गर्व से हिंदी बोलो गर्व से हिंदी बोलो हम सब भारतीय है |हमें अपनी भाषा पर नाज है |हिन्दी साहित्य का भंडार अपार है |संसार का सर्वश्रेष्ठ साहित्य है |सुर कबीर ,तुलसी ,मीराबाई ,रैदास .चैतन्य जैसे भक्त कवि यहाँ हैं तो मतिराम घनानंद ,विद्यापति जैसे श्रंगार रसिक कवि हैं |जयशंकर प्रसाद ,महादेवी वर्मा ,सुमित्रा नंदन पन्त ,सूर्य कान्त त्रिपाठी निराला जैसे छायावादी कवि हैं| दिनकर ,मैथिली शरण गुप्त ,जय शंकर प्रसाद जैसे राष्ट्र वादी कवि है| सर्वेश्वर दयाल ,केदार नाथ ,धूमिल ,नागार्जुन ,जगदीश चन्द्र ….आदि जैसे अनेक कवि हैं ,वह साहित्य कितना सम्रद्ध होगा यह सहज ही अंदाज लगाया जा सकता है|

कवि ही नहीं यहाँ महान विचारकों की भी कमी नहीं है | महावीर प्रसाद दुवेदी ,हजारी प्रसाद दुवेदी ,महादेवी वर्मा ,सच्चितानंद हीरानंद वात्सायन अगेय,विष्णु प्रभाकर ,आदि जैसे चिन्तक हैं |प्रेम चंद ,सुदर्शन ,सियाराम शरण गुप्त ,गुलेरी जैसे कहानी कार्हैं |

हिन्दी साहित्य सिर्फ कहानी ,उपन्यास ,कविताओं का भंडार नहीं है ,अपितु यह हमारी संस्कृति की धरोहर है ,यह आध्यात्म और निर्वाण का रास्ता दिखाता है |जीवन का दर्शन कराता है |जीने की राह दिखाता है | ऐसे साहित्य को पाकर कौन धन्य न हो जाएगा ………..!