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///जूते हो गये चोरी

जूते हो गये चोरी

प्रात: काल के अखबार ने सबकी आँखें ही नहीं खोली बल्कि उनमें आश्चर्य और परेशानी भी भर दी । सब हैरान ….. आखिर अचानक क्या हो गया ? एक ही रात में गाँव के दस –दस घरों में चोरी !कहीं कोई सुराग नहीं …..लूट पाट और हत्या भी नहीं । कौन ऐसा शातिर चोर है जिसने शहर में हड़कंप मचा दिया है । आज तो बस सबकी जवान पर एक ही बात है, एक ही चर्चा है । बच्चे –बूढ़े सभी हैरान और परेशान ….. क्या हो गया है हमारे इस शांति प्रिय गाँव और इस शहर को !इस शहर में बस मुट्ठी भर गाँव हैं । पहाड़ों के गाँव होते ही ऐसे हैं ….. दूर –दूर तक फैला हुआ प्राकृतिक सुंदर वातावरण ……पहाड़ों के बीच – बीच में बसे कुछ छोटे –छोटे गाँव और पतली –पतली छोटी क्यारियों में होती खेती…… हरी भरी जगह और शांति प्रिय लोग ….. बस ऐसे ही तो हैं हमारे गाँव । बड़े – बड़े शहरों की तरह यहाँ न सुबह से उठ कर भागमभाग की जिंदगी शुरू होती है और न हर आदमी दौड़ता – भागता नजर आता है ।

अपराध तो यहाँ होते ही नहीं हैं , कहीं – कहीं छुटपुट घटना के अलावा कुछ नहीं होता क्योंकि यहाँ अभी स्वार्थ और स्पर्धा ने अपने पाँव नहीं फैलाए

हैं , जीने की जद्दोजहद नहीं …..जो मिल गया , जो हो गया उसी में खुश …… शांति और सुकून में विश्वास करने वाले लोग हैं जो प्रकृति के आँचल में छुप कर अपने सभी मनोरथों को भुला बैठते हैं । प्रकृति का आँचल होता ही ऐसा है बिलकुल माँ के आँचल की तरह जिसमें शांति ,सुरक्षा प्यार और सुकून ही सुकून होता है । चैन की नीद और प्यार का आनंद होता है ।

मोची अंकल घबराए से दौड़ते हुए वैंकू के घर में घुसे और ज़ोर – ज़ोर से रोने लगे । वैंकू उन्हें ऐसे रोता देख कर घबरा गया । उसने अंकल को सँभलते हुए पूछा –

“ मोची अंकल क्या हुआ ? आप रो क्यों रहे हैं ?”

“ अरे बेटा जिसका डर था , वही हो गया ! मैंने तुम लोगों के लिए एक –एक जोड़ी जादुई जूते और बनाए थे …. उन्हे रख कर मैं बाजार सब्जी लेने चला गया । वापिस आकर खाना बनाया ,खाया और सो गया । कल सारा दिन बाहर के कामों में व्यस्त रहा ….. आज मैंने  उन जूतों को रखने के लिए बैग बनाया तो जूते गायब ….. बेटा जूते गायब हो गए …. उन्हें कोई चुरा ले गया । मुझे हमेशा इसी बात का डर रहता था की ये जूते किसी गलत व्यक्ति के हाथों में न पड़ जाएँ ….. अन्यथा कुछ भला होने की वजाय बहुत बुरा भी हो सकता है । बच्चो जो चीजें हमारे लिए लाभदायक होती हैं वे उतनी ही खतरनाक भी हो सकती हैं । यह व्यक्ति की सोच और उसके काम पर निर्भर करता है । “ सावधानी हटी और दुर्घटना घटी” यह तो सच हो गया । इन जूतों की सहायता से आप सब बच्चों ने कितने बड़े – बड़े काम किए ….. लोगों की जानें बचाई ,आतंकवादियो को पकड़वाया , देश हित के कार्य किए …… आज वही परेशानी का कारण बन गए हैं …… इन जूतो से बच्चों से गलत कार्य भी करवाए जा सकते हैं ।

“ लेकिन इन जूतों के बारे में किसी को पता कैसे चला होगा ?”वैंकू ने कहा

“बेटा किसी ने हमारी बातें सुन ली होंगी , या तुम लोगों की बातें सुन ली होंगी । आज तक खुले घर में भी किसी ने चोरी नहीं की । मैंने जूते एक बड़े से पत्थर के नीचे छुपा कर रखे थे फिर भी वे चोरी हो गए ……मोची अंकल ने अपनी शंका व्यक्त की ।

