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///ओली मे रोपकर

ओली मे रोपकर

टी वी पर रोप वे पर चलने वाली रोप कार के दुर्घटनाग्रस्त होने का समाचार आ रहा था। कुछ टी वी चैनल वालों ने उन यात्रियों के परिवार वालों को भी ढूंढ निकाला था । ये दुर्घटना जोशीमठ से औली जाने के रास्ते में घटी थी । गर्मियों में यह क्षेत्र पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र होता है ।  हरी भरी वादियों के बीच घूमने का किस मन नहीं करेगा । यही कारण है कि यहाँ के प्राकृतिक सौंदर्य का लुफ्त उठाने के लिए इस केवल कार (रोप कार ) को घनी वादियों से होते हुए जोशीमठ से औली तक शुरू किया गया था । पर्यटक इसका भरपूर मजा ले रहे थे । आज यह दुखद घटना घटित हो गई । अभी तक इसके कारणों का पता नहीं चला है ।

टी वी पर इसके बारे में सुन कर सभी लोग हैरान और परेशान थे । उन यात्रियों के रिश्तेदार अपनों को याद करके रो रहे थे और सरकार से जल्दी कार्यवाही करने का आग्रह कर रहे थे । उनकी सुरक्षा के लिए दुआएं मांग रहे थे । वैंकू और उसके दोस्त – रुहिन,  तनुष और आशीष सभी बहुत परेशान थे इस समाचार से, पास ही खड़ी उनकी हमदर्द जैनी पूंछ हिला रही थी । रुहिन तो समाचार देख कर रो रही थी । वैंकू ने कहा –

“ रुहिन तुम रोओ मत हम लोग कुछ करते हैं, उन्हें बचाने के लिए”

“हाँ –हाँ रोने से कोई काम नहीं होता, करने से होता है” आशीष ने कहा

सब उसकी ओर देखने लगे कि यह क्या करने वाला है । उसने आगे जाकर टी वी बंद कर दिया और सब से कहा “ अब चलो “

बाहर जाकर वे विचार कर रहे थे कि आगे क्या करें !…… उन्होंने देखा कि जैनी एक नीचे की ओर जाने वाली पगडंडी पर तेजी से बढ़ी जारही है । सभी बच्चे आश्चर्य करने लगे कि जैनी उधर अकेली क्यों जा रही है । वैंकू ने उसे बहुत आवाजें दी जैनी ………..जैनी ……. कम सून …….. उसने मुड़ कर देखा, लेकिन आई नहीं,  और वह उधर ही चलने लगी जिधर से जा रही थी । रुहिन ने कहा –

“ हमें जैनी के साथ जाना चाहिए क्योंकि वह कभी ऐसे नहीं जाती” सभी बच्चे पग डंडी पर दौड़ पड़े । ये बच्चे एक छोटी सी पहाड़ी पर बने घरों में रहते थे । आपसी समझ ने उन्हें अच्छा दोस्त बना दिया । वे एक गुट बना कार खेलते और कार्य करते थे । जल्दी ही दौड़ कर उन्होंने जैनी का साथ पकड़ लिया । जैनी एक आदमी के पीछे –पीछे जा रही थी । उस आदमी की बढ़ी हुई सफ़ेद दाढ़ी थी । आँखों पर गोल फ्रेम का चश्मा था,  वह लंबा सा चोंगा और ऊंचा पजामा पहने था । वह कुछ बड़बड़ाता हुआ अपनी ही मस्ती में चला जा रहा था । बच्चे भी उसके पीछे चलने लगे । कुछ और नीचे उतरने पर वह व्यक्ति एक बड़े लेकिन चपटे पत्थर के पास जाकर रुका …. उस पत्थर को एक तरफ खिसका कर उसके पीछे बनी गुफा में घुस गया । उसके पीछे बच्चे भी उस गुफा में घुस गए ।अंदर उन्हों ने देखा कि वह आदमी लैंप की रोशनी में जूते बना रहा था । बच्चों को देख कर पहले तो वह घबरा गया फिर उसने सोचा “अल्लाह कुछ करवाना चाहता है, नहीं तो ये फरिश्ते क्यों आते ! आज तक कोई यहाँ नही आया” । वह मुसकरा कर धैर्य से बात करने लगा । तनुष ने पूछा “यह आप कैसे जूते बना रहे हैं ?”

