बाबा राम देव पर हमला —————-

४ जून की अर्द्ध रात्रि को बाबा के अनसन और भ्रष्टाचार के खिलाफ विरोध पर पुलिस के द्वारा की गई कार्यवाही को क्या कहा जाए ? ऐसा बर्बर प्रदर्शन

तो गुलामी के समय में ही होता था | इस सरकार ने यह दिखा दिया कि वे अंग्रेजो से कम नही हैं | जो भी उनका विरोध करेगा ,उसके साथ वे ऐसा ही करेगें   | कुछ केन्द्रीय

मंत्रियों का यह कहना कि बाबा योग करें राजनीति न करें ,क्या राजनीति करने का अधिकार सिर्फ उनको ही है ! वे यह निश्चित करने वाले कौन होते हैं कि कौन राजनीति

करे और कौन न करे ? वे राजनीति और राष्ट्र पर एक क्षत्र अधिकार चाहते हैं | क्या ऐसे लोगों का विरोध नहीं करना चाहिए ! महिलओं ,बच्चों और निहत्थे लोगों पर

प्रहार करना , सोते हुए लोगों पर लाठी भांजना ,क्या यह प्रजातंत्र का स्वरूप है ? यदि यही प्रजातंत्र है,तो राज तंत्र कैसा होगा ? आज के हालत देख कर तो ऐसा लगता

है जैसे हम किसी बर्बर ,असभ्य ,अशिक्षित समाज में रह रहे हैं | जिसमें न मानवता है न नैतिकता न सहिष्णुता ,सिर्फ एक वहशीपन ,अहंकार और मदांधता |

अगर हम चुप रहे ,इसका विरोध नहीं किया !तो हम भी इस बर्बर समाज का हिस्सा हो जाएगें |जागो मेरे साथियो !! इस सरकार को सबक सिखाओ ,यह सरकार

हमारी ही बनाई हुई है ,इसे बदलना हमारा हक है | हमारे देश में साधू संतो का सम्मान होता रहा है ,वहाँ ऐसा कुकर्म अशोभनीय है | जो जनता का धन अपने लिए

विदेश में जमा कर रहे हैं क्या उनका विरोध करना इतना बड़ा अपराध है कि उन पर लाठी चलाईं जाए | ऐसे लोग सच्चाई का साथ नहीं दे सकते | उन्हें बातें बनाना ,

सीधे को उल्टा कर देना ,अपना स्वार्थ साधना खूब आता है |उन्होंने अभी तक यही किया है ,उन्हें यही आता है | अब समझने का समय है ,नहीं तो बहुत मुश्किल

हो जाएगी |  इतिहास गवाह है    “जब भी देखा है इतिहास की नजर से …..

लम्हों ने खता की है सदियों ने सजा पाई ||”

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