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प्रशंसा करने में हिचकिए मत

///प्रशंसा करने में हिचकिए मत

प्रशंसा करने में हिचकिए मत

प्रशंसा करने में हिचकिए मत –
१ अच्छाइयों के प्रकाश में बुराईयों का अन्धकार स्वत: ही दूर हो जाता है

२ प्रशंसा व्यक्ति के अंदर छिपी प्रतिभा को जाग्रत कर कर्म के प्रति उत्साह एवं लगन की भावना पैदा करती है
३ प्रंशसा ऐसा जहर है जिसे अल्प मात्रा में ग्रहण किया जाना चाहिए क्योकि मिथ्या प्रशंसा कष्टप्रद होती है |
४ प्रशंसा करनेवाला व्यक्ति कठोर से कठोर हृदय को पिघलाने की शक्ति रखता है |
५ प्रशंसा की शीतल बौछारें हमारे अनदर जल्ती अग्नि को बुझाने का कार्य करती है |
६ प्रशंसक प्रशंसित को प्रशंसा के द्वारा उसका दिल जीत लेता है |
७ मूर्खों की प्रशंसा मूर्ख ही करते हैं |
८ पीठ पीछे की गई प्रशंसा सच्ची होती है |
९ जब कोइ महान या सर्वोच्च सत्ता पर बैठा व्यक्ति किसी छोटे व्यक्ति के कार्यों की प्रशंसा कर उसे पुरस्कृत करता है तो वह खुशी के मारे अहं का शिकार हो जाता है |
१० प्रशंसा उत्प्रेरक का कार्य करती है |

By | 2017-09-25T12:35:16+00:00 April 19th, 2011|Hindi Blog & Stories|1 Comment

About the Author:

Kalpana Dubey is a Passionate teacher of Hindi Literature for the last 20 years. She is dedicated to sharing the richness of hindi language and Indian culture to ignite young minds with potent knowledge and perspectives. She has written 3 books on Hindi Grammar used in the CBSE curriculum, and published 2 collections of short stories Kushboo; and Jarokha. Those who know her would agree that, to listen to her, is to experience a spell.

One Comment

  1. Pooja May 21, 2011 at 10:36 am - Reply

    Aajkal bahen jee apne poore jor pe hai…lagta hai chuttion ka poora laabh uthaya jaa raha hai….bahut chcha hai.

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