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भारतीय संस्कृति विदेशियों को प्रभावित कर रही है-पक्ष

//भारतीय संस्कृति विदेशियों को प्रभावित कर रही है-पक्ष

भारतीय संस्कृति विदेशियों को प्रभावित कर रही है-पक्ष

जिस देश में बहती मधु की धारा ,
जहाँ होता पितरो का आदर ,
जिस देश में वीरजवान ,
अपनी धरती को प्यार,
वह देश है हिंदुस्तान ,
वह देश है हिंदुस्तान,

सभी प्राणी अपनी जनम भूमि को जान से ज्यदा प्यार करते हैंतभी तो उसे स्वदेश की हर वास्तु में सौन्दर्य नज़र आता हैहमारी संस्कृति ही भारतीयता का बोध कराती है। संस्कृति देश की अंतरआत्मा होती हैइसी के कारन देश के संस्कारों का आचारविचार का बोध होता हैजिनके आधार पर वे अपने सामाजिक आदर्शो का निर्माण करता हैं

भारतीय संस्कृति गंगा की धारा के सामान है जिसमे बहुत सी धाराए मिलकर एक सी हो जाती हैभारत तो ऐसा चमन है जिसमे विभिन् परकार की बोलिया , जातियों धर्मो के फूल खिले हैंजिनकी खुशबू, रंग और आकर्षण इतना अधिक है की लोग इनसे परभावित हुए बिना नही रहते ।

अगर हम अतीत में झांक कर देखे तो हमारी संस्कृति के बारे में जान कर उसे देखने आए और भारत की संस्कृति से उसे प्यार हो गया। इसी कारन उन्होंने हमारे देश से मसालों का व्यापार शुरू कियामगर ये दुःख की बात है की उन्होंने हमारे प्यार और सम्मान का फायदा उठायाऔर हमारे देश को धोखा दियाहमें गुलाम बनाया और हमारा शोषण किया

हम स्टेन्स के परिवार को देखते तो हमें आश्चर्य होता है की जिस औरत के पति और बेटो को जिन्दा जला दिया फ़िर भी श्री मति स्टेन्स ने इस देश से दूर होना उचित नही समझाउन्हें हमारी संस्कृत से लगाव हैकुछ लोगो के जघन्य कृत्य ने भी उन्हें नही हिलाया उनका यह कदम सराहनीय है

मदर टेरेसा की बात करे जो युगोस्लाविया की थीअपना देश छोड़कर भारत आई और यहाँ वहमदरकहलाईलोग कहते है की वह यहाँ गरीबी देखकर आई थी , पर में आपसे एक प्रशनपूछती हु की गरीबी कहाँ नही है? हकीकत यह है की यहाँ के लोगो को प्यार ,सम्मान और अपनेपन ने उन्हें यहाँ से जाने नही दिया

हमारी प्राचीन इमारतों को देखने के लिए जितने विदेशी आते हैं उतने हिन्दुस्तानी नहीक्योकि ये इमारते सिर्फ़ इमारते नही है बल्कि ये हमारी संस्कृति को बताने वाली साकार अभिलेख है इनसे हमारी सोच , हमारा रहनसहन , हमारा अचारविचार झलकता है

अंत में में यही कहना चाहूंगी की हमारा देश महान संस्कृति से गौरवान्वित हैइसलिए प्राचीन काल से आज तक लोग यहाँ खिचे चले आते है

फादर बुल्के , भगिनी निवेदिता , कामिल बुल्के , आदि ऐसे नाम है जो हमारी संस्कृति की गरिमा को दर्शाते हैं
शायद इसलिए कहाँ गया है
भारत जैसी संस्कृति कही नही ,
भारत जैसा प्यार कही नही.
भारत में आओगे तो
यही के होकर रह जायोगे.

By | 2017-09-25T12:56:16+00:00 March 10th, 2011|HIndi Debates|0 Comments

About the Author:

Kalpana Dubey is a Passionate teacher of Hindi Literature for the last 20 years. She is dedicated to sharing the richness of hindi language and Indian culture to ignite young minds with potent knowledge and perspectives. She has written 3 books on Hindi Grammar used in the CBSE curriculum, and published 2 collections of short stories Kushboo; and Jarokha. Those who know her would agree that, to listen to her, is to experience a spell.

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