वैंकू ने अंकल को तसल्ली दी , मम्मी ने उन्हें चाय पिलाई । जब वे कुछ आश्वस्त हुए तो बच्चों ने कहा –

“अंकल हम सब इस परेशानी का हल भी निकाल लेंगे”

“ क्यों नही …. मुझे तुम लोगों पर भरोसा है ….तुम्हारी बुद्धि और चतुराई से तो मैं बहुत प्रभावित हूँ ……तभी तो तुम्हें जादूई जूते दिए थे ।

सभी बच्चों ने अपने माता – पिता के साथ बैठ कर इस विषय पर चर्चा की और उन्हों ने निश्चय किया कि हमें किसी भी हाल में जूते चोर का पता लगाना है ।

रुहिन ने कहा – “वैंकू …. गाँव में होने वाली चोरियों के पीछे कहीं उस चोर का ही तो हाथ नहीं है !

“तुमने ठीक कहा है रुहिन” वैंकू ने कहा

“गाँव में एक साथ इतनी चोरियाँ होना इस बात का सबूत है” तनुष ने भी अपनी राय व्यक्त की ।

हम लोगों को इन गतिविधियों पर ध्यान देना चाहिए …… इनका अध्ययन और मनन करना चाहिए आशीष ने सबको सतर्कता बरतने का सुझाव दिया ।

जैनी भी व्यग्रता से इधर – उधर चक्कर लगा रही थी ,जल्दी – जल्दी उसकी हिलती पूंछ उसकी चिंता और परेशानी को दर्शा रही थी । जैनी पशु होते हुए भी अपने साथियों की हर बात और उनकी हर हरकत से उनकी समस्या को समझ लेती थी । मूक प्राणी होने के कारण वह अक्षरश: व्यक्त तो नहीं कर सकती लेकिन वह अपनी भाव –भंगिमाओं से अपनी बात कहने में पूर्ण समर्थ थी ।

सच तो यह है कि प्यार की कोई भाषा नहीं होती । यह अनुभव की बात है ,शब्दों से अभिव्यक्ति की नहीं । इसे पशु –पक्षी भी समझ लेते हैं । तुलसी दास जी ने कहा है – “हित अनहित पशु –पक्षियु जाना” । मनुष्य कभी –कभी अपनी स्वार्थ पूर्ण प्रवृत्ति के कारण समझने में गलती भी कर सकता है लेकिन ये गलती नहीं करते क्योंकि इनकी सोच में स्वार्थ नहीं होता ।

बच्चे अभी आपस में मशवरा कर ही रहे थे कि गाँव में पुलिस के आने की खबर भी आग की तरह फ़ैल गई । बच्चों ने उचित मौका देख कर पुलिस अफसर को जूतों की चोरी की बात बताई ।

उन्हों ने कहा – “ पहले हम गाँव से गायब हुए बच्चों का पता लगते हैं । यदि किसी ने उनकी गुमशुदगी की शिकायत कराई होगी तो काम आसान हो जाएगा,अन्यथा सबका पता लगाना होगा ।

पुलिस ने जब चोरी की वारदातों का पता लगाया तो पता चला कि नगद रुपयों और सोना चांदी के अतिरिक्त कुछ भी चोरी नहीं हुआ । समान चोरी न होने से इस बात पर ही ज्यादा ध्यान गया कि इस चोरी में जूते चोर का ही हाथ हो सकता है ।

शहर के आस पास के थानों में भी वारदातों का पता लगाया गया । चोरी होना अब रोज की ही बात हो गई थी । अब तो दूर दूर के शहरों से भी चोरी की खबरें आने लगी थीं । पुलिस ,प्रशासन और जनता सभी परेशान …. चोर का कहीं पता नहीं चल रहा था । लोग रात –रात भर जाग कर पहरा देते फिर भी चोरी हो जाती । सभी बच्चों ने सोचा कि हम सब अलग –अलग क्षेत्र में जाकर बच्चों पर नजर रखें । वैंकू ,रुहिन ,तनुष ,आशीष दिन भर चोर की खोज में भटकते और रात को जादूई जूतों की सहायता से अदृश्य होकर अपना कार्य करते । एक दूसरे के साथ अपने अनुभवों को बांटते, और चोर का सुराग लगाने का प्रयत्न करते । रुहिन स्कूल भी जाती और वहाँ अपनी पैनी नजर भी जमाए रखती । एक दिन स्कूल के बाहर चाट बेचने वाली की लड़की बड़े ही सुंदर कपड़ों में चौकलेट खा रही थी और इधर –उधर गुड़िया सी फुदक रही थी । रुहिन ने उससे कहा – “कंचन तुम तो बहुत प्यारी लग रही हो ,तुम्हारा चौकलेट भी बहुत स्वादिष्ट है ….वाह !ये तो फाइव स्टार है ….मुझे भी खिलाओगी ….. ।

“मैं क्यों आपको दूँ …..मुझे तो यह कल्लू भैया ने दिया है ….वह बहुत अच्छे हैं …..मुझे रोज अच्छी चीजें देते हैं ।

“क्या तुम मुझे अपने कल्लू भैया से मिलवाओगी?”

