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दोस्त -पक्ष

//दोस्त -पक्ष

दोस्त -पक्ष

आपने आज का अखबार पढ़ा
कल् के मुख्या समाचार पढे .
क्या सनसनी देखा.
गुडगाँव ए एक स्कूल में क्या हुआ?
क्यो हो गए चुप?

क्यों उतर आई निराशा आपकी आंखों में? कारन / सपष्ट है. ये सुब घटनाये उन दोस्तों की दस्ता बयां करती है जो हमारा आज वादविवाद प्रतियोगिता का विषय है. दोस्तदोस्त रहा . आए दिन घटने वाली इन घटनाओ ने मित्रो से विश्वास उठा दिया है. पता नही कौन सा दोस्त कब दुश्मन बन जाए. कभी कोई दोस्त थोड़े से धन के लिए ही किसी अपने दोस्त को मौत की नींद सुला देता है. तो कभी दोस्त मिल्क ही किसी अपने मित्र का अपहरण कर उसके मातापिता को गुमराह कर उनसे पैसे वसूलते है. जरा सी कहा सुनी पर ही गुडगाँव में ही एक दोस्त ने दुसरे दोस्त को गोली मार दी.आज विद्यालय विद्या का आलय नही आतंक का अड्डा बनते जा रहे हैं. माता –pita कब अपने बच्चे से वंचित हो जाए वेह नही जानते जब रक्षक ही भक्षक बन जाए तो किस पर भरोसा करे , किस पर नही. पता नही वे दिन कहाँ गए जब एक मित्र दुसरे मित्र की परेशानी को अपनी परेशानी समझता था . उसका दुःख अपना दुःख बन जाता था वे कहानिया वे किस्से जो दादीनानी से सुना करते थे वे कही लुप्त हो गए. है. कहाँ मिलेंगे अब सुदामा –krishan से दोस्त , कहाँ मिलेंगे अब कारन –दुर्योधन से मित्र.कहा जाता है जो विपति में साथ दे वाही सच्चा मित्र होता है. लेकिन जब मित्र ही विपति का कारन बन जाए तो उसे क्या कहे आज तो मित्र सिर्फ़ मतलब के रह गए है. जब तक उनकी स्वार्थसिद्धि होती रहती है तब तक ही मित्रता रहती है फ़िर वे गिरगिट की तरह अपना रंग बदल लेते है. आप सिर्फ़ अस्चार्य से देखते रह जाते है. और यही कहते रह जाते हैंपता नही इसे क्या हो गया है. “जब दोस्तों के बिच स्वार्थ की भावना जाती है तो दोस्तदोस्त नही रहता दोस्त ही क्या उस भावना पर तो सारे रिश्ते ख़त्म हो जाते हैं. इर्ष्या का भाव जब पनपने लगता है तो दोस्त दुश्मन नज़र आने लगता है. दोस्त ही सबसे बड़ा दुश्मन बन जाता है. उसकी जान ले लेना , उसका धन हड़प लेना , उसके घर वालो को गुमराह कर देना ही उनका काम रह गया है.
]प्रतिदिन बदलते इन हालातो ने दोस्तों पर से विश्वास ही हटा दिया है. यदपि यह सच है की बिना दोस्त के जीवन बड़ा ही नीरस और बेजान होता है. लेकिन दोस्ती के नाम पर आस्तीन में सौंप डालने से अच्छा तो है बिना दोस्त के रह जन .

कहाँ से लाये ऐसे दोस्त जो प्यार करें , सम्मान करे, सलाह करे, ग़लत रास्ते पर चलने से रोके , जो साथ दे और जीवन भर दोस्ती निभाए . नही मिलता ऐसा कोई ? क्यों हुआ ऐसा ——-? क्योकि दोस्तदोस्त रहा

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By | 2017-09-25T12:56:58+00:00 July 9th, 2009|HIndi Debates|0 Comments

About the Author:

Kalpana Dubey is a Passionate teacher of Hindi Literature for the last 20 years. She is dedicated to sharing the richness of hindi language and Indian culture to ignite young minds with potent knowledge and perspectives. She has written 3 books on Hindi Grammar used in the CBSE curriculum, and published 2 collections of short stories Kushboo; and Jarokha. Those who know her would agree that, to listen to her, is to experience a spell.

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