ब्रह्मा के पुत्र पुलस्त्य जी थे |वे मेरु पर्वत पर तप करने गए |वहाँ त्रणविन्दु के आश्रम में वे रहने लगे | वहाँ देव कन्याएँ ऋषि कन्याएँ जल क्रीडा किया करती थी | पुलस्त्य जी ने उन्हें चेतावनी देते हुए कहा कि जो कन्या उनके सामने आएगी वह

गर्भवती हो जाएगी | त्रणविन्दु की कन्या भूल से उनके सामने आ गई ,वह गर्भवती हो गई | त्रणविन्दु ने उसे पुलस्त्य  ऋषि को सौप दिया | उनके विश्रवा पुत्र हुआ |भारद्वाज की कन्या का विवाह विश्रवा से हुआ | उनका पुत्र

वैश्रवण {कुबेर }हुआ | सुमाली राक्षस की कन्या केकसी ने ऋषि विश्रवा से प्रणय निवेदन किया | ऋषि ने कहा तुम संध्या समय यह निवेदन  लेकर आयी हो ,अत: तुम्हारे पुत्र राक्षस होंगे ,तीसरा पुत्र महात्मा होगा |उसके रावण

कुम्भकरण ,शूर्पनखा हुए तीसरा पुत्र  विभीषण हुआ | रावण का विवाह मय दानव की पुत्री मंदोदरी से हुआ |वैरोचन की धेवती {पुत्री की पुत्री } वज्रज्वला का विवाह  कुम्भकरण से हुआ | गन्धर्व शैलूषहि की पुत्री सरमा का विवाह  विभीषण से

हुआ | कुबेर को उसके पिता विश्रवा ने स्वर्ण जटित लंका उसे दी थी | कुबेर रावण का सौतेला भाई था |केकसी के बच्चे सुमाली {नाना} के साथ रहते थे | रावण ने कुबेर से लंका छीन ली | कुबेर ने कैलाश पर्वत पर अलकापुरी बसाई |

रावण के एक लाख पुत्र और सवा लाख नाती -पोते थे | दुर्गुणों के कारण उस परिवार कोई नहीं बचा | विभीषण ने रावण की अन्तेष्टि की थी | रावण परम शिव भक्त था | महान ज्ञानी पंडित था | उसने स-परिवार मुक्ति पाने के लिए श्री राम से

बैर लिया |परम पद तो शिवरी ,गीध ,अजामिल आदि ने भी प्राप्त किया |उनका भी साध्य वही था जो रावण का था लेकिन साधन {माध्यम } अलग था | साध्य कितना ही उत्तम हो यदि साधन उत्तम नही है तो साध्य प्राप्त की सफलता भी श्रेष्ठ

नहीं होगी |अत : साध्य के साथ साधन को भी महत्व दीजिए |