विपक्ष


तीव्र गति से की गई उन्नति प्रगति का सूचक हैधीरेधीरे की गई उन्नति , उन्नति नही परिवर्तन कहलाती हैजो समय की गति के साथ होना निश्चित हैमानव जाती ने जब परिवर्तन का बीडा उठाया है अपने को उन्नति के शिखर पर पहुचाया हैयहउसकी सोच और कर्मठता का ही परिणाम हैतीव्र गति से ही उन्नति की जा सकती हैक्योकि धीरेधीरे की गई उन्नति से उसमे अवनति के तत्व अपने पैर फैला लेते हैयह मनो– वेज्ञानिक सत्य है की मानव उन्नति की और उतनी जल्दी अग्रसर नही होता जितनी जल्दी अवनति की औरसमय भी धीरे नही चलता वह निरंतर आगे बढतारहता हैसमय के साथ चलना उन्नति हैआज मनुष्य की आयु इतनी कम है की वेह सोचविचारों में समय बरबाद नही कर सकता

किसी भी कार्य की महानता इस बात में नही है की वेह कितनी देर में हुआबल्कि इस मे की वेह कितनी जल्दी हुआ . तीव्र गति से उन्नति पतन का कारण नहीपतन है मनुष्य कीसोच . मनुष्य भोतिक वाद की और बढ गया है . उसने नैतिक मूल्यों का त्याग करदिया है . और यही उसके पतन का करना है . ओशो ने कहा हैभोतिक सुख का सबसे महत्वपूर्ण योगदान यह कि वह अनिवार्य रूप से विषाद की ओर ले जाता है ,यही मानव जाति के विनाश के कारण है |

मनुष्य ने विज्ञान ,विद्युत और ऊर्जा से कितनी प्रगति की है किसी से छु