“हाँ ….हाँ …वह छुट्टी के बाद आएगा ,तब मिल लेना” उसने खुश होकर कहा

रुहिन को जिज्ञासा हुई और वह छुट्टी के बाद उसका इंतजार करने लगी ।

छोटी कंचन ने रुहिन को कल्लू से मिलवाया । वह पास की पहाड़ियों से घिरे गाँव में रहता था । रुहिन ने उससे दोस्ती का हाथ बढ़ाया ….वह बहुत खुश हो गया । दूसरे दिन मिलने की बात कह कर वह चला गया । रुहिन ने अपने मित्रों को उसके  बारे में बताया । अगले दिन कल्लू रुहिन के आग्रह पर उसे अपने घर ले गया । छोटा सा घर था जैसे पहाड़ों में होते हैं । उसे कई पैक किए हुए डिब्बे भी वहाँ दिखे ….उसने कल्लू से उनके बारे में पूछा –

“ये पैकीट किसके हैं और कहाँ से आए हैं ?

“ये मैंने खरीदे हैं” कल्लू ने मुसकरा कर कहा

“इतने …..क्यों ? इनमें क्या है ?

“ मेरे पास बहुत रुपए हैं ….मैं कुछ भी खरीद सकता हूँ” कल्लू ने अकड़ते हुए कहा

“कुछ भी ….”रुहिन ने उसे उकसाया

“ हाँ …कुछ भी …वह जोश में कह गया ।

रुहिन की पैनी नजरें जादूई जूते ढूँढने का प्रयत्न करने लगी । उसने कल्लू को कुछ खाने के लिए लाने को कहा ….. वह जैसे ही बाहर गया ….. रुहिन ने कमरे की तलाशी ले डाली । उसने अलमारी के पीछे कपड़े में लिपटे जूते अपने बैग में रख लिए और शांति से उसका इंतजार करने लगी । कल्लू के द्वारा लाए खाने की उसने बहुत प्रशंसा की और जल्दी ही घर की राह पकड़ ली ।

रुहिन ने वैंकू और तनुष को सारी बात बता दी । वे पुलिस को साथ लेकर उसके घर पहुँच गए । पुलिस ने कल्लू को समझाया और अपने हथकंडों का प्रयोग किया तो कल्लू ने सारी बात उगल दी । उसने बताया कि  अपने दोस्त रमन के साथ उसने जूते चोरी किए थे

जब मोची अंकल को जूते मिलने की खबर मिली तो उनकी आँखों में खुशी के आँसू आ गए । उन्हों ने वे जूते लिए और बच्चों से भी जूते लिए और देखते –ही देखते उन्हे आग के हवाले कर दिया । बच्चों को बहुत बुरा लगा …..उन्हें उदास देख कर अंकल ने कहा – “बच्चो ! तुम स्वयं जादूई शक्ति रखते हो , यदि तुम सब अपने मन से और मेहनत से अपना कार्य करोगे तो तुम हमेशा सफल होगे । तुम सभी समझदार और समर्थ हो ….अब तुम्हें किसी भी प्रकार के जूतों की आवश्यकता नहीं ….अपनी शक्ति पर भरोसा होना चाहिए …. वही सबसे शक्ति है”  बच्चों ने तालियाँ बजा कर मोची अंकल की बात का समर्थन किया ।

शब्द –अर्थ

आग्रह – अनुरोध

मनन – विचार

मूक प्राणी – न बोलने वाला जीव

By | 2018-09-10T12:52:54+00:00 September 3rd, 2018|Jadui Joote|0 Comments

About the Author:

Kalpana Dubey is a Passionate teacher of Hindi Literature for the last 20 years. She is dedicated to sharing the richness of hindi language and Indian culture to ignite young minds with potent knowledge and perspectives. She has written 3 books on Hindi Grammar used in the CBSE curriculum, and published 2 collections of short stories Kushboo; and Jarokha. Those who know her would agree that, to listen to her, is to experience a spell.
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