बढ़ना चाहता है चाहे पैर पकड़ने पडें या ग ला | ऊँचाई या वाहवाही किसे पसंद नही ,इसके लिए थोड़ी सी चापलूसी करने में हर्ज ही क्या है ? आज -कल मुंह [...]

युवा -अवस्था -विपक्ष

By | 2017-09-25T12:53:13+00:00 March 10th, 2011|HIndi Debates|

कौन कहता है की युवावस्था भू लो भरी है ? यह तो कुछ कुंठित लोगो की शरारत जान पड़ती है। आज के युवा वर्ग का जीवनभूलो से भरा नही है वह तो प्रयोगों से भरा है । उत्साह , उमंग और आशाओ से भरी जिंदगी में वह सब कुछ भोग लेना चाहता हैं। जीवन को [...]

युवा-अवस्था फूलो भरी हैं तो प्रोड-अवस्था जीवन संघर्ष-रत और वृदावस्था पश्चाताप से परिपूर्ण-पक्ष

By | 2017-09-25T12:53:22+00:00 March 10th, 2011|HIndi Debates|

युवा-अवस्था फूलो से भरी हैं तो प्रोदावस्था जीवन संघर्षरत और वृदावस्था पस्चावस्था से परिपूर्ण । यह एक वाक्य आज के समाज को सम्पूर्ण झांकी को प्रस्तुत कर देता हैं। आधुनिक समय में समाज में व्याप्त कुंठा , ग्लानी , दुःख , अवसाद सब कुछ झलक पड़ता है। आज का युवा वर्ग द्विग-भ्रमित है इसलिए गलतियों [...]

विदेश में बसने -विपक्ष

By | 2017-09-25T12:53:34+00:00 March 10th, 2011|HIndi Debates|

“जो भरा नही है भावो से, बहती जिसमे रस-धार नही, वह ह्रदय नही वह पत्थर है, जिसमे स्वदेश का प्यार नही’ हमारे नवयुवको में विदेश में जाने की इच्छा दिन-प्रतिदिन बलवती होती जा रही है. .अपने देश के प्रति आस्था, कर्मठता , और चिंता के भाव विलुप्त हो रहे है. ऐसा लगता है जैसे शिक्षित [...]

विदेश में बसने की चाह हर भारतीय का ख्वाब -पक्ष

By | 2017-09-25T12:53:44+00:00 March 10th, 2011|HIndi Debates|

मेरा जूता है जापानी ये पतलून एन्ग्लिश्स्तानी , सर पे लाल टोपी रुसी , फ़िर भी दिल है हिन्दुस्तानी’ मेरा मतलब है की विदेश में बसने से कोई भी व्यक्ति देश-द्रोही नही हो जाता . उसका दिल तो हमेशा देश के लिए धड़कता है . और वह आजीवन उसकी प्रगति की कामना करता हैं. विदेश [...]

भारतीय -संस्कृति-विपक्ष

By | 2017-09-25T12:53:53+00:00 March 10th, 2011|HIndi Debates|

“उननो, मिस्रयो, रुमा, सब मिट गए जहाँ से , बाकी अभी तक है नामो-निशा हमारा.” बड़े ही सौभाग्य और गर्व की बात हैं की भारतीय संस्कृति प्राचीन काल से सम्पुरण विश्व में सर्वश्रेष्ट रही. विश्व ने उसका लोहा माना और उसे स्वीकार किया. फ़िर चाहे वह अमेरिका की भगिनी निवेदिता हो या रूस के ताल्स्तॉय [...]

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