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आस्था के रंग

///आस्था के रंग

आस्था के रंग

बात उन दिनों की है जब मेरे पति अस्पताल में थे |बहुत बीमार थे | उन्हें हार्ट अटैक पड़ा था | ऑपरेशन के बाद आई .सी .यु में थे |डा. कुछ जवाब नही दे रहें थे |उनका एक ही जवाब होता ….अभी कुछ नही कह सकते |मैं अपने बेटों के साथ रात से आई सी यु के बाहर बैठी हुई थी |पल -पल दिल की धड़कनें बढती जा रही थी |अंदर से कुछ आश्वाशन नही मिल रहा था |हम एक दूसरे को पकड़े नि:शब्द बैठे थे |हम ऐक -दूसरे की धडकनो को स्पष्ट सुन सकते थे |मैं उठ कर वाशरूम गई हाथ धोते समय मेरी नजर सामने लगे आएने पर पड़ी ,मेरे माथे पर बिंदी नहीं थी |मेरी साँस उखड़ रही थी ,पैर कांप रहे थे | आखों के सामने अँधेरा हो गया |  मैं वहीं बैठ गयी |पता नहीं कितनी देर …….सम्भावित समाचार को सुनने की हिम्मत नहीं हो रही थी |बच्चोँ का खयाल आया |हाथ से वाश-वेसिन पकड कर उठी ,दूसरे हाथ का सहारा लिया |अचानक जो देखा उससे बिजली सी कोंध गयी ……हाथ -पैरों में जान पड़ गयी |अंधी आँखों में रोशनी भर गयी ,हजारों दिए एक साथ जल उठे मेरी बांह पर लाल बिंदी चमक रही थी |जो माथे से पता नही कब बांह पर लग गयी थी |उस नन्ही सी बिंदी ने मुझे हौसला दिया |मेरी ईश्वर के प्रति आस्था और गहरी कर दी |मुझे यह विश्वास हो गया कि अब मेरे पति ठीक हो जाएगे | मैं जब बाहर आई तो बेटे को बाहर खड़ा पाया |उसने मुझे आलिंगन में लेते हुए कहा ,” मम्मी ,पापा खतरे से बाहर हैं ” अभी -अभी”  डा . ने कहा |हाँ बेटे मुझे मालूम है| उस छोटी बिंदी ने मेरे जीवन में इंद्र धनुषी रंग भर दिए थे |

By | 2017-09-25T12:16:05+00:00 April 30th, 2015|Hindi Blog & Stories|7 Comments

About the Author:

Kalpana Dubey is a Passionate teacher of Hindi Literature for the last 20 years. She is dedicated to sharing the richness of hindi language and Indian culture to ignite young minds with potent knowledge and perspectives. She has written 3 books on Hindi Grammar used in the CBSE curriculum, and published 2 collections of short stories Kushboo; and Jarokha. Those who know her would agree that, to listen to her, is to experience a spell.

7 Comments

  1. Deepti Vishwakarma (tuli) October 27, 2015 at 12:37 pm - Reply

    No words to describe her……….gem if a person

  2. Urvashi October 27, 2015 at 10:06 am - Reply

    Ma’am u r simply great….I really feel blessed that I am a student of yours…aaj bhi muhje yaad hai ki aap kahtey thae ki Hume jeene ke liye khaana chahiye, khaane ke liye nahi…..sometimes words cannot express our immense gratitude towards a person. Today I m facing short of words to xpress my immense love n respect that I have from you right from the time I appeared in your first class. In this competitive world where every person thinks abt minting money your main aim was to deliver quality education. You had that spirit that brings the best out of student. You gave me the required motivation to move ahead in life. You taught to just work hard and appear in the exams without worrying abt the result. I really thank you from the depth of my heart for being there. You were and you will be always my inspiration.

  3. gulshan September 23, 2015 at 7:16 am - Reply

    this web portal is nice.

  4. arvind June 6, 2013 at 9:53 am - Reply

    sach mein mam bahut sunder

  5. Administrator June 1, 2013 at 9:54 am - Reply

    ज्योति और मीनाक्षी बहुत बहुत धन्यवाद .तुम लोगों का सहयोग ही तो मुझे लिखने को बाध्य कर्ता है|

  6. amarjyot May 31, 2013 at 9:54 am - Reply

    as usual mam meri prerna…………..no more words

  7. Minakshi Pharswal May 31, 2013 at 8:52 am - Reply

    sachme mam, aap kitna acha likhte ho! aap se hi prerna le kar m aaj yaha tak pahunch pai hu. thank you for making me what i m today!

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