उसने गौर से बच्चों को देखा फिर बहुत ही शांत और गंभीर स्वर में बोला –

“मैं ये जादूई जूते बना रहा हूँ । मुझे मेरे मौलवी ने एक जादुई शक्ति दी है जिससे मैं ये जादुई जूते बनाता हूँ, लेकिन मैं इनका प्रयोग स्वयं नहीं कर सकता । मेरे मौलवी ने कहा था कि ये जूते पहन कर,  पहनने वाला मन चाही दिशा में और ऊंचाई में उड़ सकता है, लेकिन इनका प्रयोग कोई मनोरंजन के लिए करेगा तो इनकी शक्ति खतम हो जाएगी और इनका प्रयोग किसी की भलाई के लिए किया जाएगा तो ये अपना पूर्ण चमत्कार दिखाएंगे लेकिन इनका प्रयोग सूर्यास्त से लेकर सूर्योदय तक ही किया जा सकता है फिर इनकी शक्ति क्षीण हो जाती है । मुझे आज तक कोई ऐसा नहीं मिला जिन्हें मैं ये जूते दे सकूँ । सभी बच्चे आश्चर्य से उस मोची की बातें सुन रहे थे । वैंकू ने कहा –

“हम इनका सही उपयोग करेंगे, आपये जूते हमें दे दो,  लेकिन ये जूते मेरे सभी दोस्तों को चाहिए तभी तो हम इनका सही उपयोग कर सकेंगे”

मोची हैरानी से बोला – “ हाँ मैं सबको दूँगा”

“जैनी को भी” सारे एक साथ बोल पड़े

“ क्या कुत्ते को भी जूते पहनाओगे” मोची मुसकरा कर बोला

“ क्यों नहीं! जब वह हमारे जैसे कार्य करेगी तो उसे भी तो उड़ने की जरूरत पड़ेगी” वैंकू ने जैनी को प्यार कराते हुए कहा ।

“ हाँ,  बात तो सही है …..”उसने सिर हिलाते हुए कहा …..मैं कुछ करता हूँ …..और उसने अपना समान निकाला फिर छोटे –छोटे चार गोल जूते बना दिए ।

अभी सूर्यास्त होने मेन थोड़ी देर थी । बच्चों ने मोची से कहा –

“ हम चल कर थोड़ी तैयारी करते है,  फिर अपने मिशन पर निकलेंगे …..आप जूते दे दीजिए ….. हम कल वापिस कर देंगे । मोची उन्हें जूते देकर बहुत खुश हुआ क्योंकि आज उसकी बनाई वस्तु से किसी का भला होने वाला है । उसने बच्चों को उनके नाप के जूते दिए  और दुआ की –

“ अल्लाह, इन बच्चों को अपनी ताकत और बुद्धि से नवाजना, इनको वह शक्ति देना जिससे ये अपने मिशन में कामयाब हों । हे खुदा अपना हाथ इन पर रखना”।

सभी बच्चे वापिस घर आए ….और उन्होंने जल्दी –जल्दी गरम कपड़े पहने …अपने साथ कुछ जरूरी सामान – एक लंबी रस्सी, टॉर्च, बिस्कुट और छोटी कुल्हाड़ी तथा कुछ अन्य सामान एक बैग में भरा और अपने मिशन पर निकल पड़े। अंधेरा होने वाला था । जैनी भी उनकी उत्सुकता में उतनी ही शामिल थी । वैंकू, रुहिन, तनुष और आशीष ने अपने –अपने जूते पहने । जूते नीचे की तरफ से ऐसे चमक रहे थे जैसे उनके तले में किसी ने एल ई डी बल्व लगा दिए हों । उनके चमकते जूते देख कर,  जैनी भी उनके आगे – पीछे चक्कर लगाने लगी । वैंकू ने उसे पकड़ा और रुहिन ने उसे गोल –गोल जूते तमगे से बांध कर पहना दिए । अभी वे विचार कर ही रहे थे कि बाहर निकलते ही वे उड़ने लगे । पहले तो बच्चे डर ही गए, फिर तनुष ने उन्हे जूतों के ऊपर लगे बटन से उनकी उड़ान को कम –ज्यादा करना बताया । आशीष चिल्लाया –

“वाह ! क्या मजा आ रहा है …..हम भी चिड़ियों की तरह उड़ सकते हैं,  वह भी रात में …..कितना मजा आ रहा है …..वैंकू ने उसे टोका और कहा –

“मस्ती मत करो ….याद है ….उसने क्या कहा था –यदि इनका उपयोग अपने मनोरंजन के लिए किया तो इनकी शक्ति समाप्त हो जाएगी” ।

