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///ताजमहल की सुरक्षा

ताजमहल की सुरक्षा

जब से टी वी पर लंदन की संसद पर आतंकी हमले की कोशिश की खबर आई तब से वैंकू और उसकी टीम विशेष तैयारी में जुट गई , क्योंकि उसी दिन से यह सूचना भी बार – बार आ रही है कि  अब आई स आई स के निशाने पर ताज महल है । ताज महल जो भारत की शान है , संसार की आश्चर्यजनक इमारतों में से एक है और जो प्यार और प्रेम का प्रतीक है। अब आतंक वादियों के निशाने पर है । ताजमहल हमारी आन – बान – शान है, इसकी तरफ बुरी निगाह से देखने वालों को हम छोड़ेंगे नहीं । हाँ , देखने सराहने का आमंत्रण हम हर किसी को देते हैं लेकिन हम इस पर किसी प्रकार की आंच न आने देंगे ।

वैंकू और उसकी रेस्कू टीम ने ताजमहल की रखवाली का प्रण किया और वे सभी अपने प्यारे मोची अंकल के पास पहुँच गए । मोची अंकल तो उन्हें देखते ही खिल उठते हैं जैसे वे हर क्षण उन्हीं की प्रतीक्षा में रहते हैं । बच्चे भी नए उत्साह और उमंग से भर जाते हैं । मोची अंकल से सभी ने अपने जादुई जूते लिए और साथ में अंकल का ढ़ेर सारा प्यार और आशीर्वाद भी लिया । जैनी भी पूंछ हिला कर और शेक हैंड के लिए अपना हाथ बार – बार उठा रही थी । अंकल ने इस बार जूतों के तले में रंग – बिरंगे चमकदार छोटे बल्व लगाए थे , जो विभिन्न प्रकार से अपनी चमक बिखेरते थे । कभी एक साथ चमक कर तेज प्रकाश पैदा करते , कभी एक ही रंग के बल्व जलते और कभी बारी – बारी विभिन्न रंग के जलते । सारे बच्चे बहुत खुश हुए क्योंकि ये बल्व उन्हें दीपावली की याद दिला रहे थे । इससे वे कभी भी इसका मजा ले सकते थे ।

बच्चों ने निश्चित किया कि वे रात भर ताजमहल की रक्षा करेंगे जिससे दुश्मन को कोई मौका न मिल सके । दिन में तो अन्य सुरक्षार्थी भी इस कार्य में मुस्तैदी से लगे रहते हैं ।

वैंकू ,रुहिन , आशीष और तनुष ने अपना – अपना कार्य पूर्ण किया और वे प्रतिदिन सूर्य ढलते ही आगरा की ओर चल पड़ते और सूर्य उदय से पूर्व घर आ जाते । जब वे आकाश में विचरण कर रहे थे तब रुहिन ने पूछा –

“आगरा में तो और भी भव्य इमारतें हैं ,इनके बारे में लोग ज्यादा नहीं जानते”

“तुम सच कहती हो” तनुष ने कहा

“यहाँ का लाल किला , फतहपुर सीकरी , दयाल बाग में राधा स्वामियों का मंदिर बहुत ही सुंदर है । इसकी नक्काशी देख कर तो लोग दंग रह जाते हैं । दीवारों पर पत्थरों की नक्काशी अद्भुत है । यहाँ उकेरे गए फूल ,अंगूर की बेल , करेले की बेल विभिन्न प्रकार की सुंदर डिजाइन देखते ही बनती हैं । जो इसे देखता है देखता ही रह जाता है ,वहाँ से हटाने को मन नहीं करता । इस मंदिर की एक और विशेषता है कि इसमें कार्य निरंतर चलता रहता है । इसका विशाल प्रांगण अद्भुत और सौन्दर्य से भरपूर है”

“तुम ये सारी बातें कैसे जानते हो”? रुहिन ने पूछा

“ मैं अपने मित्रों के साथ इसे देखने गया था”

“चलो हम लोग भी चल कर देखें” आशीष ने सुझाव दिया।

“अभी हमारा कार्य कुछ और है ….. हम घूमने नहीं आए …. बहुत बड़ा उत्तर दायित्व है हमारा” वैंकू ने उन्हें याद दिलाया ।

फ़तहपुर सीकरी को सम्राट अकबर ने बनवाया और इसे अपनी राजधानी बनाया तनुष ने उन्हें बताया

