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///अद्भुत सौन्दर्य

अद्भुत सौन्दर्य

आज टी वी पर बार – बार दिखाए जाने वाले वीडियो से सबका खून खौल उठा । बच्चे तो जोश में आकर खुद ही कार्यवाही करने पर उतारू हो गए । घर के बड़ों ने उन्हें समझाया और समय आने पर उचित कदम उठाने की बात की । हिंदुस्तान का जवान जो अपनी वीरता और शौर्य के लिए संसार से लोहा मनवा चुका है , उसका अपमान देश कैसे बरदास्त करे । मुश्किल तो यह है कि जवान भी हिन्दुस्तानी है और अपमान करने वाले भी । कश्मीर भारत का अखंड अंग है । कुछ आतंकवादी और कुछ अवसर वादी इसको खूनी जमा पहना कर अपना स्वार्थ सिद्ध कराते हैं । कहते हैं एक मछली सारे तालाब को गंदा करती है ऐसे ही कुछ लोग जो आतंकवादियों के हाथों की कठपुतली बन गए हैं , वे देश के लिए बहुत बड़ी समस्या बन गए हैं । न दोस्तों में न दुश्मनों मे ,कैसा व्यवहार करें इनके प्रति ! ये सत्य को न पहचान कर बहकावे में आ गए हैं और अपने ही सुरक्षा कर्मियों पर पत्थर बरसा रहे हैं ,उन्हें अपमानित कर रहे हैं , उन्हें गालियाँ दे रहे हैं ,मर रहे हैं ,उनके हैलमेट खींच रहे हैं और ………इतने सब के बावजूद भी ये जवान हँस कर चले जाते हैं । ये इनकी हिम्मत और सहनशीलता का प्रमाण है । भौखलाते तो वे हैं जिनका दिल और दिमाग खाली होता है । ये भारत के जवान हैं , जिनके पास शौर्य ,धैर्य ,हिम्मत और सहनशीलता की अपर सम्पदा है । वे समय और परिस्थिति को देख कर , समझ कर ही वार करते हैं । युद्ध में भी जो धर्म और नीति के अनुसार कदम उठाते हैं । उन्हें ये लोग क्या बरगला पाएंगे ! जो युद्ध भूमि में भी दुश्मन को पानी पिलाते हैं , ऐसे हिन्दुस्तानी जवानों की बराबरी कौन कर सकता है ! समर्थ होते हुए भी जो शस्त्र नहीं उठाते ,बलवान होते हुए भी हाथ नहीं उठाते ,ऐसे देश से शांति कितने दिनों दूर रह सकती है ।

हमारे देश के अखंड भाग कश्मीर को आतंक का अड्डा बनाने वाले ऐसे लोग एक दिन अपने किए पर बहुत पछताएंगे । ये वही काम कर रहे हैं  – जिस डाली पर बैठे हैं उसी को काट रहे हैं , अभी वे अंजाम से वाकिफ नहीं ,लेकिन जिस दिन सत्य का उद्घाटन होगा तब कहीं मुँह छुपाने को जगह नहीं मिलेगी ।

वैंकू ,रुहिन ,तनुष और आशीष ने अपनी भावनाओं को सयंमित किया और अपना सामान लेकर अपने मिशन की कामयाबी के लिए जुट गए । हमारे देश में जम्मू – कश्मीर ही प्रकृति के खूबसूरत स्थान नहीं हैं बल्कि हिमालय की सम्पूर्ण पर्वत शृखलाओं से घिरा सारा भारत ही प्रकृति की अद्भुत दैन हैं । भारत का उत्तरी क्षेत्र सुंदरता का अपर भंडार है । डोडा ,पूञ्छ राजौरी ऐसे खूबसूरत स्थान हैं जिनकी सुंदरता निहारते हुए कभी जी नहीं भरता । ये क्षेत्र आज आतंकवादियों के कारण निर्जन और बेजान हो गए हैं । प्रकृतिक सम्पदा से भरपूर ये क्षेत्र पर्यटकों का इंतजार कराते रहते हैं , लेकिन कुछ लोगों की वजह से इस नैसर्गिक सौन्दर्य से सभी वंचित रह जाते हैं ।

