कौन कहता है की युवावस्था भू लो भरी है ? यह तो कुछ कुंठित लोगो की शरारत जान पड़ती है आज के युवा वर्ग का जीवनभूलो से भरा नही है वह तो प्रयोगों से भरा है उत्साह , उमंग और आशाओ से भरी जिंदगी में वह सब कुछ भोग लेना चाहता हैं जीवन को अपने ढंग से जीने की लालसा किसमे नही होती है जीवन उसका, अपना वह जैसे चाहे वैसे जिए इसके लिए वह संघर्ष भी करता है
आज का युवावर्ग पहले से कही ज्यादा समझदार और यथार्थवादी है वह आदर्शो के खान्दर में नही यथार्थ की जमीन पर जीना चाहता है वह ऊँगली पकड़ कर चलने वाला बालक नही हाथ पकड़ कर सहारा देने वाला युवक है जो स्वयम नही जियेगा वह दुसरो को सहारा क्या देगा ? वह स्वयम अपने साहस से ऐसा रास्ता चुनता हैं जहाँ फुल होते हैं, कांटे नही अपने जीवन के विभिन् अनुभवों से सीखता हुआ वह आगे बढता हैं वह किसी के बताये रास्ते पर चल कर स्वयम अपना रास्ता चुनता है जब यही युवा अपनी प्रोदावस्था में पहुँचता हैं तो यह संघर्षो का नही जीवन की विभिन् चुनोतियों का का सामना करता है |यह चुनौती उसे संघर्ष नहींजीवन की पूर्णता लगती है जिसे वह लाख परेशानियों के बाद भी पाने का प्रयत्न करता है. ऐसे वृद का जीवन जिसने अपनी इच्छा अनुसार जिया हो वह प्रयाशिचित नही करता।बल्कि उपलब्धियोंपर प्रसन्न होता है|

समाज को ऐसे बुजुर्गो को पुरस्कृत करना चाहिए जो वृदावस्था को उल लास से भरते है . ऐसा वाही व्यक्ति कर सकते है जोकिया सो गया आगे की सुधि लेके सिधांत को मानते हो.|

आज के युवक को सामदाम , दुंदभेद सभी नीतियों का ज्ञान है यही कारन है की वेह कही मात नही खता . निति , धरम , निष्ठां जैसे मोधारे हथियारों का वेह सहारा नही लेता इसलिए वेह संघर्ष करता है और ही और पश्चाताप . मनुष्य को समय के साथ चलना चाहिए . नही तो समय उसे पीछे छोड़ जाएगा.

आज का युवा वर्ग भगवान्कृष्ण के वचनों का पालन करता नज़र आता है . ‘ कर्मण्ये वान्धिकारास्तु माँ फलेषु कदाचनःवेह फल की इच्छा नही करता . जो मिलता है उसे अपनी बुद्धि से , बल से अपने अनुकूल बना लेता है . और जब अनुकूल बना लिया तो पश्चाताप ही कैसा ? फ़िर तो आनंद है , परम आनंद.|

आज का वृद परलोक की चिंता नही करता बल्कि इस लोक में मरते दम तक सक्रीय भूमिका अदा करता नज़र आता है . वह ज्ञान और अनुभवों का अपार भण्डार होता है . उसे पश्चाताप कैसा ? वह तो समाज की अमूल्यनिधि होता है . शान्ति और संतोष का साकार रूप होता है . पश्चाताप होता है उन्हें जो इन्हे पहचान नही पाते.|

समाप्त