सब एकमत हो कर अपने कार्य के बारे में विचार करने लगे । वे अपनी उड़ान बढ़ा कर शीघ्र ही पहाड़ी पर पहुँच गए । अद्भुत दृश्य था ! चाँदनी के मद्दिम प्रकाश में सम्पूर्ण पहाड़ियाँ अपना रहस्यमय रूप दिखा रही थीं कहीं हरियाली दिखाई दे रही थी तो कहीं उसकी अंतहीन परछाइयाँ डरा रहीं थीं । बहादुर बच्चे बिना समय गुजारे खाई में विचरण करने लगे जिससे वे पर्यटकों को देख सकें । उन्हे जैनी के भौंकने की आवाज सुनाई दी,  सभी दोस्त उधर ही चल पड़े । रुहिन तो पलक झपकते ही जैनी के पास पहुँच गई । उसने देखा पूरी एक रोप कार उधर पेड़ों के बीच में पड़ी थी । उसके यात्री अचेतावस्था में थे, सभी बच्चों ने उन्हें बहार निकाला, इसके लिए उन्हें कुछ झाड़ियाँ भी काटनी भी पड़ी । तनुष और आशीष दोनों मिलकर उन्हे ऊपर ल रहे थे वैंकू और रुहिन यात्रियों को बाहर निकालने और ढूँढने का कार्य कर रहे थे । जहां से इस रोप कार पर लोग बैठते थे वहाँ पर रेस्कू टीम के लोग सहायता करने के लिए मौजूद थे । संकरी जगह में हैलीकोप्टर जाना मुश्किल था और अंधेरे की वजह से वे लोग सुबह होने का इंतजार कार रहे थे । जब उन्होंने तनुष और आशीष को लोगो को वहाँ लाते देखा तो हैरान हो गए और वे पूछने लगे – तुम कैसे उड़ रहे हो ? तनुष ने कहा –“ हमारी बात बाद में सुनना, पहले इन लोगों को जल्दी से जल्दी चिकित्सा सुविधा दिलवाइए । यात्रियों को उनके हवाले कर वे तुरंत खाई में ओझल हो गए । कुछ छोटे बच्चे भी थे जो घायल तो इतने नहीं थे लेकिन इस घटना से ज्यादा भयभीत हो गए थे और लगातार सुबक रहे थे । तनुष तो दो –दो  बच्चों को एक साथ ऊपर ल रहा था । आशीष भी ऐसी ही कोशिश कार रहा था । इधर वैंकू और रुहिन ने और भी यात्रियों का पता लगा लिया था । पूरी रात बच्चे बिना थके बिना रुके इस कार्य में लगे रहे । सुरक्षा दल के लोग भी इनकी फुर्ती और शक्ति देखा कर आश्चर्य चकित हो रहे थे । आकाश में हल्की लालिमा फैलने लगी थी । बच्चे और भी जल्दी –जल्दी कार्य कर रहे थे, वे डर रहे थे कि यदि सूर्योदय हो गया तो वे फिर इन यात्रियों को ऊपर न ले जा सकेंगे । उनकी कार्य करने की तीव्रता और बढ़ गई । सूर्य की पहली किरण के साथ ही वे अपने कार्य को पूर्ण कर चुके थे । पाँच कारें रोप टूटने से खाई में गिर गई थी । सभी यात्री सुरक्षित बचा लिए गए थे ।

चारों ओर बच्चों के ही चर्चे थे । जब मीडिया में ये बात पहुंची तो वे बच्चों के उड़ने की बात जानने के पीछे पड गए लेकिन वैंकू ने यह कह कर कि यह हमारी व्यक्तिगत बात है, इसे जानने का प्रयत्न न करें । प्रधान मंत्री ने स्वयं उन्हे मिलकर धन्यवाद दिया । जब मोची ने उन बच्चों को टी वी पर देखा तो उसकी खुशी का ठिकाना न रहा।

शब्द – अर्थ

ओझल – गायब होना

हवाले – सुपुर्द

सुबकना – धीरे – धीरे रोना

By | 2018-09-10T12:53:28+00:00 September 3rd, 2018|Jadui Joote|0 Comments

About the Author:

Kalpana Dubey is a Passionate teacher of Hindi Literature for the last 20 years. She is dedicated to sharing the richness of hindi language and Indian culture to ignite young minds with potent knowledge and perspectives. She has written 3 books on Hindi Grammar used in the CBSE curriculum, and published 2 collections of short stories Kushboo; and Jarokha. Those who know her would agree that, to listen to her, is to experience a spell.
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