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दामिनी का बलिदान

///दामिनी का बलिदान

दामिनी का बलिदान

दामिनी की दमक कभी व्यर्थ नहीं जाती | वह अपनी लपलपाती चमक से सबको चमत्कृत कर ही जाती है |
कभी किसी इमारत पर गिरती है तो वह ध्वस्त हो जाती है ,कभी किसी हरे भरे वृक्ष पर गिरती है तो वह पल भर में समूल नष्ट हो जाता है |
२३ वर्ष की दामिनी का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा |उसने अपनी हिम्मत और जिजीविषा से डाक्टरों को भी हैरान कर दिया |
वह गई नहीं अमर हो गई |उसने मनुष्यों के भेष में घूमते दरिंदों को फांसी का रास्ता दिखाया है
औरतों को सही अर्थों में आजाद कराने का कार्य किया है |किसी भी कल्याणकारी कार्य की नीव बलिदानों पर ही टिकी होती है |
वह आज नीव का पत्थर बनी है | हो सकता, हो सकता है वह नीव के पत्थर की तरह दृष्टि से ओझल भी हो जाए लेकिन आजादी की [औरतो की ] इमारत ऐसी नीव पर खड़ी होगी ,यह कोई नही भूल सकता |चिंगारी ही दावानल पैदा करती है | यह चिंगारी अंगारा बन कर सब कुछ भस्म कर देगी |इससे बचने के उपाय करने आवश्यक है |अन्यथा अंजाम क्या होगा

By | 2017-09-25T12:17:03+00:00 December 29th, 2012|Hindi Blog & Stories|1 Comment

About the Author:

Kalpana Dubey is a Passionate teacher of Hindi Literature for the last 20 years. She is dedicated to sharing the richness of hindi language and Indian culture to ignite young minds with potent knowledge and perspectives. She has written 3 books on Hindi Grammar used in the CBSE curriculum, and published 2 collections of short stories Kushboo; and Jarokha. Those who know her would agree that, to listen to her, is to experience a spell.

One Comment

  1. richu chopra December 29, 2012 at 10:03 am - Reply

    Its high time now.. We need better criminal laws so that such kind of incidents should be take place in future.

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