पत्र क्या है_…..पत्र के बारे में आज कुछ एसी पंक्तियाँ पढ़ीं कि दिल बाग -बाग हो गया और सोचा कि आप सब को भी यह आनन्दप्राप्त करने का अवसर दूँ –
पत्र क्या है ;मानो स्नेह के ऐसे पक्षी जो दूर -दूर से अपनों का प्यार लेकर आते हैं ;मेरे कमरे का चक्कर काटतेहैं और मन प्राण पर छा जाते हैं |जिस दिन ये आते हैं
इनकी चंचलता देखते ही बनती है |कभी मेरी टेबिल पर ऊधम मचाते हैं ;कभी सिरहाने छिप कर बैठ जाते हैं ;तो कभी जेब के घोंसले से उचक -उचक कर झाँकते
नजर आते हैं |मुझे तब तक चैन नहीं लेने देते ;जब तक मैं उनका जवाब न देदूं |किसी के खत का जवाब न देना मुझे ऐसे लगता है ;जैसे कोइ हमारे दरवाजे पर
आकर पुकारे और हम घर में होकर भी न बोलें |
राम नारायण उपाध्याय द्वारा लिखित हैं ये पंक्तियाँ |