उमंगें ,इच्छाएं ,जिज्ञासाएँ सिर उठाने लगी

कल्पनाओं में विचरण ,मैं करने लगी |

कामनाएँ यूँ बलवती होने लगी

आकाश में बदली ज्यूँ  घिरने लगी |

हाथ स्वत: ही खुलने लगे

कुछ लेने को बाँहे तरसने लगी

हर बच्चे का आनन मचलने लगा

नया रूप रंग उसमें भरने लगी |

हर रात सपने में कोई आने लगा

पालने की डोरी मैं थामें रही

हाथ फैला के उसको बुलाने लगी

उमंगों का दामन संभाले रही |

कभी राम सा ,कभी बलराम सा ,
कभी कृष्ण की छवि मैं निहारती रही
कभी राधा सी ,कभी मीरा सी
कभी गार्गी की कल्पना करती रही |

कभी मनु सी ,कभी रति सी

कभी शकुंतला में अक्श ढूढती रही

कविता सी उड़ानें भरती रही

कभी जल में रही ,कभी अंबर में उडती रही |

छोटे – छोटे टोपे -मोज़े मुझको लुभाने लगे

लाल ,नीले ,पीले परिधान भाने लगे

नन्हे बूटों में पांव नजर आने लगे

पूत के पाँव पालने में दिखने लगे |

भवतव्यता प्रबल है यह लगने लगा

नन्हे हाथों की लकीरें लुभाने लगी

गजानन की बुद्धि याद आने लगी

कान्हा की करतूत भाने लगी |

बच्चों की नामावली मन में मचलने लगी

नए नामों पर ध्यान सबका जाने लगा

कभी अधुनातन रुचे ,कभी पुरातन रुचे

सभी नामों की सूची बनने लगी |

हरि के हजार नाम लाख नाम कृष्ण के

शंकर पद्म नाम सहस्र नाम विष्णु के

कौन सा रखूं नाम , समझ कुछ आता नहीं

पोता है या पोती , यह अभी पता नहीं |

बैकुंठ हो या बैकुंठी हो ,काव्य हो या कविता हो

सौम्य हो या सौम्या हो ,अक्षत हो या नक्षत्रा हो

इति हो या अदिति हो ,आदि हो या अनन्त हो

जैसा भी हो ,प्यारा सा वह अपना हो

नित नई आशाओं नए मुझ में नव रंग भरा

सतरंगी हो गई दुनिया ,सर्वत्र अनोखा प्यार भरा

वैसे तो सब ही प्यारे हैं पर ये ” आगन्तुक” कुछ निराले हैं

दिन -रात हमें गुदगुदाते हैं ,करतव ही अजव निराले हैं |

हर पल यह जिज्ञासा रहती -कैसा होगा ,कब होगा

जन्म तो विधि हाथ है ,जैसा होगा -अच्छा होगा

हम तो बस यह जानते -वह सबसे प्यारा होगा

वह प्यार हमारा होगा ,वह जान हमारी होगा |

पल -पल गिनते कटती घड़ियां

हर -पल भरती जीवन में निधियां

हम -सब तुम्हारी बा ट जोहते

आओं जल्दी ……..आ आओ न !