यह शहर से काफी ऊँचाई पर स्थित है । इसमें शेख सलीम चिस्ती की दरगाह भी है जिसके आशीर्वाद और मन्नतों से जहाँगीर का जन्म हुआ था । उसे सलीम के नाम से भी लोग जानते हैं । लोग आज भी उसकी दरगाह पर मन्नतें मांगते है और वहाँ पर धागा बांध कर उसे पूरी होने की कमाना करते हैं

“अरे वह ! हम भी वहाँ चल कर मन्नत मांगते हैं” रुहिन ने प्रसन्न होकर कहा

“आज नहीं ,कल दिन में यह कार्य किया जा सकता है” आशीष ने पुन: उन्हे टोका

“ तुम्हें पता है ! यहाँ पर सिकंदरे आजम अकबर की समाधि भी है”

“ क्या ! मैं तो सोच रही थी कि वह तो दिल्ली में होगी” रुहिन ने कहा

“नहीं मथुरा की ओर से आगरा में प्रवेश करते समय बाएँ हाथ की ओर जो सुंदर इमारत दिखाई देती है ,वही अकबर की समाधि है । इसे लोग आज अपभ्रंश रूप में “सिकंदरा” के नाम से जानते हैं ।

“सिकंदरा” मतलब सिकंदरे आजम जो अकबर की विशेषता को उजागर करता है” ।

“इसका मतलब सम्राट अकबर ने यहाँ काफी वक्त गुजारा है” आशीष ने उत्सुकता से पूछा

“हाँ , लगभग सोलह साल ,फ़तहपुर सीकरी को तो उन्होने राजधानी बनाया था लेकिन जहाँगीर की बगावत के बाद उन्हों ने दिल्ली को फिर से अपने राज्य की राजधानी बनाया । भौगोलिक दृष्टि से यह कदम ठीक ही था ।

“क्यों”

“क्योंकि राजधानी यदि राज्य के बीच में स्थित हो तो व्यवस्था ठीक से हो सकती है”

“अच्छा ,तुम्हें राज्य व्यवस्था का काफी जानकारी है” सारे मिलकर तनुष को चिड़ाने लगे

“हाँ , तुम्हें जानकार हैरानी होगी यहाँ के ललकिले में शाहजहाँ को नजरबंद करके रखा गया था ।

“क्यों”

औरंगजेब ने तख्त पर कब्जा करके अपने पिता को कैद में डाल दिया था ।  जब उन्हों ने ताजमहल को देखने की इच्छा प्रगट की तो औरंगजेब ने एक छोटा सा शीशा (लगभग पच्चीस पैसे के आकार का ) इस तरीके से लगवाया कि उसमें ताजमहल दिखाई देता है ।

“क्या बात है ! इसे तो हम भी देखेगे” सारे एक साथ बोले

ताजमहल को यदि शरद पूर्णिमा की रात में देखें तो अलौकिक अनुभूति होती है । संगमरर की चमक उस चांदनी रात में अद्भुत छटा बिखेरती है । आकाश में बिखरी चाँदनी और यमुना के तट पर दूधिया आभा बिखेरता ताज बहुत ही आकर्षक और खूबसूरत लगता है । यह चमकता संगमरर उस समय मकराना से मंगवाया गया था । इस सुंदर ताजमहल को बनने में बीस वर्ष का समय लगा था । इस के निर्माण में करोड़ों रुपए खर्च हुए थे । इसको बीस हजार मजदूरों ने अपने हुनर से सजाया और संवारा था । कहा जाता है कि इसको सजाने वाले कारीगरों के हाथ कटवा दिए गए थे जिससे ऐसा ताजमहल दूसरा न बन सके । इस नायाब इमारत के पीछे बहुत सी कहानियाँ दफन हैं ।

आज भी सैकड़ों की संख्या में देश – विदेश के पर्यटक इसे देखने के लिए आते हैं । इसे देखे बिना उनकी भारत की यात्रा सम्पूर्ण नहीं होती ।

फ़तहपुर सीकरी का बुलंद दरवाजा अपनी ऊंचाई के लिए एशिया में प्रसिद्ध है । अकबर ने इस दरवाजे पर अपने विचारों के अनुकूल बातों को लिखवाया था –

“यह संसार एक पुलिया है, यहाँ रुकने का विचार मत करो ,यहाँ से गुजर जाओ” सम्राट अकबर के ये विचार संसार की निस्सारता को प्रकट कराते हैं । उन्हों ने सभी धर्मो को समान समझने की बात कही और सभी धर्मों के निचोड़ से “दीन्हे इलाही” नाम का धर्म स्थापित करने की कोशिश की जिसे उस समय के कट्टर धर्म पंथियों ने चलने नहीं दिया । जन्म के साथ ही इसका इंतकाल हो गया ।

