अन्तिम शब्द

महा पुरुषों के अन्तिम शब्द आप्त वचनों की तरह याद किए जाते हैं | यद्यपि कोई व्यक्ति यह सोच कर नहीं बोलता कि ये उसके अन्तिम शब्द होंगे | अन्तिम शब्द

कभी जीवन का सार बन कर प्रकट होते हैं तो कभी व्यक्ति का मनोविश्लेषण करते हुए प्रतीत होते हैं | अन्तिम शब्द ब्रह्म वाक्य के समान होते हैं | कानून में भी

किसी व्यक्ति के अन्तिम बयान को सत्य माना जाता है | ये अन्तिम शब्द उद्धार करने वाले भी बन जाते हैं | सदन कसाई ने पुत्र मोह में ” नारायण -नारायण “पुकारा

तो यम दूतों ने उसे भगवान का अनन्य भक्त समझ कर स्वर्ग का रास्ता दिखाया |

धार्मिक पुस्तकों में कहा गया है कि अंत समय में ईश्वर का नाम बड़े ही पुण्य कर्मो से निकलता है |इसके लिए वैराग्य व अभ्यास की बात कही गई है |

तुलसी दास जी ने कहा है ——

“कोटि -कोटि मुनि जतन कराई ,

अंत राम कह आवत नाहीं ||”

गांधी जी के अन्तिम शब्द ” हे ! राम थे “|यह इस बात का प्रमाण है कि उनका जीवन वैराग्यमय था और वे सच्चे भक्त थे | लोग जीवन भर यह

प्रयत्न करते हैं कि अन्तिम शब्द भगवान को स्मरण करने वाला हो ———

“हरि नाम हो जवां पर जब प्राण तन से निकले ,

श्री गंगा जी का तट हो , मेरा सांवरा निकट हो ….

जब प्राण तन से निकले ……..”अनूप जलोटा का यह भजन तन -मन मुग्ध कर देता है |

कबीर दास जी ने कहा है —–

“स्वांस -स्वांस में हरि भजो ,व्यथा स्वांस मत खोय |

ना जाने इस स्वांस का आवन होय न होय ||”

मनुष्य का जीवन क्षण – भंगुर होता है ,पता नहीं कब यह जीवन रूपी बुलबुला अपना सौन्दर्य बिखेर कर नष्ट हो जाए | इसलिए प्रति क्षण -प्रति पल हर शब्द सोच

समझ कर बोलना चाहिए कि न जाने कब कौन सा वाक्य किसके साथ अन्तिम वाक्य बन जाए ,फिर शेष जीवन में उससे मुलाकात हो न हो |

हर व्यक्ति अपने परिवार , मित्रों तथा संबंधियो के लिए महान होता है | जब किसीऐसे  व्यक्ति की बात की जाए जिसने संसार छोड़ दिया हो तो हर व्यक्ति को उसके

साथ कहे अन्तिम शब्द अवश्य याद होंगे जो उसने जाने अनजाने में उसने अन्तिम भेंट में बोले होंगे |

ये अन्तिम शब्द किसी के लिए “टीस “न बने , किसी को बेचैन न करें , दुखी न करें इसलिए इस बात को याद रखें कि पता नही कौन से शब्द कब किसके

साथ अन्तिम हो जाएँ | हर शब्द की गरिमा को पहचाने ,उनके महत्व को जाने और ऐसी बात कहे जो ओरों के लिए प्रेरणा दाई हो , मार्ग प्रशस्थकरने वाले हों | अन्तिम

शब्द शरीरांत की तरह अन्तिम न हों ,वे आत्मा की तरह अमर हों जाएँ |

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