इस सुंदरता की वजह से इन्हे मिनी स्विटजरलैंड कहा जाता है । आतंकवादियों के नापाक इरादों ने इन क्षेत्रों को लोगों से वंचित कर दिया है । यहाँ के गैस्ट हाउस ,होटल सभी सूने पड़े रहते हैं । बच्चे अपने मोची अंकल के पास जा पहुंचे ।उनकी सलाह और आशीर्वाद लेकर उन्हों ने प्रस्थान किया । रात के अंधेरे में वे अपने चमकते जूतों के सहारे से उड़े जा रहे थे । ऊंचे – ऊंचे देवदार के वृक्षों के ऊपर से गुजरते हुए उन्हें अद्भुत रोमांच हो रहा था । पहाड़ों में हर समय चलाने वाली हवा गुनगुना कर उनका स्वागत कर रही थी । जब वे पीरभदरेस्वर के ऊपर से गुजर रहे थे तो सैकड़ों छोटी –बड़ी घंटियाँ अपने मधुर स्वर से आवाहन कर रहेन्न थी कि अब हमें इस खून खराबे से मुक्ति दिलाओ । वे देख रहे थे कि हमारे जवान किस मुस्तैदी से देश की सीमाओं की रक्षा कर रहे थे । उनके मस्तक उनकी कर्मठता के सामने झुक गए ।नवीनतम यंत्रों की सहायता से वे रात के समय भी काफी स्पष्ट देख सकते थे । उन्हें पाकिस्तान की ओर से भी वहाँ के सैनिकों का दीदार हुआ लेकिन कुछ दूरी पर ही उन्हें सिर से पैर तक ढके हुए कुछ साए दिखाई दिए । उनहों ने लंबे –लंबे चोंगे पहन रखे थे ,सिर पर लंबी टोपियाँ और चहरे कपड़े से ढके हुए थे । इंसानी आकार के अलावा और कुछ भी जानना संभव नहीं था । अभी बच्चे उन्हें ध्यान से देख ही रहे थे कि वे नदी के किनारे गायव हो गए । शायद उन्हों ने कोई गुप्त रास्ता या गुफा छुपने के लिए बना राखी होगी । बच्चे अभी विचार कर ही रहे थे कि पूरव में लाली छाने लगी और उन सबने अगला कदम उठाने के लिए दिन का इंतजार करना ही मुनासिब समझा ।

वे कुछ करने के विचार से घूम रहे थे कि एक पहाड़ी पर बने हुए एक हौल ने उन्हें आकर्षित किया। वैसे देखने को इच्छुक थे । एक आर्मी के अफसर ने उन्हें इस स्मारक के बारे में बताया ।

“ हौल ऑफ फेम”नाम से मशहूर यह इमारत एक स्मारक है । इमारत के आगे एक लॉन है ,जिसके मध्य में काले पत्थर से बनी एक प्रतिमा है । जिसमें छ्ह जवान अपने हथियारों के साथ तिरंगे को उठाए हुए हैं । यह हमारे जवानों की वीरता और देश भक्ति का प्रतीक है । सन बासठ की लड़ाई में जो उस क्षेत्र के सैनिक और स्थानीय निवासियों के बलिदान गाथा का प्रतीक है । स्मारक स्तम्भ पर इनके नाम अंकित किए गए हैं । पाकिस्तान ने काबाइलियों के नाम पर अपनी सेना के द्वारा आक्रमण किया था । बहुत रक्त बहा इस युद्ध में, स्थानीय लोगों ने इसमें जी जान से सहयोग दिया और अपना बलिदान दिया । इस कुरवानी को लोग आज भी याद करते हैं और सराहते हैं कि उनके सहयोग और प्रेम की वजह से ही इस युद्ध में पाकिस्तान को अपने मुंह की खानी पड़ी । इस कार्य में न सिर्फ आदमियों का बल्कि वहाँ की बहादुर नारियों ने भी विशेष योगदान दिया । उनके नाम भी इस स्मारक पर आज भी चमक रहे हैं ।