“तुम तो अकबर की जीवनी ही सुनने लगे” वैंकू ने उसे टोका

“अरे ! ये चमकते स्टार सा कुछ इधर ही आ रहा है” वैंकू ने बच्चों को सतर्क करते हुए कहा

सभी बच्चे उस ओर उड़ चले । उन्हों ने देखा कि एक चौपड़ (हेलीकॉप्टर)जैसा विमान उधर ही आ रहा है । उसमें से ही विभिन्न प्रकार की रोशनी निकल रहीं थीं । बच्चो ने उसे चारों ओर से घेर लिया । जब उन्हों ने उसके अंदर झांक कर देखा तो दंग रह गए । उसे कोई व्यक्ति नहीं एक प्रशिक्षित बंदर चला रहा था । बच्चों ने अपनी रस्सियों की सहायता से उसे चारों ओर से जकड़ लिया और धीरे –धीरे नीचे उतार लाए ।

नीचे सुरक्षा कर्मी , पुलिस के प्रशिक्षित लोग , फायर ब्रिगेड के लोग चुस्त और चौकस खड़े थे । बच्चों ने चौपड़ को उनके हवाले किया । यह चौपड़ विभिन्न प्रकार के वायरलैस और कैमरों से युक्त था

आवश्यक परीक्षणों के लिए उसे विभिन्न विभागों के सुपुर्द किया गया । सभी लोगों ने बच्चों के साहस और कार्यों की भूरि – भूरि प्रशंसा की । सूर्योदय हो चुका था अब तो रात को ही वापिस जाना संभव हो सकेगा तो अब क्या करें ? रुहिन ने पूछा

“ हाँ , भाई गाइड तनुष तुम्हीं बताओ” वैंकू ने कहा तो सारे बच्चे हंस पड़े ।

“ चलो आज दिन का फायदा उठाते हैं और यहाँ का प्रसिद्ध पेठा और दालमोठ का मजा लेते हैं” तनुष की सलाह पर सब सहमत हो गए ।

“ यहाँ का पेठा भारत में ही नहीं ,विदेशों में भी चाव से खाया जाता है” आशीष ने कहा

“अच्छा , अब तुम शुरू हो गए …… बड़ी मुश्किल से तनुष को चुप कराया है” रुहिन ने हँसते हुए कहा

“ भाई , मुझे तो खाने – पीने की चीजें ही याद रहती हैं”

आशीष ने पेट पर हाथ फिरते हुए कहा

“पेटू कहीं का ….” रुहिन ने छेड़ा

“ अरे !अरे! …… सुनो तो  यहाँ पेठे की आपको चार सौ से ज्यादा बैरायटी मिलेगी

“तुम्हें कौन सा पसंद है ?” वैंकू ने पूछा

“मुझे तो केसर युक्त पेठा ही सबसे ज्यादा पसंद है ।

“क्यों ?”

“यह जल्दी खराब नहीं होता …..इसका केसर का स्वाद ठंडक प्रदान करता है और खुशबू भी लाजवाब होती है । इसे मम्मी व्रत में खाती है, इसमें अन्न जो नहीं होता ।

“फिर हम सब इसे लेकर चलेंगे”

“ चलो चलें …..”

“ कहाँ जा रहे हैं आप लोग ?” वहाँ के एस पी ने पूछा

“ पेठा लेने …..”

“हम यहीं मंगा देंगे ….उन्हों ने मुसकरा कर कहा

“ नहीं ….हमें स्वयं घूमना है”

“ और ….खाना है” रुहिन ने चुटकी ली

सब उसकी शरारत पर मुसकरा दिए ।

शब्द – अर्थ

प्रशिक्षण – ट्रेनिंग

अपभ्रंश – बिगड़ा हुआ रूप

व्रत –उपवास

By | 2018-09-10T12:57:56+00:00 September 3rd, 2018|Jadui Joote|0 Comments

About the Author:

Kalpana Dubey is a Passionate teacher of Hindi Literature for the last 20 years. She is dedicated to sharing the richness of hindi language and Indian culture to ignite young minds with potent knowledge and perspectives. She has written 3 books on Hindi Grammar used in the CBSE curriculum, and published 2 collections of short stories Kushboo; and Jarokha. Those who know her would agree that, to listen to her, is to experience a spell.
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