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पुरस्कारों की होड़ ने भरष्टाचार को बढावा दिया हैं -पक्ष

//पुरस्कारों की होड़ ने भरष्टाचार को बढावा दिया हैं -पक्ष

पुरस्कारों की होड़ ने भरष्टाचार को बढावा दिया हैं -पक्ष

पक्ष

उथली होती जा रही है,
आदमी की आत्मा,
यही हैं वेह समस्या जो,
सबसे अधिक कचोद्ती है.


भर्ष्टाचार पुरस्कारों की देन बन गया क्योकि आज उसकी नियति में फर्क गया है.हर वह चीज़ वेह प्राप्त कर लेना चाहता है जिसके वह योग्य नही है. इसके लिए वहसाम,- दाम, दुंदभेड़ किसी का भी पर्योग करने के लिए स्वतंत्र है . हर व्यक्ति इसबदती प्रतियोगिता की और वैसे ही बढता जा रहा है जैसे पतंगे शमा की और बड़ते हैऔर अपने पंखो को जला बैठते हैं . . एकाध ही पतंगा ऐसा होता है जो शमा का सामना कर सके .

आज खिलाड़ी शक्तिवर्धक दवाइयो का प्र योग कर या ग़लत तरीका अपना कर इन प्रतियोगिताओ को जीतना चाहते हैं. नतीजा अपमान और शर्म को ओड़ना पड़ता हैं.

एक कहावत हैंहर चमकीली वास्तु सोना नही होतीयही चमक व्यक्ति को गुमराहकर देती है इसका मुख्या कारन हैआत्म –vishwas और द्रण निश्चय की कमी . यदि व्यक्ति को अपने ऊपर विश्वास हो तो और उसके मन में दृढ़ता हो तो ये चमकते मैडल स्वयम उसके पास जायेंगे .

आज भर्ष्टाचार की मार झेल रहा समाज इस बात की प्रेरणा देता है बिना ग़लत तास्ताअपनाए काम हो ही नही सकता. इसी सोच ने लोगो को भरष्टाचार के रास्ते पर धकेलाहै.इसमे सहायक बनी है बदती प्रतियोगिता और बड़ते पुरस्कार .

आज कला , साहित्य , विज्ञान आदि के लिए भी विभिन् पुरस्कारों की घोषणा की जातीहै. कितने उचित व्यक्ति इन्हें प्राप्त करते हैं ?आए दिन होने वाले विरोध इस बात को प्रमाणित करते हैं कि कहीं न कहीं कुछ गडबड है | विश्व स्तर पर ये प्रतियोगिताएँ पारदर्शी होती हैं ,इसलिए प्रतियोगी गलत काम करते पकड़े जाते हैं |

By | 2017-09-25T12:50:07+00:00 June 4th, 2012|HIndi Debates|0 Comments

About the Author:

Kalpana Dubey is a Passionate teacher of Hindi Literature for the last 20 years. She is dedicated to sharing the richness of hindi language and Indian culture to ignite young minds with potent knowledge and perspectives. She has written 3 books on Hindi Grammar used in the CBSE curriculum, and published 2 collections of short stories Kushboo; and Jarokha. Those who know her would agree that, to listen to her, is to experience a spell.

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