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///शातिर वैज्ञानिक

शातिर वैज्ञानिक

सीमाओं पर वायरलैस के माध्यम से की गई रिकॉर्डिंग से अब यह स्पष्ट हो चुका था ,दुश्मन हमारे विज्ञान रिसर्च सेंटर – भावा एटोमिक रिसर्च सेंटर ट्राम्बे मुंबई (महाराष्ट्र ) को नष्ट करना चाहते हैं । भारत के इस अनुसंधान केंद्र से आए दिन होने वाले अनुसन्धानों से दुश्मनों की नीद उड़ गई है । विज्ञान के क्षेत्र में भारत की चहुंमुखी उन्नति से यह स्पष्ट हो गया है कि अब इसकी प्रगति को कोई नहीं रोक सकता ।

पड़ोसियों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए सीमाओं पर वायरलैस के द्वारा विभिन्न फ्रीक्वंसियों पर रिकॉर्डिंग की जाती है । जिसे प्रशिक्षित लोग सुनते हैं ।यदि उनमें कुछ सूचनाएँ या वार्तालाप संदिग्ध मिलते हैं तो उन्हें आगे भेज कर उचित कार्यवाही का निर्देश देते हैं । इन्ही सूचनाओं का निरीक्षण – परीक्षण करने पर सरकार ने भावा रिसर्च सेंटर की सुरक्षा के लिए उचित कदम उठाए । सूचनाएँ रेडियो पर भी प्रसारित की गई । जिससे जनता की भागीदारी सुरक्षा के क्षेत्र में हो सके ।

वैंकू ,तनुष ,रुहिन और आशीष ने भी यह सूचना सुनी और सभी बच्चों ने इस पर विचार विमर्श करने के लिए निश्चय किया । बच्चों के विशेष करतबों से प्रभावित होकर सरकार और सुरक्षा कर्मी भी समय –समय पर उनसे मशवरा कराते थे । बच्चों की वैज्ञानिक सोच और कार्य करने के जजबे से सभी खुश हो जाते थे।

नवंबर का महीना प्रारम्भ हो चुका था । वातावरण खुशनुमा था । दीपावली  की खुमारी अभी उतरी भी नहीं थी । ठंडे मौसम ने दस्तक दे दी । भारत के दक्षिणी तट पर भी मौसम परिवर्तन का असर दिखाई देने लगा था । अब लोग स्वेच्छा से बाहर आने लगे थे । सुनहरी धूप सबको अच्छी लगाने लगी । काले बादलों का साया कहीं दूर छुप गया था ।

भारत का अभिमान भावा रिसर्च सेंटर के आस – पास ड्रोन को उड़ते देखा गया । ड्रोन वगैर पायलिट के उड़ाने वाला हवाई जहाज है , जो फोटो लेने और आवाजों को रिकॉर्ड करने का बेहतरीन कार्य करता है । पल भर में गायब हो जाने वाले ड्रोन को जब लोगों ने देखा तो भयभीत हो गए । विचार करने लगे निश्चय ही यह हमारे अनुसंधान क्षेत्र के लिए खतरनाक है । वैंकू ,तनुष ,रुहिन और आशीष अपने कार्य में लग गए । उन्हों ने जरूरत का समान तो रखा ही साथ ही एक, ड्रोन की विशेष योग्यता प्राप्त विशेषज्ञ को भी अपने साथ लिया ।

अंधेरा होते ही बच्चे विशेषज्ञ के साथ मुंबई की ओर उड़ चले । रात में मुंबई नगर बहुत ही खूबसूरत लग रहा था । वे इसे निहार रहे थे और खुश हो रहे थे । गेट वे ऑफ इंडिया जो भारत का प्रवेश द्वार है ,ऊंचा सिर किए खड़ा था । दूर तक फैला हुआ समुद्र मुस्तैदी से भारत के तटों की सुरक्षा में लगा था । ऊंची –ऊंची उठती लहरें यह संदेश देती हैं कि यहाँ प्रवेश करना सरल नहीं ,उसे प्रवेश के लिए उद्दत लहरों से टकराना होगा । भारत का तटीय क्षेत्र कितना खूबसूररत है इसे दिन में ही नहीं रात में भी देखा जा सकता है । रात में चमकती लाइट ऐसी प्रतीत होती है जैसे उन्हों ने मुंबई नगरी को गहनों से सजा दिया हो , जिससे वह सज कर इतरा रही है । यहाँ के बौलीबुड से कौन परिचित नही है ! सारा संसार हमारे बौलीबुड के अभिनेता और अभिनेत्रियों का दीवाना है । इतने योग्य और संस्कारी लोग कहाँ मिलेंगे । बच्चों के वे आदर्श होते हैं । सभी बच्चे उनसे मिलने को लालायित रहते हैं ।एक दबी छुपी लालसा हमारे इन बहादुर बच्चों के मन में भी थी । रुहिन ने धीरे से कहा –

“समय निकाल कर क्या हम लोग फिल्म सिटी चल सकते हैं”

आशीष ने छेड़ा –

“क्यों नहीं !हम तो आज फिल्म सिटी के लिए ही निकले हैं !”

