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पहला मेकअप

///पहला मेकअप

पहला मेकअप

पहला मेकअप

गरमियों की छुट्टियाँ थी |मेरी ननद सपरिवार आयीं हुई थी |एक दिन पुरानी यादें ताजा करने के लिए शादी की एलबम निकाल ली |सभी तारीफ करने लगे -कितनी

अच्छी लग रही हो तुम इसमें {सब मेकअप का कमाल था |}किसने मेकअप किया था !{उस समय पार्लर में तैयार होने का रिवाज नहीं था |

ब्लैक -वाएट एल्बम बाबा आदम के जमाने की लग रही थी ,लकिन शादी की यादोँ से सभी तरो ताजा थे |मुझे भी एक रोचक घटना याद आ गई —-

मैंने शादी से पहले कभी मेकअप नहीं किया था |घर में नीविया कोल्ड क्रीम ,पोंड्स पौडर ,आवंला तेल, कोकोनट आयल ही मेकअप के सम्पूर्ण साधन होते थे |

मेरी बुआ रहीस परिवार में थीं | देश -विदेश घूमी हुई थीं |मेरे लिए वैनिटी केस में तरह -तरह का सामान भर कर ले आयीं | जल्दी -जल्दी में मुझे

सिखाया भी ,कि मेकअप कब कैसे करना है |

मैंने भी सोचा कि शादी के बाद मैं भी मेकअप करके रहा करूँगी | शादी के बाद मैं पूना चली गई ,पतिदेव वहीं पोष्टिड थे | एक दिन उन्होंने कहा —“तुम

तैयार रहना शाम को पिक्चर चलेगें | मुझे भी तैयार होने का मौका मिला | एक बार सारा मेकअप ऐसा थुप गया कि जाकर मुँह धो आयी |{स्वयं ही डर गई }

दुबारा फिर किया | काजल ,आई लाईनर ,रुज ,ब्लशर सब लगा कर तैयार हो गई | पतिदेव आए ,मुझे सजा देख कर मुस्कराए और हम पिक्चर चले गए |

पिक्चर थी “धरती कहे पुकार के ” वह कुछ रोने -धोने वाली थी | मैं भी रो ली | कुछ आंशु पोंछे ,कुछ नाक पोंछी | इंटरवल हुआ | पतिदेव ने कहा —

“तुम बैठो ,मैं अभी आया | कोकाकोला ,समोसे लेकर आए | हमने खुशी -खुशी खाए | हौल में अँधेरा था | पतिदेव ने कहा -“तुम टायलेट चली जाओ , साफ़ सुथरा

है “| मैंने कहा -“मुझे नहीं जाना ” उन्होंने फिर कहा चली जाओ ,साफ़ है ” मैंने सोचा चली ही जाती हूँ |

टायलेट में अपनी इंद्र धनुषी शकल देख कर घबरा गई | मेकअप रोने से अपना सौंदर्य खो कर वीभत्स हो गया था | थैंक गोड वहाँ कोई नहीं था |

मैंने जल्दी -जल्दी अपनी शकल पर पानी फेरा ,असली रूप देख कर तसल्ली हुई | लौटते समय आँखे झुकी थी ,जिन्होंने मुझे जाते हुए देखा था क्या वे मुझे खोज

रहे होगें |

चुप -चाप आकर पति के पास आकर बैठ गई |पिक्चर में मन नही लगा | जब खत्म हुई तो पति से आँखे नहीं मिला पा रही थी | उन्होंने धीरे से कंधे पर हाथ रखा

और मुस्करा दिए ,मैं पानी -पानी हो गई |

घर जाकर पहला काम किया कि सारा सामान वैनिटी केस में डाल कर ताला लगा दिया और मेकअप से तोबा कर ली |

……………………..

By | 2017-09-25T12:28:49+00:00 July 16th, 2011|Hindi Blog & Stories|2 Comments

About the Author:

Kalpana Dubey is a Passionate teacher of Hindi Literature for the last 20 years. She is dedicated to sharing the richness of hindi language and Indian culture to ignite young minds with potent knowledge and perspectives. She has written 3 books on Hindi Grammar used in the CBSE curriculum, and published 2 collections of short stories Kushboo; and Jarokha. Those who know her would agree that, to listen to her, is to experience a spell.

2 Comments

  1. Malti September 21, 2011 at 10:30 am - Reply

    didi…. aapne btaya ni kbi ki esa b kch hua ta…..

  2. neha July 16, 2011 at 10:31 am - Reply

    buaji………………apto aise hi bahut beautiful ho……………..

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