महाभारत युद्ध के १८ दिन ………..
महाभारत युद्ध के प्रथम दिवस -विराट पुत्र -उत्तर और श्वेत का वध हुआ था |
प्रथम दिवस ध्रष्टद्युम्न ने क्रोचारुण व्यूह की रचना की थी |
पहले ९ दिन कौरवो की सेना के सेना नायक पितामह भीष्म रहे |
दूसरे दिन घमासान युद्ध हुआ |भीष्म के पराक्रम के सामने सभी नतमस्तक थे |
तीसरे दिन भीमसेन ने कलिंग के राजा और उसके पुत्र का वध किया था |
भीष्म ने इस दिन गरुण के आकार की व्यूह रचना की थी |
तीसरे दिन अर्जुन ने अर्ध चन्द्राकर व्यूह रचना की थी |
चौथे दिन ध्रष्टद्युम्न ने गजराज की व्यूह रचना की |
चौथे दिन भीष्म ने वृषभ व्यूह रचना की |
पांचवे दिन पांडवों ने श्येन पक्षी की व्यूह रचना की
कौरवोंने इस दिन मकर की व्यूह रचना की |
छठे दिन भीष्म ने क्रोंच व्यूह रचना की |
छठे दिन पांडवों ने बांडके आकार की रचना की |
सातवें दिन करवों ने मण्डलआकार रचना की |
सातवें दिन पांडवों ने वज्र नामक व्यूह रचना की |
आठवें दिन कौरवों ने महाव्यूह रचना की |
आठवें दिन पांडवों ने श्रंगारक व्यूह रचना की |
नौवें दिन कौरवों ने सर्वोतोभद्र व्यूह रचना की |
नौवें दिन पांडवों ने भी सर्वोतोभद्र व्यूह रचना की थी |
दसवें दिन शिखंडी अर्जुन के रथ पर था |उसने भीष्म के सारथी का वध किया |
इस दिन अर्जुन ने भीष्म को शर शैया प्रदान की |
ग्यारहवें दिन द्रोणाचार्य सेनापति बने |

बारहवें दिन अर्जुन ने संशप्तकों से युद्ध किया और सुधन्वा तथा सुशर्मा का वध किया |
बारहवें दिन अस्वत्थामा ने राजा नील का वध किया |
तेरहवें दिन द्रोणाचार्य ने चक्रव्यूह की रचना की |जिसमें अभिमन्यु का वध हुआ |
चौदहवें दिन द्रोणाचार्य शक {रथ के आकार की रचना की |
अर्जुन ने ;कृष्ण की पत्नी विन्दादेवी के भाई -विन्द और अनुविन्द का वध किया |
ये दोनों कृष्ण के साथ गुरु संदीपन के शिष्य भी थे |
इस दिन अर्जुन ने जयद्रथ का वध किया |
चौदहवें दिन से रात्रि युद्ध भी आरम्भ हो गया
अभी तक नियमानुसार युद्ध हो रहे थे |अभिमन्यु की मृत्यु से नियम तोड़ दिए गए |
ध्रष्ट द्यूमन ने द्रोणाचार्यका वध पंद्रहवे दिन किया |
कर्ण ने इंद्र से प्राप्त वैजन्ती शक्ति का प्रयोग करके भीमसेन पुत्र घटोत्कच का वध किया |
सोलहवें दिन कर्ण सेनापति बना |
इस दिन कौरवों ने मकर के आकार की व्यूह रचना की |
सत्रहवें दिन अर्जुन ने अन्जलिक बान से कर्ण का वध किया |
कर्ण को मुखाग्नि कृष्ण ने अपने दिये गए वचन के अनुसार दी |
१८ वें दिन दुर्योधन ने शल्य को सेनापति बनाया |
युधिष्ठिर ने शल्य का वध किया |
सहदेव ने शकुनि का वध किया |
शल्य के निधन पर दुर्योधन जलदुर्ग मैं प्रवेश कर गया |
भीम के साथ मल्लयुद्ध मैं घायल होने पर मृत्यु पूर्व उसने अश्वत्थामा को सेनापति बनाया |
अश्वत्थामा ने रात्रि मैं सोते हुए द्रोपदी के पांचों पुत्रो और धृष्ट द्युम्नका वध कर डाला |
भीष्म शर शैया पर ५६ दिन रहे |
५७ वें दिन उन्होंने शरीर त्याग किया |
युद्ध में जय -पराजय किसी की भी हो ;विनाश दोनों ओर होता है |