वैंकू ने जल्दी से कहा –

“हाँ –हाँ क्यों नहीं …..पर पहले काम ….फिर ….. मनोरंजन”

तभी ड्रोन की मद्दिम आवाज उन्हें सुनाई दी । सारे बच्चे एकत्र हो गए और अगले कदम के लिए विशेषज्ञ की ओर देखने लगे । उन्होने ड्रोन के और नजदीक जाने का इशारा किया । उसमें लगे कैमरे और अति संवेदनशील रिकॉर्डरों के बारे में जानना चाहते थे, जिससे वे उचित कदम उठा सकें । पास पहुँचने पर तनुष और वैंकू तो ड्रोन के ऊपर ही आ गए और उन्होंने अपनी लंबी बेल्टों से उसे फँसाने की कोशिश की । विशेषज्ञ ने उसके कैमरों से समझ लिया कि उसे कैसे रोका जा सकता है । उन्हों ने अपने यंत्र से नीली और बैंगनी रंग की ऐसी रेज़ छोड़ी जिससे ड्रोन की गति रुक गई । उसके इंजन में कुछ खड़ –खड़ सी हुई और वह पृथ्वी की ओर गिरने लगा ।

बच्चों ने सोचा कि गिर कर तो यह नष्ट हो जाएगा फिर इसकी खूबियाँ और खामियाँ हमारे लिए रहस्य ही रह जाएंगी । उन्होने उड़ाने वाले जूतों की मदद से उसे जल्दी से रस्सियों से जकड़ लिया और चरो दिशाओं से शक्ति से पकड़ लिया । विशेषज्ञ ने इसमें उनकी सहायता की । चमकते जूतों के प्रकाश में वे उसे नीचे ले आए ।

अनुसंधान क्षेत्र के कर्मचारियों को बताया गया ।लोग तुरंत वहाँ आ गए । विशेषज्ञों की निगरानी में उसे रखा गया । बच्चे अभी भी आसमान में चक्कर लगा रहे थे । जिससे कोई समस्या आए तो वे उसके बारे में विशेषज्ञ को बता सकें । थोड़ी देर में उन्हे एक दूसरा ड्रोन आकाश में दिखाई दिया । शायद पहले वाले ड्रोन की खोज में वह भेजा गया था । बच्चो ने उसे अपनी गिरफ्त में ले लिया । उसे रस्सियों से जकड़ लिया और उसके बारे में विशेषज्ञ को बताया । बच्चों की बहदुरी पर सब हैरान और मंत्र मुग्ध थे ।

एक नही दो –दो ड्रोन वे पकड़ चुके थे । प्रात: काल होने वाला था । बच्चों को याद था कि सूर्य की पहली किरण के साथ ही जादूई जूते उनका साथ छोड़ देंगे । इसलिए वे जल्दी ही नीचे की ओर चल पड़े । विशेषज्ञों की निगरानी में जब ड्रोन को देखा गया तो विशेषज्ञ भी हैरान रह गए । वह ड्रोन तो इतने पावरफुल कैमरों से लैस था कि पास की तो क्या वह परकोटों में रखे गई वस्तुओं की पिक्चर भी वे दूर से ले सकते थे । दुश्मनों को इससे हमारे अनुसंधान की बहुत ही अहम जानकारियाँ मिल जाती जो हमारे लिए खतरनाक साबित होती । कैमरों के अतिरिक्त उनमें कैमीकल वायरस के विभिन्न आकारों में बैग भी थे जो ड्रोन के टूटने पर वातावरण में फैल कर उसे विषाक्त कर देते । आस – पास के सभी क्षेत्र उसके प्रभाव में आकर भारी जन हानि हो सकती थी । दुश्मन की ये चाल थी कि यदि किसी भी हाल में ड्रोन को कुछ नुकसान होता तो वह हमारा उससे ज्यादा नुकसान कर सकता था । उसे सुरक्षित उतारने से हम सब हम सब उसके खतरनाक प्रभाव से बच गए ।