वैंकू ,तनुष ,रुहिन और आशीष ने बहुत सी जानकरियाँ  हासिल कीं और इस सुंदर स्मारक को नमन कर आगे चल पड़े । आर्मी अफसर ने उन्हें बताया कि यहाँ एक एक ऐसी अद्भुत जगह है जिसे देख कर आप अचंभित रह जाएंगे । सारे बच्चे इस जगह को देखने के लिए लालायित हो उठे । अफसर ने कहा – “ हमारे लिए यह समय भी उपयुक्त है , यहाँ का नजारा हम दोपहर में दो बजे से तीन बजे के बीच ही देख सकते हैं । इस जगह का नाम “नूर ए छम्म” है । बच्चों के आग्रह पर मेजर चोपड़ा विशेष  सुरक्षा के साथ बच्चों को लेकर चल पड़े । करीब एक घंटा बीस मिनिट के बाद उनका जोंगा एक बहुत ही पतले रास्ते पर चल पड़ा , इसे पगडंडी कहना ही बेहतर होगा । चलते चलते एक संकरी जगह पर जोंगा खड़ा करके पैदल ही करीब पंद्रह मिनिट चले फिर वे एक पहाड़ी के नीचे उतरने लगे । अभी वे करीब आधा किलोमीटर नीचे उतरे होंगे कि वे एक अद्भुत दृश्य को देख कर वे वहीं पर खड़े रह गए । ऊपर की पहाड़ी से अनवरत झरना बह रहा था , वहाँ से पानी एक छोटी से पहाड़ी पर गिरता और एक गहरी खाई में फैल जाता । इस समय सूर्य बिलकुल उसके सामने होता जिससे उसका प्रकाश इन पानी की बूंदों पर परावर्तित  हो कर बिखर जाता और वह खाई अद्भुत प्रकाश से भर जाती । इंद्रधनुष उस खाई में उतर आता । ऐसा प्रतीत होता जैसे इंद्रधनुष को किसी ने पकड़ कर इस खाई में कैद कर दिया हो । अद्भुत और अलौकिक नजारा होता है यह !प्रकाश के रंगों का बहुत ही सुंदर और मनमोहक परावर्तित रूप, जैसे प्रिज्म से किसी ने रंगों को बिखेर दिया हो । जब तक सूर्य का प्रकाश वहाँ पर रहता है , वह खाई रंगों से भरी नजर आती है । इस दृश्य को देखने के लिए वहाँ पर काफी लोग आ जाते हैं । काश !यह नजारा हमारे सभी पर्यटक देख पाते । बाहर के लोग भी देखते कि हमारे देश को प्रकृति ने कैसे – कैसे संवारा है । आतंकियों की वजह  से यहाँ पर लोग आने की हिम्मत नहीं कर पाते । यहाँ के निवासी कहते हैं कि हिंदुस्तान की मलिका नूरजहां इस सुंदर जगह पर स्नान किया करतीं थीं, इसलिए इस जगह का नाम “ नूर ए छ्म्म” पद गया । कुछ लोगों का कहना है कि यहाँ पर भगवान के रूप (नूर )के दर्शन होते हैं इस लिए यह ‘नूर ए छ्म्म” कहलाया । लोग चाहे जो कहें वास्तव में यह इतना सुंदर है कि जो इसे एक बार देख लेगा वह कभी नहीं भूल पाएगा ।

बच्चे इस सुंदर दृश्य में लीन ही थे कि जैनी की तेज – तेज भौंकने की आवाज आई । उन्हों ने चारों ओर नजर दौड़ाई तो देखा कि जैनी जिन लोगों पर भौंक रही थी वे लंबे – लंबे चोंगे पहने हुए थे । आर्मी अफसर ने अपने साथ आए लोगों को वायरलैस से संकेत किया । कुछ ही देर में उन्हे एक निश्चित दूरी रखते हुए घेर लिया गया । सूर्य पहाड़ों के पीछे गया कि चारों ओर अंधेरा छा गया । पहाड़ों में जल्दी शाम ढल जाती है । बच्चे भी अंधकार होते ही सतर्क हो गए ।

आस पास के लोग कानाफूसी करने लगे और जलदेए ही वहाँ से गायब हो गए । आशीष का संकेत पाकर सबने अपने जूते पहने और इस खूबसूरत वैली में उतर गए ,लेकिन अब वहाँ रंगीन प्रकाश नहीं अंधकार था । सुनसान क्षेत्र देख कर आतंकी अब चार से चालीस हो गए थे । वे आर्मी की गाड़ियों पर अंधाधुंध फायरिंग करने लगे । जवान वहाँ से छुप कर पोजीशन ले चुके थे । जैसे ही वे कुछ शांत हुए बच्चों ने उन्हें लंबी रस्सियों के जाल में फांस कर वैली में खींच लिया । अब वे अपनी जान बचाने के लिए चिल्लाने लगे अदृश्य हो जाने वाले जूतों की वजह से उन्हों ने उनके हथियार छीन लिए । आतंकी भूत –प्रेत के डर से चिल्लाते रहे और बच्चे उनकी दहशत का मजा लेते रहे ।

शब्द – अर्थ

बरगलाना – बहलाना

नैसर्गिक – प्राकृतिक

दहशत – डर , भय

By | 2018-09-10T12:58:34+00:00 September 3rd, 2018|Jadui Joote|0 Comments

About the Author:

Kalpana Dubey is a Passionate teacher of Hindi Literature for the last 20 years. She is dedicated to sharing the richness of hindi language and Indian culture to ignite young minds with potent knowledge and perspectives. She has written 3 books on Hindi Grammar used in the CBSE curriculum, and published 2 collections of short stories Kushboo; and Jarokha. Those who know her would agree that, to listen to her, is to experience a spell.
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