विशेष वैज्ञानिकों की सहायता से कैमिकल वायरस को सुरक्षित रखा गया,जिससे उन अन्य परीक्षण किए जा सकें । जब उसके द्वारा खींचे फोटो (तस्वीरें )देखी गईं तो देखा, कोई ऐसा क्षेत्र और मशीन नहीं थी जिसका फोटो न हो ।एक महान अनुसंधान क्षेत्र को समाप्त करने की सम्पूर्ण जानकारियाँ वहाँ उपलब्ध थीं ।

ड्रोन जहां प्रगति के लिए एक वरदान है वहीं वह दूसरों की जानकारी लेकर उसे बरवाद करने के लिए काफी है । ड्रोन बिना पायलिट के कार्य करता है इसलिए इसके द्वारा किसी भी प्रकार का रिस्क (जोखिम)लिया जा सकता है ।

बच्चो के साहस और देश प्रेम ने आज एक नया कार्य किया जिसे बड़े –बड़े लोग न कर सके । अनुसंधान क्षेत्र के विशेषज्ञों और कर्मचारियों ने उनका विशेष आभार व्यक्त किया । बच्चे तो बच्चे होते हैं, वे ड्रोन के द्वारा ली गई तस्वीरों में इतने तल्लीन थे कि यह भी नहीं देखा कि बाहर कितने लोग उनसे मिलने के लिए आए हुए थे । दुश्मनों के छकके छुड़ा दिए उन्होंने । अब तो दुश्मनों को इनसे बचाने की युक्ति सोचनी होगी जो नामुमकिन है ।

ड्रोन से प्राप्त फोटो और रिकॉर्डिंग से हमारे देश को बहुत फायदा हुआ …. विशेषज्ञों की सलाह से सुरक्षा के लिए उचित कदम उठाए गए । दुश्मन की सही पहचान हो गई । चाहे दुश्मन इस बात को माने न माने । अपनी तरफ से सावधानी रखनी अति आवश्यक है । कैमीकल वायरस (विषाणु )बहुत ही खतरनाक होते हैं । ये वर्तमान की ही नहीं भविष्य की पीढ़ी को भी नष्ट कर देते हैं ।

भावा अनुसंधान के प्रशासक ने बच्चों को सम्मानित किया और कहा –

“किसी बड़े कार्य के लिए बड़ी उम्र की आवश्यकता नहीं ……छोटे –छोटे बच्चे भी कितना बड़ा कार्य कर सकते हैं । यह आप लोगों के सामने है ।जरूरत है विशेष जजवे और कर्मठता की । आज इन बच्चों ने हम सब की जान बचाई है । सभी बच्चों की परवरिश ऐसी होनी चाहिए कि वे निर्भीक होकर आगे बढ़ सकें । बच्चों के अच्छे कार्यों में न सिर्फ उनका उत्साह बढ़ाएँ बल्कि उनके इस कार्य में उनकी सहायता भी करें । बच्चों में अपार क्षमताएं छुपी होती हैं । जरूरत है उन्हे समझने और उभारने की । इस कार्य को शिक्षक और माता पिता मिल कर करें तो परिणाम बहुत ही अच्छा होगा । उदाहरण हमारे सामने है ।

भाषण अभी चल ही रहा था । ड्रोन की खबर आग की तरह शहर में फैल चुकी थी । विभिन्न स्कूलों के बच्चे अपने इन बहादुर साथियों से मिलने के लिए बेचैन थे । हजारों की संख्या में बच्चे बाहर जमा हो चुके थे । उनके शोर से उत्साह और उल्लास झड़ता हुआ प्रतीत हो रहा था । वैंकू ,तनुष ,रुहिन और आशीष भी बच्चों से मिलने को उत्सुक थे । सबने मिल कर जो हँगामा मचाया कि सारी थकान कहाँ गायब हो गई ,पता ही नहीं चला ।

शब्द – अर्थ

अनुसंधान – रिसर्च (नई खोज )

जजवा – जुनून

कैमीकल वायरस – रासायनिक विषाणु

By | 2018-09-10T12:57:21+00:00 September 3rd, 2018|Jadui Joote|0 Comments

About the Author:

Kalpana Dubey is a Passionate teacher of Hindi Literature for the last 20 years. She is dedicated to sharing the richness of hindi language and Indian culture to ignite young minds with potent knowledge and perspectives. She has written 3 books on Hindi Grammar used in the CBSE curriculum, and published 2 collections of short stories Kushboo; and Jarokha. Those who know her would agree that, to listen to her, is to experience a spell.
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